Gaurela-Pendra-Marwahi. गौरेला-पेंड्रा-मरवाही। जिले के मरवाही वन परिक्षेत्र अंतर्गत नाका गांव में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। यहां घर के पास पहुंचे एक जंगली भालू ने ग्रामीण पर हमला कर दिया। अपनी जान बचाने के लिए ग्रामीण ने साहस दिखाते हुए भालू का डटकर सामना किया। काफी देर तक चले संघर्ष के बाद भालू जंगल की ओर भाग गया, लेकिन इस हमले में ग्रामीण गंभीर रूप से घायल हो गया। जानकारी के अनुसार, नाका गांव निवासी विसंभर अपने घर के आसपास मौजूद थे। इसी दौरान अचानक एक जंगली भालू वहां पहुंच गया। ग्रामीण कुछ समझ पाते, इससे पहले ही भालू ने विसंभर पर हमला कर दिया। अचानक हुए हमले के बाद ग्रामीण ने घबराने के बजाय अपनी जान बचाने के लिए भालू से मुकाबला करना शुरू कर दिया।
बताया जा रहा है कि विसंभर और भालू के बीच काफी देर तक संघर्ष चलता रहा। ग्रामीण ने हिम्मत नहीं छोड़ी और लगातार भालू का सामना करता रहा। आखिरकार भालू वहां से जंगल की ओर भाग गया और ग्रामीण की जान बच सकी। भालू के हमले में विसंभर को गंभीर चोटें आई हैं। उसके सिर, हाथ और पैर में गहरी चोट लगी है। घटना के बाद आसपास के लोगों को इसकी जानकारी मिली, जिसके बाद ग्रामीणों ने तत्काल घायल विसंभर को उपचार के लिए मरवाही सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टरों ने घायल ग्रामीण का प्राथमिक उपचार किया, लेकिन चोटों की गंभीरता को देखते हुए उसे बेहतर इलाज के लिए जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। फिलहाल जिला अस्पताल में विसंभर का इलाज जारी है और डॉक्टर उसकी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। घटना के बाद गांव में दहशत का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि वन क्षेत्र से लगे इलाकों में अक्सर जंगली जानवरों की आवाजाही बढ़ जाती है। इससे ग्रामीणों की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी रहती है। वन विभाग को भी घटना की जानकारी दी गई है।
वन विभाग की टीम क्षेत्र में पहुंचकर मामले की जानकारी जुटा सकती है और भालू की गतिविधियों पर नजर रख सकती है। अधिकारियों द्वारा ग्रामीणों को जंगल क्षेत्र में सावधानी बरतने और अकेले बाहर नहीं जाने की सलाह दी जाती है। गौरतलब है कि गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले का बड़ा हिस्सा वन क्षेत्र से घिरा हुआ है। यहां समय-समय पर जंगली जानवरों के गांवों के आसपास पहुंचने की घटनाएं सामने आती रहती हैं। बारिश के मौसम में वन्यजीवों की आवाजाही और बढ़ जाती है, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं का खतरा बना रहता है। ग्रामीणों ने वन विभाग से मांग की है कि गांवों के आसपास नियमित निगरानी की जाए और वन्यजीवों से बचाव के लिए लोगों को जागरूक किया जाए। वहीं, घायल ग्रामीण के इलाज को लेकर परिजन चिंतित हैं।