नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी संकट के असर से भारतीय अर्थव्यवस्था को बचाने और विकसित भारत के लक्ष्य को तेजी से हासिल करने के लिए केंद्र सरकार बड़े स्तर पर सुधारों की तैयारी कर रही है। इसी कड़ी में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को सभी मंत्रालयों और विभागों के सचिवों की अहम बैठक बुलाई है। इस बैठक में सचिव अपने-अपने विभागों से जुड़े सुधारों और चुनौतियों पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण देंगे।
सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री के साथ होने वाली इस बैठक का मुख्य उद्देश्य सरकारी कामकाज को और प्रभावी बनाना, आर्थिक चुनौतियों से निपटना और विकास की रफ्तार बढ़ाने के लिए नए उपायों पर चर्चा करना है। कैबिनेट सचिव ने इससे पहले विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े सचिवों की अध्यक्षता में सात अलग-अलग समूहों का गठन किया था। इन समूहों ने अपनी रिपोर्ट तैयार कर कैबिनेट सचिव को सौंप दी है। अब इन रिपोर्टों को प्रधानमंत्री के सामने प्रस्तुत किया जाएगा।
सरकार ने सचिवों को बैठक से पहले तीन महत्वपूर्ण टास्क दिए हैं। पहला टास्क यह है कि प्रत्येक सचिव अपने विभाग के लक्ष्यों को हासिल करने में आ रही बाधाओं की पहचान करें और उन्हें दूर करने के उपाय सुझाएं। सरकार का मानना है कि जमीनी स्तर पर काम करते समय अधिकारियों को कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, इसलिए उनके अनुभव और सुझाव सुधारों को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
दूसरा टास्क सचिवों को अपने विभाग की सीमाओं से बाहर निकलकर काम करने से जुड़ा है। सरकार चाहती है कि अलग-अलग मंत्रालय केवल अपने विभाग तक सीमित न रहें, बल्कि अन्य विभागों के साथ बेहतर तालमेल बनाकर काम करें। इससे योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आएगी और नीतियों का असर ज्यादा प्रभावी होगा।
तीसरा टास्क यह है कि सचिव अपने विभाग में सुधार के सुझाव देने के साथ-साथ दूसरे मंत्रालयों और विभागों के लिए भी नए आइडिया साझा करें। सरकार का उद्देश्य है कि प्रशासनिक व्यवस्था में सामूहिक सोच और बेहतर समन्वय के जरिए बड़े बदलाव किए जाएं।
बैठक में ऊर्जा सुरक्षा, सप्लाई चेन, महंगाई नियंत्रण, आयात-निर्यात, रक्षा उत्पादन और मैन्युफैक्चरिंग जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। पश्चिम एशिया संकट के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार और व्यापार व्यवस्था पर असर पड़ा है। ऐसे में सरकार ऊर्जा क्षेत्र को मजबूत करने और अर्थव्यवस्था को स्थिर बनाए रखने के उपायों पर विशेष ध्यान दे रही है।
आर्थिक मामलों के सचिव अनुराधा ठाकुर की अध्यक्षता में बनाए गए समूह को देश की व्यापक आर्थिक स्थिति, आयात-निर्यात और उत्पादन क्षेत्र से जुड़े सुझाव तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं पेट्रोलियम सचिव नीरज मित्तल के नेतृत्व वाला समूह एलएनजी, एलपीजी, पेट्रोलियम उत्पादों और ऊर्जा सुरक्षा से जुड़े विषयों पर अपनी रिपोर्ट देगा।
इसके अलावा विदेश सचिव की अध्यक्षता में गठित समूह अंतरराष्ट्रीय रणनीति और वैश्विक परिस्थितियों पर सुझाव देगा, जबकि रक्षा सचिव के नेतृत्व वाला समूह रक्षा उत्पादन और आत्मनिर्भरता से जुड़े मुद्दों पर अपनी राय रखेगा। शिपिंग सचिव विजय कुमार के नेतृत्व वाले समूह को देश के लॉजिस्टिक नेटवर्क को मजबूत करने और परिवहन व्यवस्था में सुधार के सुझाव देने की जिम्मेदारी दी गई है।
सरकार का मानना है कि पिछले एक दशक में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के क्षेत्र में कई सुधार हुए हैं, लेकिन अभी भी निवेशकों और उद्योगों के सामने कई चुनौतियां मौजूद हैं। खासकर फैक्ट्री लगाने, जमीन उपलब्ध कराने, सप्लाई चेन और परिवहन लागत को लेकर सुधार की जरूरत महसूस की जा रही है।
सूत्रों के अनुसार, सचिवों के प्रस्तुतीकरण के आधार पर सुधारों के अगले चरण की रूपरेखा तैयार की जाएगी। सरकार का लक्ष्य है कि प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाया जाए, उद्योगों को बढ़ावा मिले और भारत को वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की दिशा में तेजी से कदम उठाए जाएं।
प्रधानमंत्री मोदी की इस बैठक को आने वाले समय में आर्थिक नीतियों और बड़े सुधारों की दिशा तय करने वाली महत्वपूर्ण बैठक माना जा रहा है। पश्चिम एशिया संकट जैसी वैश्विक चुनौतियों के बीच सरकार की कोशिश है कि भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत बनी रहे और विकसित भारत के लक्ष्य की ओर देश तेजी से आगे बढ़ सके।