नई दिल्ली: भारतीय वायुसेना की कम होती लड़ाकू स्क्वाड्रन संख्या और तेजी से बदलती युद्ध तकनीक के बीच नए वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल आशुतोष दीक्षित ने भविष्य की रणनीति का खाका पेश किया है। उनकी प्राथमिकता केवल नए लड़ाकू विमान शामिल करना नहीं, बल्कि वायुसेना को तकनीक, हथियार और तैयारी के मामले में मजबूत बनाना भी है। इसके लिए तेजस एमके-1ए, तेजस एमके-2 और पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ विमान एएमसीए जैसी स्वदेशी परियोजनाओं को आगे बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा।
दीक्षित ने स्पष्ट किया है कि भारतीय जरूरतों के अनुसार देश में विकसित तकनीक और हथियारों के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया जाएगा। उनका कहना है कि वायुसेना को इस स्थिति में रहना चाहिए कि जरूरत पड़ने पर वह किसी भी चुनौती का तुरंत जवाब दे सके।
वायुसेना की ताकत बढ़ाना सबसे पहली प्राथमिकता
वायुसेना प्रमुख के मुताबिक, उनकी पहली जिम्मेदारी लड़ाकू क्षमता को निर्धारित स्तर तक वापस लाना है। फिलहाल भारतीय वायुसेना के पास स्वीकृत संख्या के मुकाबले लड़ाकू स्क्वाड्रन कम हैं। स्वीकृत संख्या 42.5 स्क्वाड्रन है, जबकि मौजूदा संख्या लगभग 30 के आसपास बताई जाती है।
इस अंतर को कम करने के लिए नए विमानों की जरूरत है। तेजस एमके-1ए की आपूर्ति और भविष्य में अतिरिक्त राफेल विमानों की खरीद जैसे विकल्पों पर भी नजर है। दीक्षित ने कहा कि हर स्क्वाड्रन, रडार, एयर डिफेंस यूनिट और जवान को हर समय तैयार रहना होगा। उनके अनुसार, वायुसेना का काम केवल युद्ध के दौरान जवाब देना नहीं है। उसकी मजबूत मौजूदगी ऐसी होनी चाहिए कि विरोधी किसी सैन्य टकराव की शुरुआत करने से पहले भी उसके परिणामों पर विचार करे।
तेजस और एएमसीए से स्वदेशी क्षमता को मिलेगा बढ़ावा
आशुतोष दीक्षित ने तेजस एमके-1ए, तेजस एमके-2 और एएमसीए को भविष्य की प्रमुख परियोजनाओं में शामिल किया है। तेजस एमके-1ए को जल्द वायुसेना में शामिल करना फिलहाल सबसे जरूरी कामों में से एक है। यह विमान पुराने लड़ाकू विमानों की जगह लेने में मदद करेगा। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) को तेजस एमके-1ए के कुल 180 विमानों के लिए ऑर्डर मिले हैं। इनकी आपूर्ति में देरी के कारण वायुसेना की योजनाओं पर असर पड़ा है। अब इन विमानों के शामिल होने से लड़ाकू बेड़े को मजबूत करने की उम्मीद है।
वहीं, तेजस एमके-2 को इससे अधिक आधुनिक क्षमता के साथ विकसित किया जा रहा है। इसका ढांचा तैयार होने के बाद अगले चरणों पर काम चल रहा है। लक्ष्य है कि मार्च 2027 तक इसका पहला ग्राउंड रन हो और उसी साल पहली उड़ान भी कराई जाए। भविष्य में यह मिराज-2000, मिग-29 और जगुआर जैसे विमानों की जगह ले सकता है।
चीन की हवाई ताकत के बीच AMCA क्यों अहम?
पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ लड़ाकू विमान एएमसीए को भारत की भविष्य की हवाई सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसकी अहमियत इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि चीन अपने जे-20 लड़ाकू विमानों को तैनात कर चुका है और जे-35 पर भी काम कर रहा है।
स्टील्थ तकनीक वाले विमानों को इस तरह तैयार किया जाता है कि दुश्मन के रडार के लिए उन्हें पहचानना मुश्किल हो। एएमसीए परियोजना के जरिए भारत भी इस श्रेणी का स्वदेशी विमान विकसित करना चाहता है। हालांकि, इस परियोजना को पूरा होने में समय लगेगा। इसलिए वायुसेना के सामने मौजूदा जरूरतों और भविष्य की तकनीक के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती है।
ड्रोन और AI से निपटने के लिए बदलेगी रणनीति
आधुनिक युद्ध में अब केवल लड़ाकू विमानों और मिसाइलों की भूमिका नहीं रह गई है। ड्रोन, साइबर तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और अंतरिक्ष से जुड़ी क्षमताएं भी सैन्य रणनीति का हिस्सा बन रही हैं।
वायुसेना प्रमुख ने नेटवर्क आधारित कमांड सिस्टम और एआई की मदद से काम करने वाली व्यवस्थाओं को मजबूत करने की बात कही है। ड्रोन हमलों से बचाव के लिए कई स्तरों वाली सुरक्षा तैयार करने पर भी ध्यान दिया जाएगा। इसके साथ ही विमानों और सैन्य उपकरणों की मरम्मत में लगने वाला समय घटाने की योजना है।
तीनों सेनाओं के तालमेल से बनेगी भविष्य की रणनीति
दीक्षित ने थलसेना और नौसेना के साथ बेहतर तालमेल को भी जरूरी बताया है। उनका मानना है कि किसी भी बड़े सैन्य अभियान की योजना बनाते समय वायुसेना की भूमिका को शुरुआत से शामिल किया जाना चाहिए। तीनों सेनाओं के बीच संयुक्त व्यवस्था विकसित करने की दिशा में थिएटर कमान का प्रस्ताव भी महत्वपूर्ण है। इसका उद्देश्य सैन्य संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल और अलग-अलग सेनाओं के बीच समन्वय बढ़ाना है।
वायुसेना प्रमुख ने अपनी भविष्य की योजना को 'वायु' नाम दिया है। इसमें सतर्कता और तैयारी, आत्मनिर्भरता, नई सोच और एकजुट होकर काम करने जैसे लक्ष्य शामिल हैं। इससे साफ है कि आने वाले समय में वायुसेना का ध्यान केवल विमानों की संख्या बढ़ाने पर नहीं, बल्कि तकनीक और संचालन के पूरे ढांचे को आधुनिक बनाने पर रहेगा।
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