बंदरगाह पर 300 करोड़ की ड्रग्स जब्ती
अफगानी तस्कर मोहम्मद हसन हुसैन दाद फिर चर्चा में
Delhi दिल्ली। मुंबई के न्हावा शेवा बंदरगाह के पास स्थित कंटेनर फ्रेट स्टेशन (सीएफएस) के पास 55 किलोग्राम मेथाम्फेटामाइन जब्त किया गया है, जिसकी लागत 300 करोड़ बताई जा रही है। इस जब्ती ने एक बार फिर से नृशंस ड्रग्स तस्कर मोहम्मद हसन हुसैन दाद को सुर्खियों में ला दिया है। हुसैन के बारे में बताया जाता है कि उसका भारत के नशे के बाजार में दबदबा है। इससे पहले अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स के बाजार से भी उसका पुराना नाता रहा है। वह मूल रूप से अफगानिस्तान के कंधार का रहने वाला है। मौजूदा समय में वह इंटर-सर्विस इंटेलिजेंस का हिस्सा बनकर पाकिस्तान को मदद पहुंचाने का काम कर रहा है। वहीं, ड्रग्स से प्राप्त होने वाले धन का इस्तेमाल आतंकवादी गतिविधियों में करने में उसकी मुख्य भूमिका रही है।
हुसैन पहले से ही राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की रडार पर है। वह इससे पहले भी ड्रग्स से जुड़ी कई तस्करी में शामिल रह चुका है। इसके अलावा, एनआईए की ओर से उसके खिलाफ पहले भी आरोपपत्र दाखिल किया जा चुका है। अधिकारियों के मुताबिक, हुसैन इससे पहले भी भारत में कई ऑपरेशन को अंजाम दे चुका है। भारतीय एजेंसियों के सामने हुसैन के ऑपरेशन को लेकर कई बड़ी चुनौतियां हैं। वह आमतौर पर बड़ी मात्रा में नशीले पदार्थों की तस्करी किया करता था। खासकर, हेरोइन की आपूर्ति वह भारत और दक्षिण एशिया के देशों में किया करता था। इंटेलिजेंस अधिकारियों के मुताबिक, आईएसआई के इशारे पर हुसैन अभियानों को बढ़ाने की दिशा में लगातार काम कर रहा था, क्योंकि मौजूदा समय में पाकिस्तान के जासूसों को पैसों की आवश्यकता है।
अधिकारी की ओर से दावा किया गया है कि मौजूदा समय में आईएसआई को भारत में आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए फंड की आवश्यकता है। आईएसआई ने भारत में कई बड़े आतंकी हमले करने की योजना बना रखी है। सलीम दोला की गिरफ्तारी के बाद नेटवर्क की गतिविधियां धीमी पड़ गई। सलीम दोला दाउद इब्राहिम का सहायक माना जाता था। वह यहां पर भारत सिडिंकेट की गतिविधियों की देखरेख भी किया करता था।
सूत्रों के मुताबिक, अब सीमावर्ती रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। आईएसआई सिंडिकेट से दबाव को कम करने की कोशिश कर रहे हैं और भारत में अपने अभियानों को शुरू करने से पहले उसे खुद को बढ़ाने का भी मौका दे रहे हैं। एक अन्य अधिकारी के मुताबिक, डी-सिंडिकेट के आसपास की मौजूदा स्थिति को देखते हुए हुसैन जल्द ही में भारत में अपने अभियानों को तेज करने और उसे बढ़ाने की दिशा में कदम बढ़ा सकता है।