बजट में आधारभूत ढांचे के विकास पर दिया कम ध्यान

Update: 2025-03-29 12:11 GMT
Bilaspur. बिलासपुर। झंडूता हलके के विधायक जीतराम कटवाल ने पिछले साल की तुलना में वर्ष 2025-26 के बजट में कटौती की निंदा करते हुए प्रदेश सरकार को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने बजट में आधारभूत ढांचे के विकास पर कम ध्यान दिया है। इसमें ग्रामीण इलाकों के लोगों को नजर-अंदाज किया गया है। कुल मिलाकर यह बजट शिक्षण संस्थानों में कई कोर्सों की सेल्फ फाइनांसिंग स्कीम की तरह लग रहा है, जिसके तहत विकास कार्यों के लिए पैसे की व्यवस्था खुद करनी होगी। वित्त प्रबंधन सरकार का दायित्व है। इस दायित्व को सही ढंग से निभाने में सरकार पूरी तरह से नाकाम रही है। विधानसभा में कटौती प्रस्ताव पर चर्चा में भाग लेते हुए जीतराम कटवाल ने कहा कि प्रदेश सरकार के 58514 करोड़ रुपये के बजट में से वेतन-भत्तों पर 45 फीसदी राशि खर्च होगी। इस लिहाज से 27-28 हजार करोड़ रुपए इसी पर खर्च हो जाएंगे। प्रदेश की 57 फीसदी आबादी गांवों में रहती है। बिजली-पानी की सुविधा सभी के लिए एक जैसी होती है, लेकिन सडक़ों का महत्व अलग है। खेतीबाड़ी और अन्य छोटे-छोटे व्यवसायों से रोजी-रोटी कमाने वाले लोगों का जीवन स्तर सुधारने के लिए गांवों में बेहतर सडक़ सुविधा बेहद
जरूरी है।
लेकिन लोक निर्माण विभाग के पिछले साल के लगभग 2700 करोड़ रुपए के बजट की तुलना में इस बार केवल 1522 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। लगभग 1200 करोड़ रुपए की इस कटौती से अंदाजा लगाया जा सकता है कि प्रदेश सरकार गांवों के विकास के लिए कितनी गंभीर है। जीतराम कटवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार बिना किसी भेदभाव के काम कर रही है। प्रधानमंत्री ग्राम सडक़ योजना के फेज-3 में हिमाचल को 254 सडक़ें मंजूर हुई हैं। इसके लिए 2643 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसके विपरीत मुख्यमंत्री ग्राम सडक़ योजना में प्रदेश सरकार का रवैया भेदभावपूर्ण है। पिछले दो वर्षों में झंडूता विधानसभा क्षेत्र को भी इस योजना के तहत एक भी सडक़ मंजूर नहीं हुई है। बरठीं-री रड़ोह सडक़ जुलाई 2023 से बंद है। पुखर से लोअर पुखर, टिहरी-पंजीण-रच्छेड़ा तथा बैहरन-कोहली-गालियां आदि सडक़ों की डीपीआर भेजी गई है, लेकिन उनके लिए भी बजट नहीं मिल रहा है। कई पुलों का निर्माण हुए दो-ढाई साल बीत चुके हैं, लेकिन अप्रोच रोड नहीं बनाए जा रहे हैं। इससे वे पुल सफेद हाथी ही साबित हो रहे हैं। बजट की बंदरबांट और गांवों के लोगों को नजर-अंदाज करना ठीक नहीं है। अभी भी समय है। बेहतर होगा कि प्रदेश सरकार राजनीतिक द्वेष भावना या भेदभावपूर्ण ढंग से काम करने के बजाए पूरे प्रदेश की जनता के हित में काम करें।
Tags:    

Similar News