शिमला। पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने शिमला से जारी बयान में कहा कि 25 जून, 1975 को देश में अपनी कुर्सी बचाने के लिए थोपा गया आपातकाल लोकतंत्र का काला अध्याय है। यह भारत के संविधान की हत्या थी। दुनिया भर में किसी भी लोकतांत्रिक सरकार द्वारा अतीत में ऐसा कदम शायद ही कभी उठाया गया हो। यह एक व्यक्ति, उसकी महत्त्वाकांक्षाओं और उसके स्वयं को देश के संविधान से बड़ा समझने की मानसिकता का परिणाम था। उन्होंने कहा कि अपने विरोधी नेताओं को अकारण जेलों में ठूंस देना और उन्हें यातनाएं देना आपातकाल की आम घटनाएं थीं। जयराम ने कहा कि दुर्भाग्यपूर्ण बात यह है कि कांग्रेस आज भी आपातकाल को गलत नहीं मानती।
इसी कारण कांग्रेस ने प्रदेश की सत्ता में आते ही विधानसभा में पहला विधेयक हमारी सरकार द्वारा शुरू की गई लोकतंत्र प्रहरी सम्मान राशि को बंद करने के लिए लेकर आई। लोकतंत्र प्रहरी सम्मान राशि भाजपा सरकार द्वारा उन लोकतंत्र सेनानियों के लिए शुरू की गई थी, जिन्होंने आपातकाल के दौरान लोकतंत्र की रक्षा के लिए जेल की यातनाएं झेली थीं। नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार जनप्रतिनिधियों को डराने, धमकाने और प्रताडि़त करने का काम कर रही है, ताकि अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनावों में उनके पक्ष में मतदान सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने दावा किया कि हाल ही में संपन्न पंचायत व नगर निकाय चुनावों में अधिकतर विजेता उम्मीदवार भाजपा समर्थित हैं।