शिमला में दिखा पटवारी-कानूनगो की छुट्टी का असर, मायूस लौटे युवा

Update: 2025-02-26 10:59 GMT
Shimla. शिमला। पटवारी-कानूनगो के अवकाश का बड़ा असर राजधानी शिमला में देखने को मिला है। मंगलवार को राजस्व से जुड़े मामलों को लेकर पटवारखानों में पहुंचने वाले लोगों को मायूस होकर लौटना पड़ा। सबसे बड़ा असर उन युवाओं पर देखने को मिल रहा है, जिन्हें आगामी दिनों में पुलिस भर्ती में हिस्सा लेना है। राजधानी शिमला में पुलिस भर्ती का शेड्यूल 10 मार्च को तय किया गया है। ऐसे में भर्ती में हिस्सा लेने से पहले आवश्यक प्रमाण पत्र बनाने हैं और यह प्रमाण पत्र पटवारी की स्वीकृति के बगैर नहीं बन पाएंगे। फिलहाल, मंगलवार को शिमला जिला में पटवारी-कानूनगो एसोसिएशन ने अवकाश के दौरान अलग-अलग एसडीएम कार्यालय के बाहर एकत्र होकर राज्य सरकार के फैसले का विरोध किया है। साथ ही मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से आह्वान किया है कि वे स्टेट कैडर समेत अन्य विषयों में बदलाव करें। पटवारी कानूनगो के शिमला जिला एसोसिएशन के प्रधान चमन ठाकुर ने बताया कि राज्य सरकार ने जो अधिसूचना जारी की है उसका असर उनकी पदोन्नति पर
पड़ेगा।

उन्होंने कहा कि स्टेट कैडर होने के बाद पदोन्नति में दस साल से ज्यादा का वक्त लग सकता है। चमन ठाकुर ने बताया कि स्टेट कैडर का भी इतना अधिक विरोध नहीं है। लेकिन राज्य सरकार को पदोन्नति को लेकर पनप रही विरोधाभास की स्थिति को साफ करना होगा। उन्होंने कहा कि पटवारी-कानूनगो की पदोन्नति का बीस फीसदी कोटा काटा जा रहा है और इसे मिनिस्ट्रयल स्टाफ को दिया जा रहा है। मिनिस्ट्रयल स्टाफ पहले ही सौ फीसदी प्रोमोशन पर है। ऐसे में पटवारी और नायब तहसीलदार की प्रमोशन का कोटा उन्हें मिलने से उनका कोटा 120 फीसदी हो गया है। उन्होंने बताया कि पटवारी कानूनगो एसोसिएशन यह नुकसान नहीं उठा सकती है। राज्य सरकार एसोसिएशन की इस दुविधा का जब तक समाधान नहीं करेगी, उनका आंदोलन जारी रहेगा। इस मौके पर शिमला मुख्यालय समेत ठियोग और नेरवा में पटवारी कानूनगो एसोसिएशन ने 27 फरवरी के अवकाश का आवेदन दे दिया है। ऐसे में तय है अब एसोसिएशन के तमाम सदस्य 27 फरवरी को काम पर नहीं लौटेंगे।
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