Hyderabad. हैदराबाद। तेलंगाना के भद्राद्री कोठागुडेम जिले में एक दर्दनाक हादसा सामने आया है। यहां चार साल की बच्ची की खड़ी कार के अंदर बंद हो जाने से दम घुटने के कारण मौत हो गई। घटना के बाद पूरे गांव में शोक का माहौल है। पुलिस के अनुसार, यह घटना जुलुरुपाडु मंडल के विनोबा नगर गांव में हुई। मृतक बच्ची की पहचान तन्विश्री के रूप में हुई है। वह विनोबा नगर के सरपंच गंगावत नवीन की बेटी थी।
खेलते समय कार में पहुंची बच्ची
जानकारी के मुताबिक, तन्विश्री घर के पास खेल रही थी। इसी दौरान उसने वहां खड़ी कार का दरवाजा खोल दिया और अंदर चली गई। किसी को इस बात की जानकारी नहीं हो सकी। कुछ समय बाद कार का दरवाजा लॉक हो गया और बच्ची अंदर ही फंस गई। परिवार वालों को काफी देर तक पता नहीं चला कि बच्ची कहां है।
दो घंटे बाद कार में मिली बच्ची
जब तन्विश्री काफी देर तक घर वापस नहीं आई तो परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की। परिवार और आसपास के लोगों ने बच्ची को काफी देर तक खोजा। करीब दो घंटे बाद किसी व्यक्ति ने खड़ी कार के अंदर देखा तो बच्ची आगे की दो सीटों के बीच बेसुध पड़ी मिली। इसके बाद लोगों ने तुरंत कार के शीशे तोड़े और बच्ची को बाहर निकाला। परिजन उसे तत्काल कोठागुडेम के सरकारी अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया।
दम घुटने से मौत की आशंका
पुलिस को शुरुआती जांच में आशंका है कि बंद कार के अंदर हवा की कमी के कारण बच्ची का दम घुट गया होगा। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। घटना के बाद गांव के लोग भी सदमे में हैं। स्थानीय लोगों ने इस हादसे को बेहद दुखद बताया।
पुलिस ने दी सावधानी बरतने की सलाह
पुलिस ने माता-पिता और वाहन मालिकों से अपील की है कि बच्चों को खड़ी गाड़ियों के पास जाने से रोकें। साथ ही कार लॉक करने से पहले यह जरूर जांच लें कि वाहन के अंदर कोई बच्चा तो मौजूद नहीं है।
पुलिस ने कहा कि छोटे बच्चे अक्सर खेलते-खेलते गाड़ियों में चले जाते हैं और कई बार अंदर से दरवाजा खोल नहीं पाते, जिससे ऐसी घटनाएं हो सकती हैं।
पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले
तेलंगाना में पहले भी खड़ी कारों में बच्चों के फंसने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। अप्रैल 2026 में नलगोंडा जिले में भी इसी तरह एक बच्ची की मौत हुई थी।
वहीं पिछले साल रंगा रेड्डी जिले के चेवेल्ला इलाके में खड़ी कार के अंदर फंसने से दो बच्चों की मौत हो गई थी।
इन घटनाओं के बाद एक बार फिर बच्चों की सुरक्षा को लेकर सतर्कता बरतने की जरूरत पर जोर दिया जा रहा है।
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