Indigo एयरलाइंस संकट: PMO की सीधी निगरानी, कंपनी ने मांगी 10 दिन की मोहलत

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Update: 2025-12-06 15:38 GMT
Raipur/New Delhi. रायपुर/नई दिल्ली। देश की प्रमुख एयरलाइन इंडिगो के सैकड़ों विमानों के रद्द होने और उड़ानों में देरी के कारण पिछले पांच दिनों से हवाई यातायात बुरी तरह प्रभावित है। इंडिगो भारत की हवाई बाजार में लगभग 60 प्रतिशत हिस्सेदारी रखती है और इस वजह से संकट का असर देश के कई प्रमुख शहरों में महसूस किया गया। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पूरी जानकारी दी गई, और प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने सीधे हस्तक्षेप करते हुए CEO पीटर एल्बर्स को तुरंत व्यवस्था
सामान्य
करने का सख्त निर्देश दिया। PMO की निगरानी में अब एयरलाइन के सभी संचालन पर कड़ी नजर रखी जा रही है। उच्च स्तरीय संवाद के माध्यम से सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि यात्रियों की सुविधा और हवाई नेटवर्क की स्थिरता सर्वोच्च प्राथमिकता है। इस कारण इंडिगो पर नियामक ढिलाई पाई जाने पर भारी पेनल्टी लगाई जा सकती है।
कंपनी की मांग और सरकारी प्रतिक्रिया
इंडिगो ने सरकार से 10 दिन की मोहलत मांगी है ताकि नेटवर्क स्थिर किया जा सके और पायलट-क्रू शिफ्टिंग योजनाओं को पुनः व्यवस्थित किया जा सके। कंपनी ने साथ ही FDTL (फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिट) नियमों में अस्थायी राहत की भी मांग की है। उनका कहना है कि मौजूदा नियम कठोर हैं, जिससे पायलटों की शिफ्टिंग पर असर पड़ रहा है। हालांकि, सरकार ने साफ कर दिया है कि यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा सर्वोच्च प्राथमिकता है। मंत्रालय स्तर पर विमानों की तैनाती और स्लॉट मैनेजमेंट की समीक्षा जारी है। इसका उद्देश्य देशभर के एयरपोर्ट्स पर उड़ानों की रफ्तार को सामान्य करना और यात्रियों की परेशानियों को कम करना है।
संकट का प्रभाव और एयरपोर्ट स्थिति
दिल्ली, मुंबई, पुणे, बेंगलुरु और कोलकाता जैसे प्रमुख हवाई अड्डों पर यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। कई फ्लाइटें रद्द या देर से चलीं। अन्य एयरलाइंस भी प्रभावित हैं, लेकिन इंडिगो की बड़ी हिस्सेदारी के कारण उसका प्रभाव सबसे अधिक देखने को मिला।
सिविल एविएशन मंत्रालय और कंपनी की बैठक
इंडिगो के वरिष्ठ अधिकारियों और सिविल एविएशन मंत्रालय के अधिकारियों के बीच शाम 6 बजे बैठक हुई। बैठक का उद्देश्य एयरलाइन के प्रदर्शन और यात्रियों की सुविधा की समीक्षा करना था। उच्च स्तरीय अधिकारियों ने इंडिगो को स्पष्ट संदेश दिया कि उड़ान व्यवस्था को जल्द से जल्द सामान्य किया जाए। बैठक में नेटवर्क स्थिर करने और संकट का समाधान निकालने के लिए रणनीति बनाई गई।
पीएमओ का उच्चतम स्तर का हस्तक्षेप
पीएमओ की निगरानी ने एयरलाइन पर दबाव बढ़ा दिया है। सरकार ने संकेत दिया है कि यदि नियामक ढिलाई या संचालन में स्पष्ट गड़बड़ी पाई गई, तो कंपनी पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। पेनल्टी और सुधारात्मक उपायों का उद्देश्य अन्य एयरलाइंस के लिए भी एक चेतावनी देना है कि यात्रियों की सुविधा को प्राथमिकता देना अनिवार्य है।
फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिट नियम और शिफ्टिंग चुनौती
FDTL नियम पायलटों की उड़ान और शिफ्ट प्लानिंग के लिए लागू किए गए हैं। हालांकि इंडिगो का कहना है कि इन नियमों से पायलट शिफ्टिंग में कठिनाई हो रही है और इस वजह से उड़ान संचालन प्रभावित हुआ। सरकार ने इस मांग पर विचार करने के साथ-साथ सुनिश्चित किया कि नियमों में बदलाव यात्रियों की सुरक्षा को प्रभावित न करे।
यात्रियों की सुविधा और समाधान की प्राथमिकता
सरकार का प्रमुख उद्देश्य यात्रियों की असुविधा कम करना और उड़ान नेटवर्क को स्थिर करना है। मंत्रालय स्तर पर विमानों की तैनाती, शेड्यूलिंग और स्लॉट मैनेजमेंट की समीक्षा लगातार की जा रही है। पीएमओ द्वारा लगातार मॉनिटरिंग से यह स्पष्ट हुआ कि संकट पर उच्चतम स्तर पर ध्यान रखा जा रहा है।
आगे की रणनीति
कंपनी और मंत्रालय के बीच संवाद जारी रहेगा। इंडिगो को नेटवर्क स्थिर करने और उड़ान संचालन सामान्य करने के लिए आवश्यक संसाधन प्रदान किए जाएंगे। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। यह संकट भारतीय हवाई यातायात प्रणाली के लिए सतर्कता और सुधार का अवसर भी है।
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