Bilaspur. बिलासपुर। प्रदेश के जलाशयों में दो माह तक मतस्य आखेट पर पूर्ण प्रतिबंध लगने के बाद अब मछुआरों को चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। इस अवधि के दौरान पंजीकृत मछुआरों को दो माह तक तक केंद्र और प्रदेश सरकार की ओर चलाई जा रही योजनाओं के तहत सहायता राशि का लाभ मिलेगा। प्रदेश सरकार की ओर से अभी हाल ही में मछुआरों की समस्या को देखते हुए मछुआरा सम्मान निधि योजना शुरू की है। इस योजना के तहत प्रदेश के मछुआरे पहली दफा लाभान्वित होंगे। केंद्र और प्रदेश सरकार की योजनाओं के तहत हर मछुआरे को मत्स्य आखेट पर प्रतिबंध के दौरान दो माह तक आठ हजार रुपए की राशि मिलेगी। प्रदेश भर के जलाशयों में मतस्य आखेट पर प्रतिबंध लगाया गया है। इस दौरान पंजीकृत मछुआरों को कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
कारोबार पूरी तरह से ठप पड़ जाता है। ऐसे में इन पंजीकृत मछुआरों को राहत प्रदान करने के लिए केंद्र सरकार की ओर से मत्स्य संपदा योजना चलाई गई है। इस योजना के तहत कुल 4500 रुपए की राशि का प्रावधान किया गया है। इसमें 2400 रुपए की राशि केंद्र सरकार, 600 प्रदेश सरकार और 1500 रुपए की राशि स्वयं मछुआरे की होती है। इसके अलावा प्रदेश सरकार द्वारा अभी हाल ही में मछुआरा सम्मान निधि योजना शुरू की गई है। इस योजना के तहत पहली बार मछुआरों को लाभ मिलेगा। योजना के तहत 3500 रुपए की राशि का प्रावधान किया गया है। इन योजनाओं का लाभ केवल पंजीकृत मछुआरों को मिलेगा। इस बारे में मतस्य विभाग के निदेशक विवेक चंदेल ने कहा है कि मत्स्य आखेट पर प्रतिबंध के दौरान मछुआरों को राहत प्रदान करने के लिए केंद्र और प्रदेश सरकार द्वारा योजनाएं चलाई गई हैं। मछुआरों को इस अवधि के दौरान करीब आठ हजार रुपए की राशि केंद्र और प्रदेश सरकार की योजना के तहत मिलती है।