Hyderabad हैदराबाद। तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी का अमेरिका दौरा रद्द होने के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी ने इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि विदेश यात्रा को लेकर केंद्र सरकार के कुछ तय नियम हैं, जिनका पालन सभी मुख्यमंत्रियों और केंद्रीय मंत्रियों को करना होता है। हैदराबाद में मीडिया से बातचीत के दौरान केंद्रीय मंत्री किशन रेड्डी ने कहा कि यह मामला भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) या केंद्र सरकार से जुड़ा राजनीतिक विषय नहीं है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री या केंद्र सरकार के मंत्री विदेश यात्रा पर कहां जाएंगे और किससे मुलाकात करेंगे, इसके लिए पहले से निर्धारित प्रक्रिया मौजूद है।
किशन रेड्डी ने कहा कि ये नियम कांग्रेस शासनकाल से ही लागू हैं। उन्होंने बताया कि विदेश यात्राओं और विदेशों में होने वाली बैठकों को लेकर विदेश मंत्रालय (MEA) के माध्यम से प्रक्रिया पूरी की जाती है। यात्रा का उद्देश्य, मिलने वाले लोगों और परिस्थितियों के आधार पर मंजूरी दी जाती है। उन्होंने कहा कि हर विदेश यात्रा के लिए संबंधित विषय और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए विचार किया जाता है। इसके बाद ही आवश्यक अनुमति और मंजूरी प्रदान की जाती है।
दरअसल, तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी का प्रस्तावित अमेरिका दौरा केंद्र सरकार से मंजूरी नहीं मिलने के कारण रद्द हो गया था। बताया गया कि यात्रा प्रस्ताव निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं होने के कारण अनुमति नहीं दी गई। इस मामले को लेकर तेलंगाना की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गए हैं। कांग्रेस की ओर से जहां इसे केंद्र सरकार के फैसले से जोड़कर देखा जा रहा है, वहीं भाजपा नेताओं का कहना है कि विदेश यात्राओं को लेकर नियम सभी के लिए समान हैं।
किशन रेड्डी ने कहा कि केंद्र सरकार किसी भी राज्य के मुख्यमंत्री की विदेश यात्रा में राजनीतिक हस्तक्षेप नहीं करती। उन्होंने कहा कि विदेश दौरे से जुड़े फैसले तय प्रक्रिया और नियमों के आधार पर लिए जाते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि विदेश मंत्रालय सभी प्रस्तावों की समीक्षा करता है और देश के हित, यात्रा के उद्देश्य तथा अन्य परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए निर्णय लिया जाता है।
राजनीतिक जानकारों के अनुसार, मुख्यमंत्री के विदेश दौरे को लेकर उठे विवाद ने केंद्र और तेलंगाना सरकार के बीच पहले से चल रहे राजनीतिक मतभेदों को फिर से सामने ला दिया है। फिलहाल इस मुद्दे पर कांग्रेस और भाजपा के बीच बयानबाजी जारी है। जहां कांग्रेस केंद्र से स्पष्टीकरण मांग रही है, वहीं भाजपा इसे प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा बता रही है।