नई दिल्ली: यूजीसी के प्रस्तावित नियमों को लेकर देश में जारी बहस के बीच आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की एक अहम टिप्पणी सामने आई है। राजस्थान के भीलवाड़ा में जैन संत आचार्य पुलकसागर महाराज से हुई मुलाकात के दौरान यह मुद्दा बातचीत का हिस्सा बना। करीब 40 मिनट चली इस बैठक में यूजीसी के प्रस्ताव के साथ सामाजिक समरसता और जातिवाद जैसे विषयों पर भी चर्चा हुई।

आचार्य पुलकसागर ने बातचीत में उठाया यूजीसी का मुद्दा
मोहन भागवत सोमवार को भीलवाड़ा पहुंचे, जहां उन्होंने आचार्य पुलकसागर महाराज से मुलाकात की। इस दौरान यूजीसी के प्रस्तावित नियमों को लेकर भी चर्चा हुई। दैनिक भास्कर में प्रकाशित खबर के अनुसार, आचार्य पुलकसागर महाराज ने बातचीत के दौरान इस मुद्दे को सामने रखा।
यूजीसी के प्रस्ताव पर बात होने के बाद मोहन भागवत ने कहा कि फिलहाल यह केवल प्रस्ताव के स्तर पर है और इसे मंजूरी नहीं मिली है। उन्होंने यह भी कहा कि यह कानून नहीं बना है और न ही बनेगा।
भागवत की यह टिप्पणी उस वक्त सामने आई है, जब यूजीसी के प्रस्तावित नियमों को लेकर अलग-अलग सामाजिक संगठनों और राजनीतिक दलों की ओर से प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। सोशल मीडिया पर भी इस विषय को लेकर लगातार चर्चा देखने को मिल रही है।
यूजीसी नियमों के विरोध में कई जगह प्रदर्शन
प्रस्तावित यूजीसी नियमों को लेकर देश के कई राज्यों में विरोध प्रदर्शन भी हुए हैं। इस मुद्दे पर समाज के अलग-अलग वर्गों की राय एक जैसी नहीं रही है। कुछ लोगों ने नियमों का समर्थन किया, जबकि विरोध करने वालों ने भी अपनी आपत्ति दर्ज कराई। दिल्ली के जंतर-मंतर पर हाल में हुए आरक्षण हटाओ आंदोलन के दौरान भी यूजीसी के प्रस्तावित नियमों को लेकर विरोध के स्वर सुनाई दिए थे। प्रदर्शन के दौरान इन नियमों के खिलाफ नारेबाजी की गई।
विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी के नियमों पर रोक लगा दी थी। ऐसे समय में भागवत की टिप्पणी को इस पूरे मामले से जुड़ी बहस के बीच महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सवर्ण-पिछड़े वर्ग के बीच दूरी को लेकर भी हुई बात
बैठक के दौरान सिर्फ यूजीसी के नियमों की स्थिति पर ही बातचीत नहीं हुई। आचार्य पुलकसागर महाराज ने इस बात पर भी चिंता जताई कि इस विवाद के कारण सवर्ण और पिछड़े वर्ग के बीच दूरी बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। इस पर मोहन भागवत ने कहा कि समाज को विभाजित करने की किसी भी कोशिश को सफल नहीं होने दिया जाएगा। बातचीत में सामाजिक समरसता और जातिवाद जैसे मुद्दे भी शामिल रहे।
यानी मुलाकात में यूजीसी के प्रस्ताव को लेकर चल रहे विवाद के साथ समाज के भीतर आपसी दूरी और जाति से जुड़े सवालों पर भी विचार-विमर्श हुआ। भागवत की टिप्पणी का एक अहम हिस्सा यही रहा कि मौजूदा स्थिति में यूजीसी के नियम कानून का रूप नहीं ले चुके हैं।
दोनों की पहले भी हो चुकी है मुलाकात
मोहन भागवत और आचार्य पुलकसागर महाराज की मुलाकात इससे पहले भी हो चुकी है। वर्ष 2011 में दोनों की मुलाकात भीलवाड़ा में हुई थी।
अब 2026 में एक बार फिर दोनों की मुलाकात हुई है। इस बैठक में यूजीसी के प्रस्तावित नियमों के अलावा सामाजिक समरसता और जातिवाद जैसे विषयों पर बातचीत हुई।
फिलहाल यूजीसी के प्रस्तावित नियमों को लेकर बहस अलग-अलग स्तरों पर जारी है। सामाजिक संगठनों और राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाओं के बीच सुप्रीम कोर्ट की रोक भी इस मामले को अहम बनाती है। इसी माहौल में मोहन भागवत की ओर से यह स्पष्ट किया गया कि फिलहाल यूजीसी का मुद्दा प्रस्ताव के स्तर पर है और इसे कानून का रूप नहीं मिला है।
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