114 लड़ाकू विमानों की डील, फ्रांस से जल्द जवाब की उम्मीद

Update: 2026-07-26 15:35 GMT

नई दिल्ली। भारत और फ्रांस के बीच 114 राफेल फाइटर जेट की प्रस्तावित डील को लेकर बड़ी अपडेट सामने आई है। रक्षा अधिकारियों के अनुसार, फ्रांस अगस्त के मध्य तक भारत की ओर से भेजे गए लेटर ऑफ रिक्वेस्ट (LOR) का आधिकारिक जवाब दे सकता है। इस जवाब के बाद दोनों देशों के बीच कीमत, तकनीकी पहलुओं और अन्य महत्वपूर्ण शर्तों को लेकर बातचीत आगे बढ़ेगी।

भारत ने इसी साल मई में भारतीय वायु सेना की जरूरतों को पूरा करने के लिए फ्रांस को 114 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद के लिए लेटर ऑफ रिक्वेस्ट भेजा था। यह सौदा भारत के लिए बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि इसके जरिए वायु सेना की घटती लड़ाकू क्षमता को मजबूत करने की योजना है।

रक्षा अधिकारियों के मुताबिक, फ्रांस ने भारत के प्रस्ताव पर जवाब देने के लिए अगस्त के मध्य तक का समय मांगा है। फ्रांसीसी कंपनी डसाल्ट एविएशन इस डील में मुख्य भूमिका निभाएगी। प्रस्तावित सौदे के तहत 114 राफेल विमानों में से 94 जेट भारत में बनाए जाएंगे। इन विमानों का निर्माण डसाल्ट एविएशन एक भारतीय साझेदार कंपनी के साथ मिलकर करेगा।

यह डील भारत की आत्मनिर्भर भारत नीति के लिहाज से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। भारत लंबे समय से रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी निर्माण को बढ़ावा दे रहा है। ऐसे में देश में राफेल विमानों का निर्माण होने से तकनीकी क्षमता बढ़ाने और रक्षा उत्पादन को मजबूती देने में मदद मिलेगी।

भारतीय वायु सेना लंबे समय से अपने लड़ाकू विमानों के बेड़े को मजबूत करने की कोशिश कर रही है। पुराने मिग लड़ाकू विमानों को धीरे-धीरे हटाया जा रहा है, जबकि स्वदेशी एलसीए मार्क-1ए और एलसीए मार्क-2 विमानों की परियोजनाओं में देरी के कारण वायु सेना के स्क्वाड्रनों की संख्या पर असर पड़ा है।

राफेल विमान आधुनिक तकनीक से लैस मल्टीरोल फाइटर जेट हैं, जो हवा से हवा और हवा से जमीन पर हमला करने की क्षमता रखते हैं। इन विमानों को भारतीय वायु सेना की रणनीतिक जरूरतों के लिए काफी महत्वपूर्ण माना जाता है।

भारत पहले ही फ्रांस से 36 राफेल विमानों की खरीद कर चुका है। इसके अलावा भारतीय नौसेना के लिए भी राफेल एम विमानों को शामिल करने की प्रक्रिया चल रही है। अगर 114 नए राफेल विमानों की डील पूरी होती है तो भारत के पास राफेल विमानों की कुल संख्या काफी बढ़ जाएगी।

भारतीय वायु सेना और नौसेना दोनों ही भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए अत्याधुनिक लड़ाकू विमानों की संख्या बढ़ाने पर जोर दे रही हैं। नौसेना ने समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने के लिए 31 राफेल एम विमानों को शामिल करने की इच्छा जताई है। इससे भारत में राफेल विमानों की संख्या 200 से अधिक तक पहुंच सकती है।

रक्षा मंत्रालय ने वायु सेना की क्षमताओं को बढ़ाने के लिए एक विस्तृत अध्ययन भी कराया है। रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह के नेतृत्व में हुए इस अध्ययन के बाद वायु सेना की जरूरतों और भविष्य की योजनाओं पर काम किया जा रहा है।

रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने करीब चार महीने पहले भारतीय वायु सेना के लिए 114 राफेल विमानों की खरीद के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। अब फ्रांस के जवाब के बाद इस सौदे को लेकर आगे की प्रक्रिया शुरू होगी।

भारत और फ्रांस के बीच रक्षा सहयोग पहले से मजबूत रहा है। राफेल डील को दोनों देशों के रणनीतिक संबंधों के महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में देखा जाता है। नई डील से न केवल भारतीय वायु सेना को मजबूती मिलेगी, बल्कि भारत में रक्षा निर्माण और रोजगार के अवसरों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

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