Shimla. शिमला। शिमला के ढली-संजौली बाइपास पर गुरुवार शाम पहाड़ दरकने से अफरा-तफरी मच गई। हालांकि इस भू-स्खलन से किसी तरह का जानी नुकसान नहीं हुआ। पहाड़ी से बड़ी मात्रा में मलबा और पत्थर सडक़ पर आ गिरने से दोनों ओर वाहनों की आवाजाही ठप हो गई। यह घटना ऐसे समय पर हुई है, जब प्रदेश में अभी मानसून ने औपचारिक दस्तक भी नहीं दी है। मौसम विभाग की आगामी दिनों में भारी बारिश, तेज हवाओं और गरज-चमक की चेतावनी को देखते हुए पहाड़ी क्षेत्रों में भू-स्खलन, चट्टानें गिरने और सडक़़ों के बाधित होने का खतरा बढ़ गया है। हिमाचल प्रदेश में मानसून की एंट्री के पहले ही राज्य के कई क्षेत्रों में मौसम कड़े तेवर दिखा रहा है। प्रदेश में आगमी चार दिनों तक कई हिस्सों में आंधी, बारिश, बिजली गिरने और ओलावृष्टि का अलर्ट जारी किया है।
राज्य में पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से 24 जून तक मौसम खराब बना रहेगा। 19 जून को शिमला, मंडी और कुल्लू जिलों में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने, बारिश और ओलावृष्टि की संभावना को देखते हुए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है, जबकि चंबा और कांगड़ा में यलो अलर्ट रहेगा। 20 और 21 जून को लाहुल-स्पीति और किन्नौर को छोडकऱ शेष दस जिलों में यलो अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग का अनुमान है कि 25 जून के आसपास मानसून हिमाचल में दस्तक दे सकता है। इसी बीच राजधानी शिमला में मानसून पूर्व भू-स्खलन की घटना ने संकेत दे दिया है कि बारिश का दौर बढऩे के साथ पहाड़ी क्षेत्रों में जोखिम भी बढ़ सकता है। राज्य में बीते 24 घंटों के दौरान प्रदेश के कई हिस्सों में अच्छी बारिश दर्ज की गई। सिरमौर के राजगढ़ में सबसे अधिक 45 मिलीमीटर वर्षा हुई, जबकि शिमला जिले के जुब्बड़हट्टी और सराहन में 25-25 मिलीमीटर बारिश रिकार्ड की गई।