BHUJ भुज। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने ग्रेट इंडियन बस्टर्ड यानी गोडावण के संरक्षण को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी दी है। उन्होंने कहा कि राजस्थान में पिछले सात वर्षों से चल रहा कंजर्वेशन ब्रीडिंग कार्यक्रम सफल रहा है और आगामी वन्यजीव सप्ताह के दौरान गोडावण को वापस जंगल में छोड़ने की तैयारी की जा रही है। इस सिलसिले में उन्होंने वन विभाग के अधिकारियों और वन मंत्री अर्जुन भाई के साथ समीक्षा बैठक भी की।
भूपेंद्र यादव ने बताया कि कुछ दिन पहले गिर में नेशनल वाइल्डलाइफ बोर्ड की बैठक आयोजित की गई थी। बैठक में वन्यजीव संरक्षण से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा हुई। उन्होंने देश में चल रहे वन्यजीव संरक्षण कार्यक्रमों का उल्लेख करते हुए चीता ट्रांसलोकेशन परियोजना का भी जिक्र किया। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि चीता ट्रांसलोकेशन का काम मध्य प्रदेश के कूनो में सफलतापूर्वक किया गया है। इसी तरह ग्रेट इंडियन बस्टर्ड के संरक्षण के लिए राजस्थान में पिछले सात वर्षों से कंजर्वेशन ब्रीडिंग का प्रयोग किया जा रहा है।
सात साल से चल रहा गोडावण संरक्षण कार्यक्रम
भूपेंद्र यादव ने कहा कि गोडावण के संरक्षण और प्रजनन को लेकर किया गया प्रयास सफल रहा है। अब इस कार्यक्रम को अगले चरण में ले जाने की तैयारी है। आगामी वन्यजीव सप्ताह के दौरान संरक्षण कार्यक्रम के तहत तैयार किए गए पक्षियों को जंगल में वापस छोड़ने की योजना है।
उन्होंने कहा कि इसी कार्यक्रम के तहत वन विभाग के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की गई है। बैठक में संरक्षण कार्यक्रम की प्रगति और आगे की तैयारियों पर चर्चा की गई। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि वह वन मंत्री अर्जुन भाई और विभागीय अधिकारियों के साथ ग्राउंड विजिट भी करेंगे। इस दौरान जमीनी स्तर पर चल रहे संरक्षण कार्यों और व्यवस्थाओं का जायजा लिया जाएगा।
कूनो के चीता प्रोजेक्ट का भी किया जिक्र
भूपेंद्र यादव ने वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में कूनो चीता परियोजना का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश के कूनो में चीता ट्रांसलोकेशन का कार्य सफलतापूर्वक किया गया। इसके साथ ही अब गोडावण के संरक्षण कार्यक्रम को आगे बढ़ाया जा रहा है।
ग्रेट इंडियन बस्टर्ड देश के महत्वपूर्ण वन्यजीव संरक्षण कार्यक्रमों में शामिल प्रजातियों में से एक है। केंद्रीय मंत्री के बयान के मुताबिक राजस्थान में सात वर्षों से इसके संरक्षण और प्रजनन को लेकर काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वन्यजीव सप्ताह के दौरान गोडावण को जंगल में छोड़ना संरक्षण कार्यक्रम की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा। इससे पहले संबंधित विभागों की ओर से तैयारियों और जमीनी व्यवस्थाओं की समीक्षा की जा रही है।
भूपेंद्र यादव के मुताबिक सरकार वन्यजीवों के संरक्षण के साथ उनके प्राकृतिक आवास और प्रजनन से जुड़े कार्यक्रमों पर भी काम कर रही है। गिर में हुई नेशनल वाइल्डलाइफ बोर्ड की बैठक से लेकर कूनो के चीता प्रोजेक्ट और गोडावण संरक्षण तक विभिन्न परियोजनाओं को इसी दिशा में आगे बढ़ाया जा रहा है। फिलहाल वन विभाग के अधिकारियों के साथ समीक्षा के बाद ग्राउंड विजिट की तैयारी है। इसके बाद आगामी वन्यजीव सप्ताह में गोडावण को जंगल में छोड़ने का कार्यक्रम प्रस्तावित है।
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