कोचिंग सेंटरों में छापा, कई सील किए गए

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Update: 2026-06-24 01:55 GMT
यूपी। राजधानी लखनऊ के अलीगंज स्थित कोचिंग संस्थान में हुए दर्दनाक अग्निकांड ने सभी को झकझोर दिया है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सख्त निर्देशों के बाद प्रदेशभर में कोचिंग संस्थानों, अस्पतालों, होटल, लाइब्रेरी और बहुमंजिला इमारतों की सुरक्षा जांच का व्यापक अभियान शुरू कर दिया गया है. शुरुआती जांच में फायर सेफ्टी, इमरजेंसी एग्जिट, भवन मानकों और पंजीकरण से जुड़ी गंभीर खामियां सामने आई हैं. कई जिलों में कोचिंग संस्थानों को सील किया गया है, जबकि सैकड़ों संस्थान जांच के दायरे में हैं.

अलीगंज में हुए अग्निकांड के बाद यह सवाल खड़ा हो गया कि आखिर प्रदेशभर में संचालित हजारों कोचिंग संस्थानों में छात्रों की सुरक्षा कितनी सुनिश्चित है. घटना के बाद शासन ने किसी भी प्रकार की लापरवाही पर शून्य सहनशीलता की नीति अपनाते हुए जिलाधिकारियों, विकास प्राधिकरणों, पुलिस, अग्निशमन विभाग और विद्युत सुरक्षा इकाइयों को संयुक्त निरीक्षण के निर्देश दिए. जांच अभियान का फोकस उन संस्थानों पर रखा गया जहां बड़ी संख्या में छात्र पढ़ाई करते हैं लेकिन सुरक्षा मानकों का पालन नहीं हो रहा.  संगम नगरी प्रयागराज में प्रशासन की कार्रवाई सबसे अधिक चर्चा में रही. प्रयागराज विकास प्राधिकरण (पीडीए) ने सिविल लाइंस स्थित खान ग्लोबल क्लासेज को सील कर दिया. अधिकारियों के अनुसार जिस भवन में कोचिंग संचालित हो रही थी, उसका नक्शा व्यावसायिक उपयोग के लिए स्वीकृत था, जबकि कोचिंग संस्थान का संचालन सामुदायिक सुविधा श्रेणी में आता है. आवश्यक भू-उपयोग स्वीकृति न होने के कारण कार्रवाई की गई. सीलिंग से पहले छात्रों को सुरक्षित बाहर निकाला गया और कार्यालय बंद कराया गया. संस्थान के बाहर नोटिस चस्पा कर चेतावनी दी गई कि बिना अनुमति सील तोड़ने या संचालन शुरू करने पर एफआईआर दर्ज कराई जाएगी. गौतमबुद्ध नगर प्रशासन की संयुक्त टीम ने नोएडा के विभिन्न क्षेत्रों में निरीक्षण किया. सेक्टर-104 स्थित ओम कोचिंग सेंटर में प्रवेश और निकास के लिए केवल एक संकरा रास्ता मिला. जांच में न तो पंजीकरण मिला और न ही फायर एनओसी. इसके बाद सेक्टर-49 स्थित बासु कोचिंग सेंटर की जांच हुई. यहां तीन मंजिलों पर कक्षाएं संचालित हो रही थीं लेकिन आपातकालीन निकास की व्यवस्था नहीं थी. दोनों संस्थानों को तत्काल प्रभाव से सील कर दिया गया.

