नई दिल्ली: त्योहारों और छुट्टियों के दौरान हवाई टिकटों की बढ़ती कीमतों के बीच केंद्र सरकार नए नियम लागू करने की तैयारी कर रही है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि सामान्य परिस्थितियों में एयरलाइंस को किराया तय करने की आजादी रहेगी, लेकिन आपात स्थिति में सरकार दखल दे सकेगी। प्रस्तावित व्यवस्था का उद्देश्य यात्रियों से मनमाना किराया वसूले जाने पर निगरानी रखना और टिकटों की कीमतों में पारदर्शिता बढ़ाना है।
सरकार के अनुसार, एयरलाइंस मांग और उपलब्ध सीटों के आधार पर किराया निर्धारित कर सकेंगी। हालांकि, उन्हें अपनी किराया संबंधी जानकारी नियामक के साथ साझा करनी होगी। नए नियमों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में भी सरकार की ओर से जानकारी दी गई है।
प्रस्तावित नियमों के तहत एयरलाइंस ....
प्रस्तावित नियमों के तहत एयरलाइंस को अपनी उड़ानों के किराए से जुड़ी जानकारी एक महीने पहले नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) को देनी होगी। इसके साथ ही यह विवरण एयरलाइन की आधिकारिक वेबसाइट पर भी उपलब्ध कराना होगा, ताकि यात्री टिकटों की कीमतों के बारे में पहले से जानकारी हासिल कर सकें।
इस व्यवस्था की निगरानी नागरिक उड्डयन महानिदेशालय यानी DGCA करेगा। हालांकि, किराए की जानकारी पहले देने और अधिकतम किराए की सीमा से जुड़े नियमों की अंतिम स्थिति अधिसूचना जारी होने के बाद स्पष्ट होगी। सरकार के मुताबिक, आपात परिस्थितियों में उसे हवाई किराए तय करने का अधिकार भी रहेगा।
हवाई टिकटों की बढ़ती कीमतों ....
हवाई टिकटों की बढ़ती कीमतों का मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है। केंद्र सरकार ने शुक्रवार को अदालत को बताया था कि एयरलाइंस की ओर से मनमाने किराए की समस्या से निपटने के लिए दो सप्ताह के भीतर नए नियम लागू किए जाएंगे।
यह सुनवाई सामाजिक कार्यकर्ता एस. लक्ष्मीनारायण की याचिका पर हो रही थी। याचिका में त्योहारों और छुट्टियों के दौरान टिकटों की कीमतों में होने वाली भारी बढ़ोतरी के साथ-साथ यात्रियों से लिए जाने वाले अतिरिक्त और छिपे हुए शुल्कों पर रोक लगाने की मांग की गई है। अब सरकार की प्रस्तावित व्यवस्था से यह उम्मीद की जा रही है कि टिकटों के दाम और उनसे जुड़े शुल्कों की जानकारी अधिक स्पष्ट होगी।
ईंधन महंगा होने से बढ़ा हवाई सफर का खर्च
त्योहारी सीजन में हवाई यात्रा महंगी होने के पीछे विमानन ईंधन की बढ़ती कीमतें भी एक बड़ी वजह बताई जा रही हैं। विमानन मंत्री राम मोहन नायडू के मुताबिक, एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) महंगा होने के कारण एयरलाइंस के लिए किराए को नियंत्रित रखना चुनौतीपूर्ण हो गया है। इस मुद्दे पर सरकार एयरलाइंस और तेल कंपनियों के साथ बातचीत कर रही है।
हवाई ईंधन एयरलाइंस के परिचालन खर्च का बड़ा हिस्सा होता है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कुल परिचालन लागत में इसकी हिस्सेदारी करीब 30 से 40 प्रतिशत तक हो सकती है। ऐसे में ईंधन की कीमत बढ़ने का असर टिकटों के दाम पर भी पड़ सकता है।
एअर इंडिया और इंडिगो ने बढ़ाए थे शुल्क
ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी के बाद एअर इंडिया और इंडिगो ने भी अक्टूबर में यात्रियों पर अतिरिक्त खर्च का बोझ बढ़ाया था। एअर इंडिया ने 9 अक्टूबर से घरेलू उड़ानों पर 1,200 रुपये तक और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर 17,800 रुपये तक अतिरिक्त फ्यूल चार्ज लगाने की घोषणा की थी। ये शुल्क एअर इंडिया एक्सप्रेस की उड़ानों पर भी लागू किए गए।
वहीं, इंडिगो ने 6 अक्टूबर 2026 से किराए में बढ़ोतरी की थी। इन फैसलों के बाद यात्रियों के लिए हवाई सफर का बजट बढ़ गया है, खासकर उन लोगों के लिए जो त्योहारों या छुट्टियों के दौरान यात्रा की योजना बनाते हैं।
यात्रियों को कितनी राहत मिलेगी?
नए नियमों का वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि सरकार किराए की निगरानी कैसे करती है और आपात स्थिति में हस्तक्षेप के लिए किन मानकों का इस्तेमाल किया जाता है। सामान्य हालात में एयरलाइंस को किराया तय करने की स्वतंत्रता मिलने का मतलब है कि टिकटों के दाम पूरी तरह सरकारी नियंत्रण में नहीं होंगे।
हालांकि, किराए की जानकारी पहले साझा करने और वेबसाइट पर उपलब्ध कराने से यात्रियों को कीमतों की तुलना करने में मदद मिल सकती है। यदि निगरानी व्यवस्था प्रभावी रहती है, तो मनमाने शुल्कों पर लगाम लगाने और हवाई यात्रा के खर्च को लेकर पारदर्शिता बढ़ाने में सहायता मिल सकती है।
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