Shimla. शिमला। डीजल बसों की खरीद के लिए नए सिरे से एचआरटीसी ने टेंडर कर दिया है। लंबे समय से इन बसों को खरीदने के लिए निगम प्रयास कर रहा है मगर एक बार इसमें कंपनियां आगे नहीं आईं तो दूसरी बार कंपनियों ने शर्तों में कुछ बदलाव की बात कही। इसके बाद अब तीसरी बार एचआरटीसी ने नई शर्तों पर टेंडर किया है जिससे उम्मीद है कि इस बार किसी न किसी कंपनी के साथ उसका करार हो जाएगा। एचआरटीसी को 250 डीजल बसें खरीदनी हैं और इन बसों की खरीद के लिए सरकार ने उसे पैसा देना है। मुख्यमंत्री पहले ही इसके लिए घोषणा कर चुके हैं और बजट की व्यवस्था भी लगभग हो चुकी है। इसमें देरी केवल कंपनी के चयन की है कि आखिर किस कंपनी से बसों को खरीदा जाए। डीजल बसों की बिक्री के लिए कई नामी कंपनियां उपलब्ध हैं और इस बार के टेंडर में इन कंपनियों के सामने आने की पूरी उम्मीद है। हिमाचल प्रदेश में डीजल बसों की मौजूदा समय में काफी ज्यादा जरूरत महसूस हो रही है। क्योंकि प्रदेश की भौगोलिक परिस्थिति कठिन है और यहां पर इलैक्ट्रिक बसों की अपेक्षा डीजल बसों की ज्यादा जरूरत रहती है।
यहां बहुत सारे ऐसे क्षेत्र हैं जहां पर डीजल बसें ही जा सकती हैं वहां पर इलैक्ट्रिक बसों को नहीं भेजा जा सकता। यही वजह है कि एचआरटीसी के पुराने फ्लिट को बदलते हुए सरकार चाहती है कि इसमें नई बसों का बेड़ा जुटाया जाए और इसके लिए एक तरफ एचआरटीसी 297 इलैक्ट्रिक बसों की खरीद कर रहा है जिसका वर्क ऑर्डर दे दिया गया है तो वहीं डीजल बसों के लिए भी उसने टेंडर कर दिया है। टेंडर करने के साथ अब उम्मीद है कि जल्दी ही कंपनियां सामने आएंगी जिसमेंं से किसी एक को चुन लिया जाएगा। हाल ही में एचआरटीसी ने इन बसों की खरीद के लिए टेंडर कर दिया है। इसमें कुछ शर्तों को बदल दिया गया है। कंपनियों की तरफ से कुछ शर्तों पर पिछली बार आपत्तियां जताई गई थीं लिहाजा एचआरटीसी ने मामला दोबारा से निदेशक मंडल की बैठक में लाया था। इसके बाद तकनीकी टीम ने अपनी रिपोर्ट एचआरटीसी को दी और उसके आधार पर अब नए सिरे से शर्तों का समावेश करके एचआरटीसी ने टेंडर निकाल दिया है। यहां जिलों से लगातार डीजल बसों की डिमांड आ रही है। यहां तक की विधायक भी बसों की कम संख्या के कारण परेशान हैं और सरकार से बार-बार इस मामले को उठा रहे हैं। आम जनता की डिमांड पर ही सरकार ने 250 बसों की खरीद के लिए एचआरटीसी को बजट देने पर हामी भरी है।