भरतपुर: राजस्थान के भरतपुर जिले में स्टोन क्रेशर और खनन लीज तक जाने वाले रास्ते को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था। रविवार शाम भौंडा-रायपुर गांव में क्रेशर प्लांट पर हुए हिंसक संघर्ष में पूर्व विधायक अतर सिंह भड़ाना गंभीर रूप से घायल हो गए और उनकी मौत हो गई। उनकी पत्नी ने हमलावरों पर गोली चलाने का आरोप लगाया है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। भाजपा से राजनीतिक सफर शुरू करने वाले भड़ाना बाद में बसपा और कांग्रेस में भी रहे थे।
राजस्थान के भरतपुर जिले में स्टोन क्रेशर प्लांट और खनन क्षेत्र के रास्ते को लेकर विवाद रविवार शाम हिंसक हो गया। वैर थाना क्षेत्र के भौंडा-रायपुर गांव में हुई इस घटना में पूर्व विधायक अतर सिंह भड़ाना गंभीर रूप से घायल हो गए। बाद में उनकी मौत हो गई।
भड़ाना बयाना विधानसभा सीट से भाजपा के विधायक रह चुके थे। राजनीति में सक्रिय रहने के बाद उन्होंने खनन और क्रेशर कारोबार में भी अपनी पहचान बनाई थी। उनके क्रेशर प्लांट तक जाने वाले रास्ते को लेकर ग्रामीणों और क्रेशर संचालक पक्ष के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था।
भड़ाना की पत्नी कमलेश भड़ाना ने आरोप लगाया है कि घटना के दौरान हमलावरों ने गोली चलाई। हालांकि, गोली चलने की बात की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। घटना के बाद पुराने राजनीतिक सफर के साथ-साथ उनके कारोबारी विवाद की भी चर्चा होने लगी है।
. किसान मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष से विधायक तक का सफर
अतर सिंह भड़ाना ने राजनीति की शुरुआत भारतीय जनता पार्टी के संगठन से की थी। दिसंबर 2001 में उन्हें राजस्थान किसान मोर्चा का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया। इसके बाद पार्टी ने 2003 के विधानसभा चुनाव में उन्हें भरतपुर जिले की बयाना सीट से उम्मीदवार बनाया।
इस चुनाव में भड़ाना को 41,377 वोट मिले। उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वी ध्रुवेंद्र सिंह को 19,405 मतों के अंतर से हराकर जीत दर्ज की और पहली बार विधानसभा पहुंचे।
वर्ष 2003 से 2008 तक विधायक रहने के दौरान वह विधानसभा की जन लेखा समिति यानी पीएसी के सदस्य भी रहे। यह समिति सरकारी खर्च और सार्वजनिक धन के इस्तेमाल से संबंधित मामलों की समीक्षा करती है। इस जिम्मेदारी के दौरान भड़ाना सरकारी वित्तीय व्यवस्था से जुड़े विषयों पर काम करने वाली समिति का हिस्सा रहे।
गुर्जर आरक्षण आंदोलन के दौरान भाजपा से बढ़े मतभेद
भड़ाना का राजनीतिक सफर भाजपा में आगे बढ़ रहा था, लेकिन वर्ष 2007 में गुर्जर आरक्षण आंदोलन के दौरान पार्टी के साथ उनके संबंधों में खटास आ गई। उस समय राजस्थान में वसुंधरा राजे मुख्यमंत्री थीं।
आंदोलन के दौरान मुख्यमंत्री के रुख का विरोध करने और आरक्षण से जुड़े प्रस्ताव पर विवाद के बीच भाजपा ने भड़ाना को निलंबित कर दिया। इस घटनाक्रम ने उनके राजनीतिक जीवन की दिशा बदल दी।
भाजपा से अलग होने के बाद उन्होंने दूसरी पार्टियों में अपनी राजनीतिक जगह तलाशनी शुरू की। इस तरह एक ही दल से जुड़े रहने के बजाय उनका सफर अलग-अलग राजनीतिक संगठनों तक पहुंच गया।
बसपा में शामिल हुए, फिर कांग्रेस के टिकट पर लड़ा चुनाव
भाजपा से निलंबन के बाद अतर सिंह भड़ाना वर्ष 2008 में बहुजन समाज पार्टी में शामिल हो गए। हालांकि, यहां भी उनका राजनीतिक सफर ज्यादा समय तक नहीं चला। पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोपों के बाद उन्हें बसपा से निष्कासित कर दिया गया।
इसके बाद अक्टूबर 2008 में उन्होंने कांग्रेस का दामन थाम लिया। कांग्रेस ने उसी साल विधानसभा चुनाव में उन्हें भरतपुर जिले की नगर सीट से उम्मीदवार बनाया। यहां उनका मुकाबला भाजपा प्रत्याशी अनीता से हुआ।
चुनाव में अनीता को 22,942 वोट मिले, जबकि भड़ाना के खाते में 18,358 मत आए। इस तरह वह 4,584 वोटों से चुनाव हार गए। इस हार के बाद उनकी सक्रिय चुनावी राजनीति सीमित हो गई और उन्होंने खनन तथा क्रेशर कारोबार पर ज्यादा ध्यान देना शुरू कर दिया।
खनन लीज तक जाने वाले रास्ते को लेकर दो साल से विवाद
राजनीतिक जीवन के बाद के दौर में भड़ाना भरतपुर के वैर क्षेत्र में खनन और क्रेशर व्यवसाय से जुड़े रहे। उनके क्रेशर प्लांट और खनन लीज तक पहुंचने वाले रास्ते को लेकर ग्रामीणों तथा क्रेशर संचालक पक्ष के बीच करीब दो साल से विवाद चल रहा था। इस मामले में ग्रामीण विरोध प्रदर्शन करने के साथ धरने भी दे चुके थे।
रविवार शाम करीब 6:30 से 7 बजे के बीच क्रेशर परिसर में हिंसक घटना हुई। उस समय पहाड़ी पर मशीनों से खनन का काम जारी था। बताया गया कि भड़ाना भी घटनास्थल पर मौजूद थे।
उनकी पत्नी कमलेश भड़ाना के मुताबिक, करीब 70 से 80 लोग वहां पहुंचे और उनके पति सहित अन्य लोगों पर हमला कर दिया। इस हमले में भड़ाना गंभीर रूप से घायल हो गए और बाद में उनकी मौत हो गई।
इस घटना ने रास्ते को लेकर लंबे समय से चले आ रहे विवाद को फिर चर्चा में ला दिया है। पूर्व विधायक की मौत के मामले में उनकी पत्नी की ओर से लगाए गए आरोपों और गोली चलने की अपुष्ट जानकारी के बीच घटना से जुड़े तथ्यों की पुष्टि महत्वपूर्ण है।
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