मलकानगिरी। बंगाल की खाड़ी में बने कम दबाव के क्षेत्र के प्रभाव से लगातार हो रही भारी बारिश ने ओडिशा के मलकानगिरी जिले के कई इलाकों में जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। निचले क्षेत्रों में जलस्तर बढ़ने से खेत जलमग्न हो गए हैं और सड़क संपर्क प्रभावित हुआ है। पंगम, पोटेरू और एमवी-96 पुलों के ऊपर से बाढ़ का पानी बह रहा है, जिससे वाहनों की आवाजाही बाधित हो गई है। प्रभावित पुलों के दोनों ओर पुलिस बल तैनात किया गया है। पुलिसकर्मी लोगों को पानी में डूबे रास्तों पर आगे बढ़ने से रोक रहे हैं।
मौसम की इस स्थिति का कारण बंगाल की खाड़ी के उत्तर-पश्चिम और पश्चिम-मध्य हिस्सों तथा उनसे सटे दक्षिण ओडिशा और उत्तर आंध्र प्रदेश के तटीय क्षेत्रों में बना कम दबाव का क्षेत्र बताया गया है। इसके प्रभाव से जारी बारिश के कारण मलकानगिरी के प्रभावित इलाकों में पानी का स्तर बढ़ गया है। जिले के निचले क्षेत्रों में जलभराव ने लोगों की दैनिक गतिविधियों को प्रभावित किया है। खेतों और आवागमन के रास्तों पर पानी पहुंचने से ग्रामीण क्षेत्रों की परेशानी बढ़ गई है। फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती प्रभावित मार्गों पर सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना है।
पंगम, पोटेरू और एमवी-96 पुलों के ऊपर पानी बहने के कारण इन रास्तों से गुजरना जोखिमपूर्ण हो गया है। पुलों पर चढ़ा पानी वाहनों की आवाजाही में बाधा बना हुआ है। ऐसी स्थिति में सड़क की सतह और किनारों का सही अंदाजा लगाना मुश्किल होता है। पानी के बीच वाहन ले जाने से दुर्घटना का खतरा भी रहता है। इसी वजह से मौके पर तैनात पुलिसकर्मी आने-जाने वालों को आगे बढ़ने से रोक रहे हैं। यातायात बहाल होने की स्थिति जलस्तर घटने और रास्तों के सुरक्षित होने पर निर्भर करेगी।
पोटेरू पुल पर पानी चढ़ने से राष्ट्रीय राजमार्ग-326 पर मलकानगिरी और मोटू के बीच यातायात प्रभावित होने की ताजा रिपोर्ट भी सामने आई है। इससे जिले के भीतर सड़क संपर्क पर बारिश के असर की पुष्टि होती है। हालांकि, सभी प्रभावित मार्गों पर वाहनों की संख्या, यातायात बाधित रहने की अवधि और उपलब्ध वैकल्पिक रास्तों का विस्तृत विवरण सामने नहीं आया है। यात्रियों के लिए संबंधित मार्ग की मौजूदा स्थिति जानना जरूरी है, क्योंकि अलग-अलग स्थानों पर पानी का स्तर और रास्ते की स्थिति भिन्न हो सकती है।
भारी बारिश का असर कृषि क्षेत्रों में भी दिखाई दे रहा है। निचले इलाकों में जलस्तर बढ़ने के कारण खेत पानी में डूब गए हैं। इससे किसानों की चिंता बढ़ गई है। खेतों में लंबे समय तक पानी जमा रहने से फसलों को नुकसान पहुंचने की आशंका रहती है। हालांकि, इस घटना में कितने क्षेत्र की फसल प्रभावित हुई है और किस प्रकार की फसलों पर असर पड़ा है, इसकी जानकारी उपलब्ध नहीं है। नुकसान का वास्तविक आकलन पानी उतरने और खेतों की स्थिति सामने आने के बाद ही किया जा सकेगा।
किसानों के लिए जलभराव की अवधि विशेष महत्व रखती है। पानी जल्दी निकलने और लंबे समय तक जमा रहने की परिस्थितियों में फसलों पर प्रभाव अलग हो सकता है। इसी कारण जलमग्न खेतों को देखकर अभी नुकसान की निश्चित मात्रा बताना संभव नहीं है। उपलब्ध विवरण में किसानों की बढ़ती चिंता का उल्लेख है, लेकिन फसल पूरी तरह नष्ट होने की पुष्टि नहीं की गई है। कृषि संबंधी नुकसान, खेतों में जमा पानी और प्रभावित किसानों की संख्या की विस्तृत जानकारी आने पर स्थिति अधिक स्पष्ट होगी।
प्रभावित पुलों के दोनों ओर पुलिस की तैनाती फिलहाल लोगों को जोखिम वाले रास्तों पर जाने से रोकने के लिए की गई है। पानी से ढके मार्गों पर सुरक्षा का यह प्रबंध महत्वपूर्ण है। लोगों को रोकने का उद्देश्य उन्हें संभावित दुर्घटनाओं से बचाना है। पुल के ऊपर बहते पानी की गहराई या बहाव का अनुमान केवल देखकर लगाना भरोसेमंद नहीं होता। ऐसे में स्थानीय लोगों और वाहन चालकों के लिए मौके पर तैनात कर्मियों के निर्देशों का पालन करना आवश्यक है। रास्ता खुलने की पुष्टि के बाद ही संबंधित पुल से गुजरना सुरक्षित माना जा सकेगा।
लगातार बारिश और सड़क संपर्क प्रभावित होने से जिले के कई क्षेत्रों में सामान्य गतिविधियों पर असर पड़ा है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में प्रभावित गांवों की कुल संख्या, घरों में पानी घुसने, लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने या राहत शिविर शुरू होने का विवरण नहीं दिया गया है। किसी जनहानि की भी जानकारी उपलब्ध नहीं है। फिलहाल सामने आए विवरण खेतों में जलभराव, निचले क्षेत्रों में बढ़ते जलस्तर और तीन पुलों पर बाधित आवाजाही से संबंधित हैं। आगे की स्थिति बारिश, पानी की निकासी और पुलों पर जलस्तर में बदलाव से स्पष्ट होगी।