New Delhi: FRS तकनीक से अपराधियों की पहचान अब चुटकियों में
"FRS से बच निकलना हुआ मुश्किल"
नई दिल्ली: फेस रिकग्निशन सिस्टम (एफआरएस) का इस्तेमाल कर रही पुलिस अब चंद सेकंड में अपराधी की पहचान कर उसके गिरेबान पर हाथ डाल देती है। पुलिस की एफआरएस वैन विभिन्न इलाकों में तैनात हैं। एक बार अपराधी का चेहरा कैमरे की जद में आया नहीं कि उसकी पूरी जन्म कुंडली वैन में मौजूद पुलिसकर्मियों के कंप्यूटर पर आ जाती है। फिलहाल इन वैन को अपराध संभावित भीड़भाड़ वाले स्थानों पर तैनात किया जाता है जहां प्रतिदिन हजारों की तादाद में लोग गुजरते हैं। नतीजा, कई मामलों में वारदात को अंजाम देने से पहले ही अपराधी पुलिस के हत्थे चढ़ गए।
दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार एफआरएस संदिग्धों की पहचान करने और उनकी गतिविधियों पर नज़र रखने का नवीनतम सॉफ्टवेयर है। यह सॉफ्टवेयर सिस्टम में लगे कैमरों से गुजरने वाले संदिग्धों की पहचान बहुत तेज़ी और सटीक तरीके से करता है। भले ही वह अपनी पहचान छिपाने की कोशिश कर रहे हों।
एफआरएस फोटो को कैप्चर करता है और डेटाबेस में मौजूद वांटेड अपराधी, गुमशुदा व्यक्तियों और संदिग्धों के रिकॉर्ड से मिलान करता है। एफआरएस वैन में प्रशिक्षित 4 कर्मियों की तैनाती होती है। वैन में चार कैमरे होते हैं। दो पीछे और एक-एक दाएं और बाएं। निश्चित दूरी के भीतर पहचाने गए प्रत्येक व्यक्ति का चेहरा डेटाबेस से मिलान करके कैप्चर किया जाता है।
सडक़ों पर अपराध करने के इरादे से घूम रहे अपराधियों की अब खैर नहीं। जल्द ही दिल्ली के सभी इलाकों में यह सुविधा उपलब्ध हो जाएगी। एक बार किसी मामले में पकड़े गए अपराधी का डाटा एफआरएस सॉफ्टवेयर में लोड होने के बाद जब भी वह कैमरे के सामने आएगा एफआरएस तत्काल उसे पहचान कर पुलिसकर्मियों को संकेत दे देगा।
सॉफ्टवेयर में 3 लाख से अधिक आरोपियों का डाटाबेस
एफआरएस सॉफ्टवेयर में तीन लाख से अधिक आरोपियों और संदिग्धों का डाटाबेस है। इसमें पुराने और नए आरोपियों के डोजियर भी शामिल हैं। इसके अलावा गुमशुदा लोगों और अज्ञात शवों का डाटा भी शामिल है।
मास्क लगे फेस को भी कर सकता है डिटेक्ट
एफआरएस सॉफ्टवेयर में हाफ चेहरे को भी 70 प्रतिशत डिटेक्ट करने की क्षमता है। संदिग्ध व्यक्ति ने अगर मास्क पहना है या फेस का 70 प्रतिशत हिस्सा ढक रखा है तो आंख और नाक के 30 प्रतिशत हिस्से से एफआरएस उसका डाटा निकाल लेता है।
कैसे काम करता है एफआरएस:
एफआरएस एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित तकनीक है, जो अपराधियों की पहचान और ट्रैकिंग में बेहद कारगर है।
-बेहतर क्वालिटी वाले सीसीटीवी कैमरों में एफआरएस सॉफ्टवेयर इंस्टॉल किया जाता है
-सॉफ्टवेयर में अपराधियों और संदिग्धों का डाटा फीड किया जाता है
-जैसे ही कोई अपराधी कैमरे के सामने आता है, यह सॉफ्टवेयर तुरंत कंट्रोल रूम को अलर्ट भेजता है
-पुलिस अलर्ट मिलते ही कार्रवाई कर अपराधी को तुरंत गिरफ्तार कर सकती है
-यह तकनीक भीड़भाड़ वाले इलाकों, बाजारों और सार्वजनिक स्थानों में बेहद उपयोगी साबित हो रही है
दिल्ली में हर थाने को मिलेगा एफआरएस कैमरा:
