सरकारी निर्माण कार्यों के लिए खनन नियमों में राहत

Update: 2026-05-22 09:11 GMT
Shimla. शिमला। प्रदेश में सरकारी निर्माण कार्यों को तेज गति देने के लिए खनन नियमों में अहम बदलाव सरकार ने कर किया है। इसके तहत तीन अलग-अलग विभागों के तहत होने वाले निर्माण कार्यो के लिए भी बड़ी राहत मिल गई है। नियमों में बदलाव के बाद अब लोक निर्माण विभाग, जल शक्ति विभाग और हिमुडा 60 लाख रुपए तक की लागत वाले निर्माण कार्यों के लिए सीधे निर्माण सामग्री यानी रेत, बजरी, पत्थर और रोड़ी जैसी सामग्री का उपयोग कर सकेंगे। राज्य सरकार ने हिमाचल प्रदेश माइनर मिनरल्स नियम 2015 में 10वां संशोधन करते हुए यह व्यवस्था की है। इस संबंध में उद्योग विभाग की ओर से अधिसूचना भी जारी कर दी है। जानकारी के अनुसार सरकार ने यह संशोधन विकास कार्यों में देरी कम करने और विभागों को निर्माण सामग्री आसानी से उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से किया है। पहले विभागों को निर्माण सामग्री लेने के लिए कई तरह की अनुमति और औपचारिक प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता था। इससे सडक़, भवन और पेयजल योजनाओं के कार्यों में
देरी होती थी।


अब नई व्यवस्था के तहत विभाग सीधे खनिज सामग्री का उपयोग कर सकेंगे, लेकिन इसके लिए उन्हें पहले निर्धारित रॉयल्टी, प्रोसेसिंग फीस और अन्य शुल्क जमा करवाने होंगे। अधिसूचना के अनुसार हिमाचल प्रदेश लोक निर्माण विभाग, जल शक्ति विभाग तथा हिमाचल प्रदेश हाउसिंग एंड अर्बन डिवेलपमेंट अथॉरिटी (हिमुडा) के 60 लाख रुपये तक की अनुमानित लागत वाले निर्माण कार्य इस सुविधा के दायरे में आएंगे। विभागों को पहले यह तय करना होगा कि निर्माण कार्य के लिए कितनी मात्रा में खनिज सामग्री की जरूरत है। इसके बाद संबंधित शुल्क जमा करवाकर सामग्री का उपयोग किया जा सकेगा। सरकार का मानना है कि नई व्यवस्था से ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों में चल रहे विकास कार्यों को बड़ा फायदा मिलेगा। प्रदेश में कई बार सडक़ निर्माण, पेयजल योजनाओं और छोटे भवन निर्माण कार्य केवल निर्माण सामग्री की उपलब्धता में देरी के कारण अटक जाते थे। अब विभागों को समय पर सामग्री मिलने से परियोजनाओं को तय समय में पूरा करने में मदद मिलेगी।
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