'खाने को कुछ नहीं, पत्ते खाकर गुजारा', बाढ़ पीड़ित की आपबीती

Update: 2026-07-21 09:16 GMT

गुवाहाटी। असम में भारी बारिश और बाढ़ ने एक बार फिर लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। शिवसागर और चराईदेव जिलों में आई भीषण बाढ़ ने हजारों परिवारों को बेघर कर दिया है। कई गांव पूरी तरह पानी में डूब गए हैं और लोग अपनी जान बचाने के लिए पेड़ों, छतों और ऊंचे स्थानों पर शरण लेने को मजबूर हैं। इस आपदा के बीच एक स्कूली छात्र की दर्दनाक कहानी सामने आई है, जिसने बाढ़ की भयावह स्थिति को उजागर कर दिया है।

नजीरा क्षेत्र के हुलंग काटोनी गांव का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में एक नाबालिग बच्चा हाथ में एक पत्ता पकड़े हुए दिखाई दे रहा है। बच्चा अपनी आपबीती बताते हुए कहता है कि उनके पास खाने के लिए कुछ नहीं है और मजबूरी में वह पत्ते खाने को मजबूर हैं। बच्चे के साथ उसकी मां और परिवार के अन्य सदस्य भी उसी पेड़ पर बैठे नजर आ रहे हैं।

परिवार के अनुसार, बाढ़ का पानी इतनी तेजी से बढ़ा कि उन्हें घर छोड़कर जान बचाने के लिए पेड़ पर चढ़ना पड़ा। उन्होंने पूरी रात बारिश के बीच पेड़ पर बैठकर गुजारी। परिवार के सदस्यों ने बताया कि घर पूरी तरह पानी में डूब चुका है और उनके पास न तो भोजन है और न ही सुरक्षित रहने की जगह।

यह घटना नजीरा कस्बे से करीब चार किलोमीटर दूर हुलंग काटोनी गांव की बताई जा रही है। बताया गया कि पड़ोसी राज्य नगालैंड की पहाड़ियों से आए तेज जल बहाव के कारण इलाके में अचानक बाढ़ की स्थिति पैदा हुई। पानी का स्तर तेजी से बढ़ने के कारण कई गांवों का संपर्क टूट गया है।

वायरल वीडियो में आसपास का पूरा इलाका जलमग्न दिखाई दे रहा है। घरों की टिन की छतों तक पानी पहुंच चुका है। कई परिवार अपने घरों की छतों पर फंसे हुए हैं और मदद का इंतजार कर रहे हैं। हालात इतने खराब हैं कि कई जगहों पर लोग भोजन, पीने के पानी और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं से भी वंचित हैं।

नजीरा के पूर्व विधायक और कांग्रेस नेता देबब्रत सैकिया ने इस स्थिति को बेहद गंभीर बताते हुए प्रशासन से तत्काल बचाव अभियान चलाने की मांग की है। उन्होंने सोशल मीडिया पर बच्चे का वीडियो साझा करते हुए सरकार, जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग से सेना, एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की मदद लेने की अपील की।

उन्होंने कहा कि जल स्तर लगातार बढ़ रहा है और कई परिवारों की जान खतरे में है। छोटे बच्चे, बुजुर्ग, महिलाएं और बीमार लोग बिना भोजन और आश्रय के छतों और पेड़ों पर रहने को मजबूर हैं। उन्होंने इसे नजीरा क्षेत्र की सबसे गंभीर बाढ़ आपदाओं में से एक बताया।

बाढ़ प्रभावित इलाकों में बचाव कार्यों में संचार व्यवस्था भी बड़ी चुनौती बन रही है। कई लोगों के मोबाइल फोन की बैटरी खत्म हो चुकी है और नेटवर्क की समस्या के कारण वे प्रशासन तक अपनी स्थिति की जानकारी नहीं पहुंचा पा रहे हैं। इसके चलते कई परिवारों तक राहत पहुंचने में देरी हो रही है।

नजीरा सर्किल के सुंदर पुखुरी कलिता गांव, सुंदरपुखुरी हुलंग गांव और निर्मोलिया गांव में स्थिति सबसे ज्यादा खराब बताई जा रही है। यहां रविवार से ही करीब एक हजार से अधिक परिवार पानी के बीच फंसे हुए हैं। इनमें छोटे बच्चे, बुजुर्ग और दिव्यांग लोग भी शामिल हैं।

तेज बहाव के कारण सड़कें और रास्ते बंद हो चुके हैं, जिससे लोगों का बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्हें तुरंत भोजन, पीने का पानी और चिकित्सा सहायता की जरूरत है।

असम में आई इस बाढ़ ने एक बार फिर प्राकृतिक आपदाओं से निपटने की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशासन की ओर से राहत और बचाव कार्य जारी हैं, लेकिन कई दुर्गम इलाकों में फंसे लोगों तक मदद पहुंचाना अभी भी बड़ी चुनौती बना हुआ है।

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