एफआरएस की अभी तक की सफलता को देखते हुए दिल्ली पुलिस जल्द पूरे शहर में फेस रिकग्निशन सिस्टम (एफआरएस) से लैस सीसीटीवी कैमरों का जाल बिछाने जा रही है। पुलिस मुख्यालय से इस संबंध में सभी थाना प्रभारियों से उन स्थानों की सूची मांगी गई थी। जहां पर एफआरएस से लैस कैमरे लगाए जा सकते हैं। सूत्रों के अनुसार पुलिस मुख्यालय को यह सूची भेज दी गई है, और जल्द ही इन स्थानों पर एफआरएस सॉफ्टवेयर इंस्टॉल किया जाएगा।
किन स्थानों पर होंगे ये कैमरे:
-मुख्य बाजार (चांदनी चौक, करोल बाग, सरोजिनी नगर, सीपी, जैसे भीड़भाड़ वाले बाजार)
-रेलवे स्टेशन और बस अड्डे।
-मेट्रो स्टेशन और अन्य सार्वजनिक स्थल।
-संवेदनशील इलाकों में महत्वपूर्ण सरकारी कार्यालयों के बाहर।
-भीड़भाड़ वाले चौराहे और सडक़ें।
-कैमरों की ऊंचाई और प्रभाव
-एफआरएस केवल 8-10 फुट की ऊंचाई पर लगे कैमरों में बेहतर काम करता है।
- अब दिल्ली में कम ऊंचाई पर अधिक संख्या में कैमरे लगाए जा रहे हैं
एफआरएस की मदद से सुलझे बड़े अपराध:
1.चांदनी चौक लूट - अंगडिया अजमल भाई गणेश से 80 लाख रुपये लूटने वाले अपराधियों को एफआरएस की मदद से गिरफ्तार किया गया।
2.सरोजिनी नगर स्नैचिंग - एक महिला और उसके भतीजे को सोने की चेन झपटने के मामले में गिरफ्तार किया गया।
3.नौरोजी नगर बाइक चोरी - एक अपराधी दीपक को एफआरएस के जरिए पहचाना गया और गिरफ्तार किया गया।
4. 75 लाख धोखाधड़ी का आरोपी पकड़ा- राणा प्रताप बाग में बेंगलुरु की महिला की प्रॉपर्टी पर बैंक से फर्जी नाम पते पर 75 लाख का लोन लेने वाले पंकज सचदेवा व उसके साथियों को एफआरएस की मदद से ही पकड़ा गया।
बड़े आयोजनों में एफआरएस का इस्तेमाल
- गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस जैसे राष्ट्रीय आयोजनों में यह तकनीक सफलतापूर्वक इस्तेमाल हो रही है
- भीड़भाड़ वाले धार्मिक और सामाजिक आयोजनों में भी इस तकनीक से अपराधियों की पहचान की जाती है
-दिसंबर 2019 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रामलीला मैदान रैली में भी पुलिस ने भीड़ की स्क्रीनिंग के लिए एफआरएस सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया था
एफआरएस से क्या फायदे होंगे-
- अपराध पर रोकथाम
-एफआरएस तकनीक से चोरी, स्नैचिंग, लूट और अन्य अपराधों पर लगाम लगेगी
-अपराधी कैमरों की नजर से बच नहीं पाएंगे
-अपराध के तुरंत बाद पुलिस को तुरंत अपराधी की पहचान मिल जाएगी
-तेज और प्रभावी पुलिस कार्रवाई
-अपराधियों को पकडऩे में लगने वाला समय कम होगा।
-पुलिस को फर्जी पहचान और नकली दस्तावेजों से बचाव मिलेगा।
-चोरी हुए वाहन और लूटपाट के मामलों में तेजी से जांच हो सकेगी।
-आम नागरिकों की सुरक्षा में बढ़ोतरी
-महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों की सुरक्षा में सुधार होगा।
-बाजारों और मॉल जैसी भीड़भाड़ वाली जगहों पर सुरक्षित माहौल बनेगा।
-मेट्रो, रेलवे स्टेशन और बस अड्डों पर सुरक्षा बढ़ेगी।
नार्थ में 428 अपराधियों को पकड़ा गया
पुलिस अधिकारियों के अनुसार पिछले साल 8 जनवरी को नॉर्थ जिले में एफआरएस वैन को शामिल किया गया था। तब से अब तक इस वैन को अलग-अलग जगहों पर खड़ा करके 428 आरोपियों को पकड़ा जा चुका है। इनमें कुछ नाबालिग भी थे। दीपावली के मौके पर सदर बाजार में भीड़ के बीच चोरी, जेबतराशी और झपटमारी की घटनाओं को देखते हुए इसे तैनात किया गया था, जिसके चलते सदर बाजार में ही 107 संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया।