Delhi साकेत बिल्डिंग हादसे में MCD जिम्मेदार

Update: 2026-07-29 03:31 GMT

Delhi दिल्ली सरकार के आदेश पर हुई मजिस्ट्रेट जांच में साकेत मेट्रो स्टेशन के पास एक कमर्शियल बिल्डिंग के गिरने के लिए दिल्ली नगर निगम (MCD) को "मुख्य रूप से जिम्मेदार" ठहराया गया है। इस घटना में मई में छह लोगों की मौत हो गई थी। जांच में MCD पर अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई न करने और जांच को गुमराह करने के लिए सरकारी रिकॉर्ड में हेरफेर करने का आरोप लगाया गया है। साउथ दिल्ली के डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट ने दिल्ली के मुख्य सचिव को यह रिपोर्ट सौंपी। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस हादसे को रोका जा सकता था। यह हादसा बिना इजाज़त किए गए स्ट्रक्चरल बदलावों (जैसे अवैध तीसरी और चौथी मंज़िल बनाना) और MCD द्वारा बिल्डिंग से जुड़े नियमों को लागू न कर पाने की वजह से हुआ। कई मंज़िलों वाली यह बिल्डिंग 30 मई को गिर गई थी, जिसमें छह लोगों की मौत हो गई और आठ लोग घायल हो गए।

जांच के मुताबिक, MCD को 9 मार्च को अवैध निर्माण के बारे में शिकायत मिली थी, लेकिन उसने दो महीने से ज़्यादा समय तक न तो कोई जांच की, न ही नियमों के उल्लंघन की पुष्टि की और न ही इसे गिराने या रोकने के लिए कोई कार्रवाई की। रिपोर्ट में बताया गया है कि अवैध तीसरी और चौथी मंज़िल के खिलाफ़ आधिकारिक तौर पर कार्रवाई 27 मई को शुरू की गई, जबकि आरोप है कि ये मंज़िलें बिल्डिंग गिरने से 3 महीने पहले ही बना ली गई थीं।

जांच में आरोप लगाया गया है कि घटना के बाद MCD अधिकारियों ने "झूठे और मनगढ़ंत" दस्तावेज़ तैयार किए। इनमें 27 मई का 'शो-कॉज़ नोटिस' (कारण बताओ नोटिस) और 29 मई का 'वर्क-स्टॉप नोटिस' (काम रोकने का नोटिस) शामिल है। ऐसा इसलिए किया गया ताकि यह गलत धारणा बनाई जा सके कि घटना से पहले ही कार्रवाई की जा चुकी थी। MCD के इस दावे को खारिज करते हुए कि अंडरग्राउंड पानी की टंकी के लिए खुदाई की वजह से बिल्डिंग गिरी, रिपोर्ट में कहा गया है कि इस बात का कोई तकनीकी सबूत नहीं है। दिल्ली पुलिस और दिल्ली जल बोर्ड को क्लीन चिट देते हुए, जांच में MCD की निगरानी और नियमों को लागू करने के सिस्टम में गंभीर कमियां पाई गईं।

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