फर्जी बैंक आईडी का खेल बेनकाब! दिल्ली में साइबर पुलिस की रेड, 83 हिरासत में
WhatsApp से फर्जी दस्तावेज भेजकर ठगी का खेल
Rajasthan राजस्थान। डीग साइबर पुलिस ने दिल्ली पुलिस की तकनीकी और स्थानीय सहायता से कथित क्रेडिट कार्ड धोखाधड़ी नेटवर्क का खुलासा करते हुए दिल्ली के उत्तम नगर स्थित एक निजी प्रतिष्ठान पर छापेमारी की। पुलिस कार्रवाई के दौरान 83 कर्मचारियों और ट्रेनिंग स्टाफ को हिरासत में लिया गया, जिनमें 43 महिलाएं भी शामिल हैं। मामले में पुलिस ने कथित नेटवर्क के मुख्य आरोपी आकाश राठौर को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, यह कार्रवाई डीग स्थित एक्सिस बैंक की शाखा के मैनेजर की शिकायत के बाद की गई। शिकायत में बताया गया था कि एक ग्राहक को व्हाट्सऐप के जरिए बैंक से संबंधित ऐसे दस्तावेज भेजे गए, जिनके फर्जी होने का संदेह था। जांच आगे बढ़ने पर पुलिस को कथित तौर पर ऐसे नेटवर्क की जानकारी मिली, जो फर्जी बैंक पहचान और विजिटिंग कार्ड के जरिए लोगों को क्रेडिट कार्ड उपलब्ध कराने का काम कर रहा था।
उत्तम नगर में पुलिस की छापेमारी
मामले की गंभीरता को देखते हुए डीग साइबर पुलिस ने तकनीकी जानकारी जुटाई। इसके बाद दिल्ली पुलिस के सहयोग से उत्तम नगर स्थित आनंद एंटरप्राइजेज पर छापेमारी की गई। पुलिस के मुताबिक, यहां बड़ी संख्या में कर्मचारी और ट्रेनिंग स्टाफ मौजूद था। कार्रवाई के दौरान कुल 83 लोगों को हिरासत में लिया गया। हिरासत में लिए गए लोगों में 43 महिलाएं भी शामिल हैं। पुलिस अब इन सभी से पूछताछ कर यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कथित फर्जीवाड़े में किसकी क्या भूमिका थी और यह नेटवर्क कितने समय से संचालित हो रहा था।
फर्जी बैंक आईडी और विजिटिंग कार्ड का आरोप
प्रारंभिक जांच में पुलिस को कथित तौर पर पता चला कि संदिग्ध कर्मचारी एक्सिस बैंक की फर्जी आईडी और विजिटिंग कार्ड का इस्तेमाल कर लोगों से संपर्क करते थे। इसके जरिए ग्राहकों को क्रेडिट कार्ड बेचने या उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाता था। पुलिस अब यह जांच कर रही है कि फर्जी दस्तावेज कहां तैयार किए जाते थे, ग्राहकों का डेटा आरोपियों तक कैसे पहुंचता था और इस नेटवर्क के पीछे अन्य कौन-कौन लोग जुड़े हुए हैं।
मुख्य आरोपी आकाश राठौर गिरफ्तार
पुलिस ने मामले में मुख्य आरोपी बताए जा रहे आकाश राठौर को गिरफ्तार कर लिया है। उसे दिल्ली से हिरासत में लेने के बाद डीग लाया गया है। पुलिस के अनुसार, आरोपी से पूछताछ के जरिए नेटवर्क के संचालन, फर्जी दस्तावेज तैयार करने और कथित वित्तीय लेन-देन से जुड़ी अहम जानकारी सामने आने की उम्मीद है। वहीं, हिरासत में लिए गए अन्य कर्मचारियों और ट्रेनिंग स्टाफ से भी पूछताछ की जा रही है। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि इनमें से कितने लोग कथित धोखाधड़ी से सीधे तौर पर जुड़े थे और कितने केवल कंपनी में कर्मचारी या प्रशिक्षु के तौर पर काम कर रहे थे।
डिजिटल सबूत जुटा रही साइबर पुलिस
साइबर पुलिस मामले में तकनीकी साक्ष्यों की भी जांच कर रही है। संदिग्ध मोबाइल फोन, डिजिटल रिकॉर्ड, दस्तावेज और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के आधार पर पूरे नेटवर्क की पड़ताल की जा रही है। पुलिस का फोकस कथित गिरोह के अन्य सदस्यों तक पहुंचने और फर्जी क्रेडिट कार्ड नेटवर्क की पूरी कड़ी सामने लाने पर है। फिलहाल आरोपियों से पूछताछ और कानूनी कार्रवाई जारी है। पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि इस नेटवर्क ने कितने लोगों को निशाना बनाया और कथित धोखाधड़ी के जरिए कितनी रकम का लेन-देन हुआ।