Solan. सोलन। डा. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नौणी के वैज्ञानिकों ने अदरक की खेती से जुड़े किसानों के लिए बड़ी राहत देने वाली उपलब्धि हासिल की है। विश्वविद्यालय के जैव प्रौद्योगिकी विभाग ने फ्यूजेरियम संक्रमण के प्रति सहनशील अदरक की नई लाइनें विकसित की हैं। यह सफलता प्रदेश के उन किसानों के लिए बेहद महत्त्वपूर्ण मानी जा रही है, जो वर्षों से सॉफ्ट रॉट और येलोज़ रोग के कारण भारी नुकसान झेल रहे हैं। बता दें कि अदरक प्रदेश की प्रमुख नकदी फसलों में शामिल है। प्रदेश में अदरक की खेती मुख्य रूप से सोलन और सिरमौर जिलों में बड़े पैमाने पर की जाती है, जहां यह किसानों की प्रमुख नकदी फसल है। इसके अलावा मंडी, कांगड़ा, बिलासपुर, हमीरपुर और ऊना के कई क्षेत्रों में भी अदरक का उत्पादन होता है। प्रदेश की अनुकूल जलवायु और उपजाऊ मिट्टी अदरक की खेती के लिए उपयुक्त मानी जाती है। सोलन और सिरमौर प्रदेश के सबसे बड़े अदरक उत्पादक जिले हैं।
जहां हजारों किसान इस फसल से अपनी आजीविका चलाते हैं, लेकिन रोगमुक्त रोपण सामग्री की कमी और फ्यूजेरियम जनित बीमारियों ने इसकी खेती को लगातार प्रभावित किया है। यह रोग खेतों में फसल की पैदावार कम करने के साथ-साथ भंडारण के दौरान भी प्रकंदों (राइजोम) को नुकसान पहुंचाता है। कई क्षेत्रों में इस बीमारी से 50 प्रतिशत तक फसल प्रभावित होने के मामले सामने आए हैं, जिससे किसानों को हर वर्ष लाखों रुपए का नुकसान उठाना पड़ता है। नौणी वैज्ञानिकों के अनुसार अदरक का उत्पादन बीजों से नहीं, बल्कि प्रकंदों के माध्यम से होता है। अनुसंधान निदेशक डा. देविना वैद्य ने कहा कि यह उपलब्धि फसल सुधार अनुसंधान में एक महत्त्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगी। स्वस्थ और रोग-सहनशील रोपण सामग्री उपलब्ध होने से फसल हानि कम होगी, उत्पादन बढ़ेगा और किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एचएस बवेजा ने कहा कि यह सफलता किसानों की वास्तविक समस्याओं के समाधान के लिए विश्वविद्यालय की वैज्ञानिक प्रतिबद्धता का प्रमाण है।