दिल्ली। केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट मामलों की मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को नई दिल्ली में स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति गाय पार्मेलिन से मुलाकात की। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच भारत और स्विट्जरलैंड के साझा हितों से जुड़े कई आर्थिक और निवेश संबंधी मुद्दों पर चर्चा हुई। वित्त मंत्रालय के अनुसार, बैठक में दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग को और मजबूत बनाने पर विशेष जोर दिया गया। बातचीत का प्रमुख विषय द्विपक्षीय निवेश संधि यानी Bilateral Investment Treaty (BIT) से जुड़ी वार्ताओं को आगे बढ़ाना रहा। भारत और स्विट्जरलैंड ऐसी निवेश व्यवस्था विकसित करने की दिशा में काम कर रहे हैं, जो दोनों देशों के लिए लाभकारी हो और निवेशकों को बेहतर अवसर उपलब्ध करा सके।
बैठक में इस बात पर भी चर्चा हुई कि दोनों देशों के बीच निवेश प्रवाह को किस तरह बढ़ाया जा सकता है। भारत और स्विट्जरलैंड के बीच पहले से मजबूत व्यापारिक और आर्थिक संबंध हैं। नई निवेश संधि पर प्रगति होने से इन संबंधों को और विस्तार मिलने की उम्मीद है। वित्त मंत्रालय ने बताया कि दोनों पक्षों ने आर्थिक जुड़ाव को गहरा करने और नए निवेश अवसरों की संभावनाओं पर विचार साझा किए। इसका उद्देश्य केवल निवेश बढ़ाना ही नहीं, बल्कि दोनों देशों के उद्योगों और कंपनियों के बीच दीर्घकालिक साझेदारी को मजबूत करना भी है।
स्विट्जरलैंड भारत के लिए यूरोप में एक महत्वपूर्ण आर्थिक भागीदार रहा है। कई स्विस कंपनियां भारत में विभिन्न क्षेत्रों में काम कर रही हैं, जबकि भारतीय कंपनियों की भी स्विट्जरलैंड में मौजूदगी है। ऐसे में द्विपक्षीय निवेश संधि को आगे बढ़ाने से कंपनियों के लिए निवेश से संबंधित स्पष्ट और स्थिर व्यवस्था तैयार करने में मदद मिल सकती है। बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने आपसी आर्थिक सहयोग के मौजूदा स्तर और भविष्य की संभावनाओं पर भी चर्चा की। दोनों पक्षों ने यह माना कि निवेश और व्यापार संबंधों को मजबूत करने के लिए नियमित संवाद और सहयोग जरूरी है।
वित्त मंत्रालय के मुताबिक, भारत और स्विट्जरलैंड की कोशिश ऐसी द्विपक्षीय निवेश संधि पर आगे बढ़ने की है, जो दोनों देशों के हितों को ध्यान में रखे और निवेश प्रवाह बढ़ाने के लिए अनुकूल माहौल तैयार करे। निर्मला सीतारमण और गाय पार्मेलिन की यह बैठक दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। आने वाले समय में BIT पर वार्ता की प्रगति भारत-स्विट्जरलैंड आर्थिक साझेदारी के लिए अहम होगी।
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