Hospice. धर्मशाला। जिला कांगड़ा के शिवभूमि बैजनाथ के तहत आने वाले अति दुर्गम क्षेत्र बड़ा भंगाल में मोबाइल संचार सुविधा उपलब्ध करवाने के लिए प्रस्तावित मोबाइल टावर स्थापना योजना फिलहाल अधर में लटक गई है। आजादी के 79 वर्ष पूर होने में अब मात्र एक से डेढ़ माह का समय रह गया है, लेकिन मौजूदा समय में भी बड़ा भंगाल के साथ कनेक्टिविटी जीरो है। बड़ा भंगाल में आपदा आने की स्थिति में भी संपर्क करने के लिए एकमात्र वॉकी-टॉकी ही सहारा है, जिससे कांगड़ा प्रशासन व सरकार को सूचना मिल पाती है। बरसात में बड़ा भंगाल का जीवन पूरी तरह से काला पानी का हो जाता है। पूर्व की बरसात में रावी नदी की भंयकर बाढ़ ने बड़ा भंगाल के अति महत्त्वपूर्ण स्थानों स्कूल व राशन की दुकानों सहित अन्य कई महत्त्व के कार्यालयों को एक साथ बहा दिया था, जिसकी सूचना भी मुश्किल से ही सरकार व प्रशासन के पास पहुंच पाई थी।
ऐसे में एक बार फिर से बड़ा भंगाल क्षेत्र में आने वाली बरसात को लेकर खतरा की चिंता सताने लगी है। क्षेत्र में लंबे समय से बिजली व्यवस्था सुचारू न होने और आवश्यक रखरखाव (मेंटेनेंस) के अभाव के चलते इस महत्त्वाकांक्षी परियोजना की प्रगति पर पूरी तरह से ब्रेक लग गया है। जानकारी के अनुसार बड़ा भंगाल प्रदेश के सबसे दुर्गम क्षेत्रों में गिना जाता है, जहां आज भी संचार सुविधाओं का अभाव स्थानीय लोगों के लिए बड़ी परेशानी बना हुआ है। सरकार और संबंधित विभागों की ओर से क्षेत्र में मोबाइल टावर स्थापित कर दूरसंचार सेवाएं उपलब्ध करवाने की योजना बनाई गई थी, ताकि स्थानीय निवासियों के साथ-साथ ट्रैकर-पर्यटकों और आपातकालीन सेवाओं को भी लाभ मिल सके। कांगड़ा-चंबा संसदीय क्षेत्र के सांसद डा. राजीव भारद्वाज ने कहा कि बड़ा भंगाल जैसे दुर्गम क्षेत्र में संचार सुविधाएं उपलब्ध करवाना केंद्र और राज्य सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। मोबाइल टावर स्थापना योजना के समक्ष आ रही तकनीकी और बिजली संबंधी बाधाओं को दूर करने के लिए संबंधित विभागों और दूरसंचार कंपनियों के साथ लगातार समन्वय किया जा रहा है।