हाई रिटर्न का झांसा, 12 लाख की धोखाधड़ी: साइबर टीम ने किया ठगी का खुलासा, 5 गिरफ्तार
गिरोह का भंडाफोड़.
नई दिल्ली: दक्षिण-पश्चिम दिल्ली में साइबर टीम ने निवेश धोखाधड़ी में शामिल एक गिरोह का भंडाफोड़ किया है। इस मामले में 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। इनके कब्जे से अपराध में इस्तेमाल किए गए 6 मोबाइल फोन और अपराध को अंजाम देने में इस्तेमाल किए गए 35 बैंक खातों का विवरण बरामद किया गया है।
दिल्ली पुलिस ने जानकारी दी कि 4 सितंबर 2025 को एन. राय नाम के एक व्यक्ति ने एनसीआरपी पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई थी। इसमें उन्होंने बताया कि वे अरुणाचल प्रदेश के निवासी हैं और वर्तमान में दिल्ली में रह रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें एक कथित कंपनी के माध्यम से शेयर बाजार में निवेश करने के लिए प्रेरित किया गया था। 7 जुलाई 2025 को एक ओटीसी खाता खोलने के बाद उनसे 'परिणीति जैन' और उसके साथियों ने कई मोबाइल नंबरों के जरिए संपर्क किया। उन्होंने हाई रिटर्न (मुनाफे) का लालच देकर पैसे निवेश करने के लिए उकसाया।
इस प्रलोभन में आकर शिकायतकर्ता एन. राय ने 12.22 लाख रुपए से अधिक की राशि ट्रांसफर कर दी। बाद में पता चला कि उक्त संस्था (कंपनी) फर्जी थी और उनके साथ धोखाधड़ी हुई थी। इसके बाद उन्होंने दक्षिण-पश्चिम जिले के साइबर थाने में शिकायत दी, जिस पर तुरंत कार्रवाई हुई और मुकदमा दर्ज करते हुए जांच शुरू की गई।
आरोपों की गंभीरता को देखते हुए एक विशेष टीम का गठन किया गया। तकनीकी विश्लेषण, निगरानी और वित्तीय लेनदेन की गहन जांच-पड़ताल की गई। पैसे के लेन-देन और डिजिटल सबूतों के आधार पर, महाराष्ट्र से काम कर रहे आरोपियों की पहचान की गई। तकनीकी निगरानी के आधार पर, एक आरोपी श्रीधर दिलीप इंगले की पहचान की गई। इसके बाद साइबर टीम ने महाराष्ट्र के श्रीरामपुर में छापा मारा और आरोपी श्रीधर दिलीप इंगले को पकड़ लिया।
पूछताछ के दौरान, उसने बताया कि वह अपने साथी चैतन्य (जो अभी दुबई में रहता है) को कमीशन के आधार पर 'म्यूल बैंक अकाउंट' बेचता था। उसने आगे बताया कि उसके साथी अर्चिरयन गोरख कांबले, अजीज मिरान शेख, प्रणव जलिंदर और विशाल दुर्गादास अलग-अलग लोगों से म्यूल बैंक अकाउंट हासिल करने में उसकी मदद करते थे।
इसके बाद, कई जगहों पर छापे मारे गए, जिसके चलते बाकी सह-आरोपियों, अर्चिरयन गोरख कांबले, अजीज मिरान शेख, प्रणव जलिंदर और विशाल दुर्गादास को गिरफ्तार कर लिया गया। लगातार पूछताछ के दौरान, आरोपियों ने बताया कि वे कमीशन के आधार पर साइबर धोखाधड़ी करने वाले गिरोहों को म्यूल बैंक अकाउंट हासिल करके सप्लाई करने का काम करते थे।
आरोपी अलग-अलग लोगों से बैंक अकाउंट हासिल करते थे और बाद में धोखाधड़ी वाले लेन-देन में इस्तेमाल करने के लिए उन्हें अपने नियंत्रण में ले लेते थे या ट्रांसफर करवा लेते थे। ये अकाउंट आगे उनके साथियों को दे दिए जाते थे, जिनमें दुबई में रहने वाला चैतन्य भी शामिल था, जिससे बड़े पैमाने पर साइबर धोखाधड़ी को अंजाम देना आसान हो जाता था। बैंक अकाउंट के विश्लेषण से पता चलता है कि इनमें कई करोड़ रुपए के धोखाधड़ी वाले लेन-देन हुए हैं।