अमरावती की झुग्गी से CJI तक का सफर... जानिए कौन हैं जस्टिस बीआर गवई

Update: 2025-05-14 09:25 GMT
सुप्रीम कोर्ट के 52वें चीफ जस्टिस के रूप में जस्टिस भूषण रामकृष्ण गवई ने शपथ ले ली है और राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह में राष्ट्रपति ने उन्हें पद और गोपनियता की शपथ दिलाई। जस्टिस बीआर गवई के पिता रामकृष्ण सूर्यभान गवई ने डॉक्टर बीआर अंबेडकर के साथ बौद्ध धर्म अपनाया था। जस्टिस बीआर गवई का कार्यकाल 23 नवंबर 2025 को खत्म होगा।
सुप्रीम कोर्ट के 52वें चीफ जस्टिस के रूप में जस्टिस भूषण रामकृष्ण गवई ने शपथ ले ली है और राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह में राष्ट्रपति ने उन्हें पद और गोपनियता की शपथ दिलाई।
जस्टिस गवई भारत के पहले बौद्ध CJI हैं और आजादी के बाद देश में दलित समुदाय से वे दूसरे सीजीआई हैं। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस के रूप में उनका कार्यकाल छह महीने का होगा। जस्टिस बीआर गवई के पिता रामकृष्ण सूर्यभान गवई ने डॉक्टर बीआर अंबेडकर के साथ बौद्ध धर्म अपनाया था।
जस्टिस बीआर गवई का कार्यकाल 23 नवंबर 2025 को खत्म होगा। सीजेआई बनने के अगले ही दिन जस्टिस गवई वक्फ कानून में हुए संशोधनों को लेकर दायर याचिकाओं पर सुनवाई शुरू करेंगे। आईए जानतें हैं कैसी रही जस्टिस गवई की अब तक की यात्रा...
जस्टिस गवई की जिंदगी में डॉक्टर अंबेडकर की भूमिका
संविधान को सर्वोच्च बताने वाले जस्टिस गवई ने कई बार बताया है कि सकारात्मक सोच ने कैसे उनकी पहचान को आकार दिया है।
2024 में उन्होंने एक भाषण दिया था, जिसमें उन्होंने कहा था, यह पूरी तरह से डॉक्टर अंबेडकर के प्रयासों का परिणाम है कि मेरे जैसा कोई व्यक्ति, जो एक झुग्गी के नगरपालिका के स्कूल से पढ़कर इस पद तक पहुंच सका। उन्होंने अपने भाषण को 'जय भीम' के नारे के साथ खत्म किया था।
बता दें, जस्टिस गवई अनुसूचित जाति से आने वाले देश के दूसरे चीफ जस्टिस होंगे। उनसे पहले जस्टिस केजी बालाकृष्णन 2007 में सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बने थे। उनका कार्यकाल तीन साल का था।
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