राहुल गांधी बैठक के बाद राजघाट जाएंगे, विपक्षी सांसद रहेंगे शामिल
देखें VIDEO...
New Delhi. नई दिल्ली। दिल्ली में छात्रों और युवाओं का आंदोलन अब देश के कई बड़े शहरों तक फैलता जा रहा है। 'कॉकरोच जनता पार्टी' (सीजेपी) के नाम से चल रहे इस आंदोलन में बड़ी संख्या में छात्र, युवा और जेन जी वर्ग के लोग शामिल हो रहे हैं। जंतर-मंतर पर जारी यह प्रदर्शन शिक्षा व्यवस्था की खामियों, बेरोजगारी और युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों को लेकर किया जा रहा है। आंदोलनकारियों ने सरकार से कई मांगें रखी हैं, जिनमें शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग भी प्रमुख है।
20 जुलाई को प्रदर्शनकारियों ने "चलो पार्लियामेंट" मार्च निकालने का प्रयास किया। इस दौरान हजारों छात्र और युवा संसद की ओर बढ़ने लगे, लेकिन दिल्ली पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए बैरिकेडिंग की। प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच टकराव की स्थिति बन गई। पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए बैरिकेड लगाए, लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया। इस दौरान कई प्रदर्शनकारियों और पुलिसकर्मियों के घायल होने की जानकारी सामने आई। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनके मुद्दों को लंबे समय से नजरअंदाज किया जा रहा है। पुलिस कार्रवाई के बाद भी आंदोलनकारी पीछे नहीं हटे। जंतर-मंतर पर लगाए गए टेंट हटाए जाने के बाद भी छात्र दोबारा वहां पहुंच गए और धरना जारी रखा। बारिश के बीच भी प्रदर्शनकारी अपनी मांगों को लेकर डटे हुए हैं।
आंदोलन से जुड़े प्रमुख चेहरों में सोनम वांगचुक भी शामिल हैं। बताया गया कि वे अस्पताल में भर्ती होने के बावजूद भूख हड़ताल जारी रखे हुए हैं। आंदोलनकारियों का कहना है कि सरकार को छात्रों की समस्याओं पर गंभीरता से विचार करना चाहिए और शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए। सीजेपी आंदोलन अब केवल दिल्ली तक सीमित नहीं रहा है। प्रदर्शन का असर मुंबई, बेंगलुरु और कोलकाता जैसे बड़े शहरों में भी देखने को मिल रहा है। इन शहरों में भी छात्र और युवा शिक्षा, रोजगार और परीक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर आवाज उठा रहे हैं। आंदोलन के संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा है कि यह आंदोलन अनिश्चितकाल तक जारी रहेगा।
इस बीच आंदोलन को लेकर राजनीतिक गतिविधियां भी तेज हो गई हैं। कांग्रेस समेत विपक्षी दलों के इंडिया गठबंधन ने छात्रों के प्रदर्शन का समर्थन किया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी सहित कई विपक्षी नेताओं ने संसद में नीट परीक्षा और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को उठाया है। विपक्षी नेताओं ने काले कपड़े पहनकर विरोध प्रदर्शन भी किया और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग दोहराई। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे भी विपक्षी नेताओं की बैठक में शामिल होने के लिए राहुल गांधी के आवास पहुंचे। बैठक को लेकर सवाल पूछे जाने पर खड़गे ने हल्के अंदाज में कहा कि "साहब ने चाय के लिए बुलाया था, इसलिए मैं चाय पीने आया हूं।" हालांकि, इस बैठक को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि संसद सत्र के दौरान विपक्ष सरकार को घेरने की रणनीति तैयार कर रहा है।
वहीं बीजेपी ने विपक्ष की रणनीति पर सवाल उठाए हैं। बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव बीएल संतोष ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर राहुल गांधी के आवास पर हुई बैठक को लेकर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस जंतर-मंतर पर चल रहे छात्रों के आंदोलन से ध्यान हटाने के लिए राजनीतिक गतिविधियां कर रही है। उन्होंने इसे "ड्रामेबाजी" बताते हुए कहा कि इससे देश का नुकसान हो रहा है। फिलहाल सीजेपी आंदोलन को लेकर देशभर में चर्चा जारी है। छात्र संगठन और युवा अपनी मांगों को लेकर लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं, जबकि सरकार और विपक्ष के बीच राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। आने वाले दिनों में यह आंदोलन किस दिशा में जाता है, इस पर सभी की नजरें बनी हुई हैं।