Kolkata कोलकाता: पश्चिम बंगाल में धार्मिक स्थलों से लाउडस्पीकर हटाने के मुद्दे पर सियासी बहस तेज हो गई है। राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता रिताब्रत बनर्जी ने कहा कि अपने धर्म का पालन करना प्रत्येक नागरिक का मौलिक अधिकार है और सरकार किसी भी मंदिर या मस्जिद से लाउडस्पीकर हटाने के पक्ष में नहीं है।
मीडिया से बातचीत में रिताब्रत बनर्जी ने कहा कि सरकार को इस संबंध में कलकत्ता हाईकोर्ट के वर्ष 2020 के आदेश की जानकारी दी गई। उन्होंने स्वीकार किया कि उस समय की सरकार ने अदालत के आदेश के खिलाफ अपील दायर नहीं की थी, जिससे अब प्रत्यक्ष अपील की समय-सीमा समाप्त हो चुकी है।
उन्होंने कहा, "हमें यह देखकर आश्चर्य हुआ कि 2020 में हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ कोई अपील दाखिल नहीं की गई थी। अब हम इस मामले की जिम्मेदारी ले रहे हैं। चूंकि सीधी अपील का समय निकल चुका है, इसलिए हम आदेश पर पुनर्विचार (रिव्यू) की मांग करते हुए अदालत का रुख करेंगे।"
रिताब्रत बनर्जी ने कहा कि सरकार का मानना है कि सभी धर्मों के लोगों को अपने धार्मिक रीति-रिवाजों का पालन करने का समान अधिकार मिलना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार इस मामले में कानूनी प्रक्रिया का पालन करेगी और अदालत के समक्ष अपना पक्ष रखेगी। लाउडस्पीकर से जुड़े नियमों और धार्मिक स्वतंत्रता के बीच संतुलन को लेकर यह मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। अब सभी की नजर हाईकोर्ट में दायर होने वाली संभावित पुनर्विचार याचिका और अदालत के अगले फैसले पर रहेगी।