भारत की सैन्य ताकत को मिलेगी मजबूती, अमेरिका देगा जेवलिन मिसाइल, थर्रा उठेगा दुश्मन

दुश्मन के छक्के छुड़ाने के लिए भारतीय सेना की ताकत बढ़ने वाली है.

Update: 2025-11-20 11:30 GMT
वॉशिंगटन: दुश्मन के छक्के छुड़ाने के लिए भारतीय सेना की ताकत बढ़ने वाली है। अमेरिका ने भारत को जेवलिन मिसाइल देने को मंजूरी दे दी है। इस मिसाइल को कंधे से टारगेट पर दागा जा सकता है। दरअसल, अमेरिका के स्टेट डिपार्टमेंट ने भारत को एक्सकैलिबर प्रोजेक्टाइल और उससे जुड़े इक्विपमेंट की संभावित फॉरेन मिलिट्री सेल को मंजूरी देने का फैसला किया है।
अमेरिकी ऑफिशियल की ओर से साझा जानकारी के अनुसार, जेवलिन मिसाइल की अनुमानित कीमत 47.1 मिलियन डॉलर है। वहीं, भारत और अमेरिका के बीच लगभग 92.8 मिलियन डॉलर की डील हुई है। डिफेंस सिक्योरिटी कॉपरेशन एजेंसी ने जानकारी दी।
भारत सरकार ने 216 एम982ए1 एक्सकैलिबर टैक्टिकल प्रोजेक्टाइल की मांग की है। इसमें एंसिलरी आइटम, इम्प्रूव्ड प्लेटफॉर्म इंटीग्रेशन किट (आईपीआईके) के साथ पोर्टेबल इलेक्ट्रॉनिक फायर कंट्रोल सिस्टम (पीईएफसीएस), प्राइमर, प्रोपेलेंट चार्ज, अमेरिकी सरकार की टेक्निकल मदद, टेक्निकल डेटा, रिपेयर और रिटर्न सर्विस, और लॉजिस्टिक्स और प्रोग्राम सपोर्ट के दूसरे संबंधित एलिमेंट शामिल होंगे।
इससे अमेरिका-भारत के स्ट्रेटेजिक रिश्ते को मजबूत करने और एक बड़े डिफेंस पार्टनर की सुरक्षा को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। दोनों देशों के बीच की यह डिफेंस साझेदारी इंडो-पैसिफिक और साउथ एशिया क्षेत्रों में राजनीतिक स्थिरता, शांति और आर्थिक तरक्की के लिए भारत की ताकत बढ़ाएगी।
इस डील में मुख्य कॉन्ट्रैक्टर आरटीएक्स कॉर्पोरेशन होगा, जो अर्लिंग्टन, वीए में है। इस समय अमेरिकी सरकार को इस संभावित बिक्री के संबंध में प्रस्तावित किसी भी ऑफसेट समझौते के बारे में पता नहीं है। कोई भी ऑफसेट समझौता खरीदार और कॉन्ट्रैक्टर के बीच बातचीत में तय किया जाएगा।
वहीं, दूसरी डील के तहत भारत ने 100 एफजीएम-148 जेवलिन राउंड, 1 जेवलिन फ्लाई-टू-बाय मिसाइल और 25 हल्के कमांड लॉन्च यूनिट (एलडब्ल्यूसीएलयू) या ब्लॉक-1 सीएलयू की मांग की है। जेवलिन एडवांस पोर्टेबल एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल है। इसका निर्माण अमेरिकी कंपनी लॉकहीड मार्टिन और रेटियॉन ने मिलकर किया है। इसकी सबसे खास बात यह है कि इसमें जवान को टारगेट पर निशाना बनाए रखने की जरूरत नहीं होगी। मिसाइल में एक बार टारगेट लॉक करने के बाद यह खुद हिट करने वाले निशाने को ढूंढ लेता है। यूक्रेन के लिए रूस के खिलाफ युद्ध में यह मिसाइल कारगर साबित हुई है। इसकी वजह से इसे 'टैंक किलर' भी कहते हैं।
इस मिसाइल को लॉन्च करने के लिए किसी भी खास वाहन या लॉन्चर की जरूरत नहीं होती है। इसे सेना के जवान अपने कंधे पर रखकर दाग सकते हैं। मिसाइल को टारगेट पर लॉक करके इसे दागने के बाद पीछे मुड़कर देखने की जरूरत नहीं होती है।
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