New Delhi. नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और खाड़ी देशों में हालात को लेकर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को ओमान के सुल्तान हैथम बिन तारिक और मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम से टेलीफोन पर अलग-अलग बातचीत की। बातचीत के दौरान तीनों नेताओं ने पश्चिम एशिया में शांति और स्थिरता बहाल करने की आवश्यकता पर चर्चा की और तनाव को कम करने के लिए संवाद और कूटनीति को प्राथमिकता देने पर सहमति व्यक्त की। यह बातचीत उस समय हुई जब 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर हमले के बाद से खाड़ी क्षेत्र में तनाव जारी है। ईरान ने इसके जवाब में कई खाड़ी देशों पर हमले किए, जिससे क्षेत्रीय सुरक्षा और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में नौवहन पर संकट उत्पन्न हुआ। पीएम मोदी ने इस बातचीत में सुरक्षित और निर्बाध नौवहन पर विशेष जोर दिया।
पीएम मोदी और ओमान के सुल्तान की बातचीत
पीएम मोदी ने ओमान के सुल्तान के साथ बातचीत में ओमान के लोगों को ईद की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि दोनों देशों ने खाड़ी क्षेत्र में तनाव कम करने और उसके बाद शांति और स्थिरता बहाल करने के लिए संवाद और कूटनीति को प्राथमिकता देने की आवश्यकता पर सहमति व्यक्त की। पीएम मोदी ने ओमान की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के उल्लंघन की भारत द्वारा की गई निंदा दोहराई। उन्होंने कहा कि भारत ने क्षेत्र में फंसे भारतीय नागरिकों सहित हजारों लोगों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए। इसके अलावा, उन्होंने कहा कि भारत और ओमान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में सुरक्षित और निर्बाध नौवहन के लिए प्रतिबद्ध हैं। इससे पहले भी पीएम मोदी ने ओमान के सुल्तान से बातचीत की थी, और यह इस संघर्ष के बाद उनकी दूसरी बातचीत मानी जा रही है। उन्होंने अपने संवाद में खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखने के लिए साझा प्रतिबद्धता दोहराई।
पीएम मोदी और मलेशिया के प्रधानमंत्री की बातचीत
प्रधानमंत्री मोदी ने मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम से भी बातचीत में ईद-उल-फितर की बधाई दी और मलेशिया के लोगों के लिए शुभकामनाएं भेजीं। मोदी ने कहा कि दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया में गंभीर और चिंताजनक स्थिति पर चर्चा की और संवाद एवं कूटनीति के माध्यम से तनाव कम करने की आवश्यकता पर सहमति जताई। मोदी ने इस दौरान दोहराया कि भारत और मलेशिया शांति और स्थिरता की शीघ्र बहाली के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कहा कि संवाद और कूटनीति इस समय की सबसे प्रभावी रणनीति है।
मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और भारत की भूमिका
28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर हमला करने के बाद से मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ गया। ईरान ने इसके जवाब में कई खाड़ी देशों पर हमले किए, जिससे खाड़ी देशों की सुरक्षा, तेल और नौवहन मार्गों पर संकट उत्पन्न हुआ। इस घटना के बाद से भारत ने अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने के लिए सऊदी अरब, बहरीन, संयुक्त अरब अमीरात, जॉर्डन, इजराइल और ईरान सहित कई देशों के नेताओं से बातचीत की। पीएम मोदी की यह कोशिश खाड़ी में सुरक्षा और राजनीतिक स्थिरता बनाए रखने की भारत की नीति को दर्शाती है। उन्होंने ओमान और मलेशिया के नेताओं के साथ स्पष्ट किया कि भारत स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में सुरक्षित नौवहन, तेल आपूर्ति और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए प्रतिबद्ध है।
संवाद और कूटनीति के महत्व पर जोर
मोदी ने दोनों नेताओं के साथ बातचीत में यह रेखांकित किया कि मिडिल ईस्ट में संवाद और कूटनीति ही तनाव कम करने और क्षेत्र में शांति स्थापित करने का सबसे प्रभावी उपाय है। उन्होंने कहा कि भारत हमेशा वैश्विक शांति और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए प्रतिबद्ध रहा है और यह प्रतिबद्धता इस संकट के दौरान भी जारी है। विशेषज्ञों का कहना है कि पीएम मोदी की यह पहल न केवल भारत की सुरक्षा नीति को मजबूती देती है, बल्कि खाड़ी देशों और मलेशिया के साथ भारत के द्विपक्षीय संबंधों को भी मजबूत करती है। इसके अलावा, ईद के अवसर पर शुभकामनाओं का आदान-प्रदान दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और धार्मिक संबंधों को भी सुदृढ़ करता है।