बिहार में सियासी हलचल, नीतीश कुमार के इस्तीफे और नई सरकार गठन की अटकलें तेज़

बड़ी खबर

Update: 2026-04-13 11:02 GMT
Bihar. बिहार। राज्य की राजनीति में मंगलवार को बड़ा बदलाव देखने की संभावना जताई जा रही है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इस्तीफे और नई सरकार के गठन को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। इस बीच एनडीए (राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन) ने पटना में विधायक दल की अहम बैठक बुलाई है, जिसमें नए नेता के चयन और सरकार गठन की प्रक्रिया पर निर्णय लिया जाएगा। सूत्रों के अनुसार, 14 अप्रैल को शाम 4 बजे पटना स्थित विधानसभा भवन के सेंट्रल हॉल में एनडीए के सभी विधायक एक साथ बैठक करेंगे। इसी बैठक में एनडीए विधायक दल का नेता चुना जाएगा, जो आगे चलकर राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेगा। बैठक में जिस नेता को सबसे अधिक समर्थन मिलेगा, उसी के नाम पर अंतिम सहमति बनेगी।
इस बैठक में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को एनडीए की ओर से ऑब्जर्वर के तौर पर भेजा गया है। उनकी मौजूदगी में पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी तरीके से पूरा किए जाने की बात कही जा रही है। बैठक को लेकर सभी दलों के विधायकों की उपस्थिति अनिवार्य मानी जा रही है, जिससे राजनीतिक गतिविधियां और तेज हो गई हैं। 15 अप्रैल को सुबह 11 बजे पटना के लोकभवन में शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किए जाने की तैयारी की जा रही है। लोकभवन को इस तरह के बड़े सरकारी आयोजनों के लिए तैयार किया गया है और वहां व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है। प्रशासनिक स्तर पर सुरक्षा और प्रोटोकॉल से जुड़ी तैयारियां भी तेज कर दी गई हैं।
सूत्रों के अनुसार, लोकभवन के अधिकारियों ने डिप्टी मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को शपथ ग्रहण समारोह की तैयारियों की जानकारी दी है। इससे राजनीतिक हलकों में यह चर्चा और तेज हो गई है कि वे नई सरकार गठन की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। हालांकि आधिकारिक तौर पर इस पर कोई पुष्टि नहीं की गई है। एनडीए गठबंधन में शामिल दलों के बीच मुख्यमंत्री पद को लेकर सहमति बनाना हमेशा से एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया रही है। इसी कारण पहले विधायक दल की बैठक बुलाई जाती है, जिसमें सभी सहयोगी दल मिलकर एक नाम पर सहमति बनाते हैं। इसके बाद ही औपचारिक रूप से मुख्यमंत्री के नाम की घोषणा की जाती है।
राजनीतिक सूत्रों का कहना है कि इस बार भी मुख्यमंत्री चयन को लेकर विभिन्न दलों के बीच चर्चा जारी है। एनडीए में शामिल पार्टियों की अपनी-अपनी प्राथमिकताएं होती हैं, लेकिन अंतिम निर्णय सामूहिक सहमति से ही लिया जाएगा। इसी वजह से कल की बैठक को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, नई कैबिनेट के गठन में जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के कोटे में मंत्रियों की संख्या बढ़ सकती है। संभावना जताई जा रही है कि जेडीयू से चार से पांच नए चेहरों को मंत्री पद मिल सकता है। मौजूदा समय में नीतीश कैबिनेट में मुख्यमंत्री को मिलाकर जेडीयू के आठ मंत्री हैं।
इसके अलावा यह भी चर्चा है कि इस बार कई नए विधायकों को पहली बार मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है। खासकर मिथिलांचल और शाहाबाद क्षेत्र से नए चेहरों को प्रतिनिधित्व दिए जाने की संभावना जताई जा रही है, जिससे क्षेत्रीय संतुलन साधने की कोशिश की जाएगी। राजनीतिक हलकों में इस पूरे घटनाक्रम को लेकर उत्सुकता बढ़ गई है। पटना में प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर गतिविधियां तेज हो गई हैं और सभी की नजरें 14 अप्रैल की बैठक पर टिकी हुई हैं। फिलहाल आधिकारिक घोषणा का इंतजार किया जा रहा है, लेकिन राजनीतिक संकेतों से यह साफ है कि बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव तय माना जा रहा है। आने वाले 24 घंटे राज्य की राजनीति के लिए बेहद निर्णायक साबित हो सकते हैं।
Tags:    

Similar News