जंगल से समुद्र और आसमान तक भारत-ऑस्ट्रेलिया का सैन्य अभ्यास ‘ऑस्ट्राहिंद’
नई दिल्ली: भारत और ऑस्ट्रेलिया की सेनाएं संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘ऑस्ट्राहिंद-2026’ को अंजाम दे रही हैं। इस बार के अभ्यास में समुद्र और हवाई मार्ग से सैनिकों को अभियान क्षेत्र में पहुंचाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसके तहत सैनिक समुद्र के रास्ते उतरने और हवाई मार्ग से सैनिकों को निर्धारित स्थानों तक पहुंचाने का विशेष अभ्यास कर रहे हैं।
केरल में आयोजित अभ्यास में दोनों देशों के जवान एक साथ युद्ध कौशल और सैन्य संचालन की बारीकियां सीख रहे हैं। अभ्यास के दौरान दोनों देशों के सैनिकों को जंगल, द्वीपीय और तटीय क्षेत्रों में सैन्य अभियान चलाने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। सैनिकों को अलग-अलग भौगोलिक परिस्थितियों में अभियान की योजना बनाने, दुर्गम क्षेत्रों में आगे बढ़ने और निर्धारित सैन्य लक्ष्य हासिल करने का अभ्यास कराया जा रहा है। इसके तहत शारीरिक क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ कई तरह के सामरिक अभ्यास भी किए जा रहे हैं।
समुद्र और हवा के रास्ते सैनिकों को उतारने का अभ्यास इन गतिविधियों का उद्देश्य कठिन परिस्थितियों में सैनिकों की तैनाती, सामरिक गतिविधियों और अभियान को बेहतर तालमेल के साथ अंजाम देने की क्षमता विकसित करना है। सेना के मुताबिक समुद्र और हवा के रास्ते सैनिकों को उतारने के दौरान समय, समन्वय और सही रणनीति का विशेष महत्व होता है। ऐसे अभ्यासों से दोनों देशों के सैनिकों को अलग-अलग माध्यमों से एक ही अभियान को मिलकर पूरा करने का अनुभव मिलता है।
19 अक्टूबर से 1 नवंबर 2026 तक चल रहे इस 14 दिवसीय अभ्यास में भारतीय सेना की गढ़वाल राइफल्स और ऑस्ट्रेलिया की 13वीं इन्फैंट्री ब्रिगेड के सैनिक हिस्सा ले रहे हैं। इस अभ्यास की खास बात यह है कि इसमें केवल दोनों देशों की सेनाएं ही नहीं, बल्कि भारतीय नौसेना और केरल अग्निशमन एवं बचाव सेवा भी भाग ले रही हैं। ‘ऑस्ट्राहिंद-2026’ में सैन्य अभियानों के साथ मानवीय सहायता और आपदा राहत यानी एचएडीआर गतिविधियों को भी प्रमुखता दी गई है। इसके तहत सैनिकों को आपदा प्रभावित क्षेत्रों में बचाव अभियान चलाने, घायलों को सुरक्षित बाहर निकालने और आपातकालीन परिस्थितियों में राहत एवं बचाव कार्यों का समन्वय करने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
इन गतिविधियों में भारतीय नौसेना और अग्निशमन एवं बचाव सेवा की भागीदारी भी महत्वपूर्ण है। इससे अलग-अलग एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल बनाने और किसी बड़ी आपात स्थिति में मिलकर काम करने की तैयारी को मजबूत किया जा रहा है। इस संयुक्त अभ्यास का उद्देश्य दोनों देशों के सैनिकों की युद्धक तैयारी, सैन्य समन्वय और एक-दूसरे के साथ मिलकर अभियान चलाने की क्षमता बढ़ाना है।
जंगलों, द्वीपों और समुद्री तटों जैसे अलग-अलग क्षेत्रों में प्रशिक्षण से सैनिकों को चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में काम करने का अनुभव मिल रहा है। इसके साथ ही दोनों देशों के सैनिकों को एक-दूसरे की कार्यप्रणाली, सैन्य प्रक्रियाओं और अभियान संचालन के तरीकों को समझने का अवसर मिल रहा है। इससे आपसी विश्वास मजबूत होगा और भारत तथा ऑस्ट्रेलिया के बीच लंबे समय से चले आ रहे रक्षा सहयोग को भी नई मजबूती मिलेगी।
इसका उद्देश्य अलग-अलग एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल विकसित करना और कठिन परिस्थितियों में मिलकर अभियान चलाने की क्षमता बढ़ाना है। 1 नवंबर को समाप्त होने वाला यह 14 दिवसीय अभ्यास दोनों देशों की सेनाओं के बीच संयुक्त सैन्य क्षमता और परिचालन तालमेल बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।