प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए मशहूर कानपुर का काकादेव क्षेत्र भी जांच के केंद्र में रहा. कानपुर विकास प्राधिकरण और अग्निशमन विभाग की टीमों ने निरीक्षण के दौरान पाया कि कई संस्थानों ने बेसमेंट पार्किंग को क्लासरूम में बदल दिया था. यहां 30 से अधिक कोचिंग संस्थानों को सील किया गया. कार्रवाई की जद में कई चर्चित संस्थान भी आए. अधिकारियों के अनुसार प्रारंभिक चरण में 22 संस्थानों को चिह्नित किया गया था, जिसके बाद कार्रवाई का दायरा बढ़ाया गया. वाराणसी के दुर्गाकुंड क्षेत्र, जिसे शहर का प्रमुख कोचिंग हब माना जाता है, में फायर सर्विस, विकास प्राधिकरण और पुलिस की संयुक्त टीम ने निरीक्षण किया. जांच के दौरान कुछ संस्थानों के बेसमेंट में जनरेटर, डीजल, पेट्रोल, लकड़ी का कबाड़ और अन्य ज्वलनशील सामग्री मिली. अधिकारियों ने इसे गंभीर खतरा बताते हुए संचालकों को कड़ी चेतावनी दी. एक प्रतिष्ठित कोचिंग संस्थान ऐसी इमारत में संचालित पाया गया जिसका मानचित्र स्वीकृत नहीं था. इसके बाद पूरी इमारत को सील करने का आदेश दिया गया.

गोरखपुर में भी निरीक्षण के दौरान कई खामियां सामने आईं. एक प्रमुख संस्थान में केवल एक सीढ़ी मिली, जबकि फायर अलार्म और अग्निशमन व्यवस्था मानकों के अनुरूप नहीं थी. मुख्य अग्निशमन अधिकारी ने बताया कि कई संस्थानों को नोटिस जारी कर निर्धारित समय के भीतर कमियां दूर करने के निर्देश दिए गए हैं. समय सीमा के बाद भी सुधार न होने पर कठोर कार्रवाई की जाएगी. उन्नाव में जिला प्रशासन की संयुक्त टीम ने तीन कोचिंग संस्थानों को सीज किया. वहीं मिर्जापुर में लगभग एक दर्जन संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई की गई. अधिकारियों का कहना है कि जिन संस्थानों में फायर सेफ्टी, भवन सुरक्षा या पंजीकरण संबंधी कमियां पाई जाएंगी, उनके खिलाफ सीलिंग सहित अन्य कानूनी कदम उठाए जाएंगे.

गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) ने अभियान को और व्यापक बनाते हुए कोचिंग संस्थानों के साथ-साथ होटल, बैंक्वेट हॉल, अस्पताल और व्यावसायिक भवनों का भी निरीक्षण शुरू किया. अब तक की जांच में 206 ऐसे मामले चिन्हित किए गए हैं जहां अग्नि सुरक्षा संबंधी कमियां मिली हैं. इनमें से 56 मामलों में सीलिंग जैसी कार्रवाई शुरू की जा चुकी है. बांदा में कमिश्नर के औचक निरीक्षण के दौरान कई निजी अस्पतालों में फायर उपकरण केवल दिखावे के लिए लगे पाए गए. कई उपकरण काम ही नहीं कर रहे थे. कमिश्नर ने अधिकारियों को फटकार लगाते हुए 24 घंटे के भीतर सभी सुरक्षा उपकरण चालू कराने के निर्देश दिए. साथ ही स्पष्ट किया कि बिना फायर सेफ्टी के कोई भी अस्पताल या कोचिंग सेंटर संचालित नहीं होगा.

आगरा के चर्चित आकाश इंस्टीट्यूट में बेसमेंट से धुआं उठने के बाद अफरा-तफरी मच गई. हालांकि जांच में पता चला कि शॉर्ट सर्किट के कारण धुआं उठा था और कोई बड़ी आग नहीं लगी थी. प्रबंधन ने समय रहते छात्रों को बाहर निकाल लिया, जिससे किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई. पुलिस और प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्थाओं को संतोषजनक बताया.

यूपी के उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने कहा है कि प्रदेश में संचालित सभी कोचिंग संस्थानों का व्यापक सर्वे कराया जा रहा है. जो संस्थान उत्तर प्रदेश कोचिंग विनियमन अधिनियम के तहत पंजीकृत नहीं हैं, उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई होगी. उन्होंने स्पष्ट किया कि भवन सुरक्षा, अग्निशमन व्यवस्था, विद्युत सुरक्षा और आधारभूत सुविधाओं का ऑडिट किया जा रहा है. विद्यार्थियों की सुरक्षा और गुणवत्तापूर्ण शैक्षिक वातावरण सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है.

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