नई दिल्ली: निर्वाचन आयोग में विवाद की खबरों के बीच मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार विपक्ष के निशाने पर आ गए हैं। राहुल गांधी ने कहा कि लोकसभा चुनाव और पिछले कई विधानसभा चुनावों में धांधली हुई है। अभी जितने सबूत सामने आए हैं। उससे कई ज्यादा सबूत मौजूद हैं। इसके बाद राहुल गांधी ने पीएम मोदी और अमित शाह की वीडियो दिखाई। इसमें दोनों नेता लंबे समय तक भारत में एनडीए और भाजपा की सरकार होने का दावा करते हुए सुनाई देते हैं।
राहुल गांधी ने कहा कि वह एक राजनीतिक परिवार से आते हैं और जानते हैं कि ऐसे वर्षों तक सत्ता में रहने का दावा कोई नहीं कर सकता। इंदिरा गांधी ने बांग्लादेश युद्ध जीता। वह अपनी लोकप्रियता के शिखर पर पहुंच गईं। लेकिन इसके कुछ साल बाद ही वह चुनाव हार गईं। यह हर पार्टी के साथ हुआ है। लेकिन भाजपा के साथ ऐसा नहीं हुआ।
राहुल गांधी ने कहा- यह हम इस बात को बार-बार कहते आ रहे हैं कि वोट में परेशानी है। निर्वाचन आयोग की जिम्मेदारी है कि वोट की रक्षा करें। इसके आसपास ही सब चलता है। अगर वोट ही सुरक्षित नहीं है तो फिर कुछ नहीं है। उन्होंने कहा कि मैं कुछ भी हवा में नहीं कह रहा हूं। इससे भी ज्यादा सबूत मौजूद हैं।
राहुल गांधी ने कहा कि वह इस बात को 100 प्रतिशत मानते हैं कि लोकसभा चुनाव और पिछले कई विधानसभा चुनाव रिग्ड थे। राहुल ने कहा कि वह इस बात को पिछले कई समय से कहते आ रहे हैं। लेकिन अब दो चुनाव आयुक्त भी कह रहे हैं। ज्ञानेश कुमार को पीएम मोदी और अमित शाह ने चुना हैं।
वोट चोरी के साथ कानून चोरी होती है। जब कानून चोरी होती है। तो संस्था चोरी होती है। यही चेन बनी हुई है। आज वोट गया, कानून बनाने की प्रणाली गई। राहुल गांधी ने कहा कि संस्थानों के अंदर से सूचना लीक हो रही है। 18 सितंबर को हमने आलंद वोट चोरी के बारे में बात की। 28 अक्तूबर से दोनों चुनाव आयुक्तों ने विरोध करना शुरू कर दिया। क्योंकि जनता का दबाव बढ़ना शुरू हो गया था।
राहुल ने कहा, "समझने की कोशिश करें, वह दोनों क्या कहना चाहते हैं। वह कहना चाहते हैं कि देश में वोट एक्जिस्ट नहीं करता है। वह इसके लिए ज्ञानेश कुमार को ही जिम्मेदार मानते हैं। ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति किसने की है। पीएम मोदी और अमित शाह ने।"
उन्होंने कहा कि हमारे पास इस मामले में बहुत सबूत हैं। जब हम इन्हें रिलीज करेंगे तो आप समझ जाएंगे कि क्या हो रहा है। हमारे चुनाव टूट चुके हैं। हमारे लोकसभा से पारित हुए बिल सवालों के घेरे में हैं क्योंकि सांसदों को चुनकर भेजने वाला संस्थान ही बर्बाद हो चुका है।