भुवनेश्वर। ओडिशा में भारी बारिश की स्थिति से निपटने के लिए राज्य सरकार ने निगरानी और एहतियाती तैयारी बढ़ा दी है। मौसम तथा नदियों की स्थिति पर चौबीसों घंटे नजर रखी जा रही है। संवेदनशील क्षेत्रों में संभावित जलभराव और बाढ़ जैसी परिस्थितियों को देखते हुए बचाव के उपाय किए गए हैं। पिछले 24 घंटों में राज्य में औसतन 24.5 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। सबसे अधिक 192 मिलीमीटर वर्षा मलकानगिरी जिले के चित्रकोंडा ब्लॉक में हुई। राज्य के अलग-अलग क्षेत्रों में बारिश की मात्रा में काफी अंतर दिखाई दिया है।

बारिश के आंकड़ों के अनुसार, पांच ब्लॉकों में 100 मिलीमीटर से अधिक वर्षा हुई। वहीं 33 ब्लॉकों में 50 से 100 मिलीमीटर के बीच बारिश दर्ज की गई। इस तरह 38 ब्लॉकों में कम से कम 50 मिलीमीटर वर्षा होने की जानकारी सामने आई है। चित्रकोंडा में दर्ज बारिश राज्य के औसत से काफी अधिक रही। यह अंतर बताता है कि पूरे राज्य की औसत वर्षा के साथ स्थानीय स्तर पर हुई बारिश को भी देखना जरूरी है। किसी विशेष क्षेत्र में अधिक पानी गिरने से वहां की स्थिति राज्य के अन्य हिस्सों से अलग हो सकती है।

सितंबर के शुरुआती 12 दिनों के आंकड़े देखें तो राज्य में सामान्य से कुछ कम बारिश हुई है। एक से 12 सितंबर के बीच कुल 90.2 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई, जबकि इस अवधि की सामान्य बारिश 96.6 मिलीमीटर है। इस हिसाब से वर्षा में 6.6 प्रतिशत की कमी रही। वास्तविक और सामान्य बारिश के बीच अंतर 6.4 मिलीमीटर है। हालांकि, इस अवधि का राज्यव्यापी आंकड़ा किसी एक ब्लॉक में हुई भारी बारिश या वहां की मौजूदा परेशानी को पूरी तरह नहीं दर्शाता।

पूरे मानसून की तस्वीर सितंबर के आंकड़ों से अलग है। एक जून से 12 सितंबर के बीच ओडिशा में कुल 1,247.5 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। इसी अवधि की सामान्य वर्षा 997 मिलीमीटर है। इस प्रकार राज्य में सामान्य से 250.5 मिलीमीटर अधिक पानी बरसा है और वर्षा की अधिकता 25.1 प्रतिशत रही। यानी सितंबर के शुरुआती दिनों में मामूली कमी होने के बावजूद मानसून की कुल बारिश सामान्य से अधिक बनी हुई है। दोनों आंकड़ों की अवधि अलग होने के कारण इनमें विरोधाभास नहीं है।

इन आंकड़ों से बारिश के वितरण का अंतर भी समझ में आता है। राज्य स्तर पर किसी अवधि में वर्षा की कमी दर्ज होने के साथ कुछ स्थानों पर बहुत अधिक बारिश हो सकती है। चित्रकोंडा में पिछले 24 घंटों की वर्षा इसका उदाहरण है। इसलिए तैयारियों के लिए केवल कुल मानसूनी बारिश पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं होता। स्थानीय वर्षा, पानी की निकासी और नदियों के जलस्तर की जानकारी भी महत्वपूर्ण रहती है। राज्य सरकार की लगातार निगरानी इसी बदलती स्थिति को समझने और जरूरत के अनुसार प्रतिक्रिया देने के लिए अहम है।

 मलकानगिरी जिले के मलकानगिरी, माथिली, कालीमेला और पोडिया ब्लॉकों पर विशेष नजर रखी जा रही है। एहतियात के तौर पर माथिली और कालीमेला में ओडिशा आपदा त्वरित कार्रवाई बल की टीमें तैनात की गई हैं। कालाहांडी के गोलामुंडा, जूनागढ़, भवानीपटना और लांजीगढ़ ब्लॉकों की स्थिति भी निगरानी में है। वहां भी तैयारी मजबूत करने के लिए आपदा प्रतिक्रिया दल की तैनाती की जानकारी दी गई है। इन कदमों का उद्देश्य जरूरत पड़ने पर प्रभावित क्षेत्रों में सहायता उपलब्ध कराने की तैयारी बनाए रखना है।  

इसी रिपोर्ट में बताया गया है कि शनिवार सुबह तक निगरानी में शामिल नदियां अपने संबंधित खतरे के निशान से नीचे थीं। राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र जिला केंद्रों के साथ समन्वय करके चौबीसों घंटे स्थिति पर नजर रख रहा है। जिला प्रशासन को स्थानीय जलभराव, सड़कों पर पानी भरने और शहरी क्षेत्रों में अंडरपास बंद होने की संभावनाओं के लिए आवश्यक तैयारी करने को कहा गया है। कच्ची सड़कों, कमजोर संरचनाओं और फसलों को संभावित नुकसान के प्रति भी सतर्क रहने की सलाह दी गई है। सरकारी तैयारी संबंधी रिपोर्ट

नदियों का खतरे के निशान से नीचे होना राहत की जानकारी है, लेकिन स्थानीय जलभराव की स्थिति इससे अलग हो सकती है। किसी सड़क, पुल या निचले क्षेत्र में पानी जमा होने का आकलन उस स्थान की परिस्थितियों के आधार पर करना पड़ता है। इसलिए लोगों के लिए अपने इलाके की आधिकारिक सूचना पर ध्यान देना जरूरी है। पानी से ढके रास्तों पर यात्रा करने से पहले मार्ग की स्थिति जानना उपयोगी रहेगा। बारिश के दौरान स्थानीय प्रशासन द्वारा लगाए गए आवागमन संबंधी प्रतिबंधों और निर्देशों का पालन किया जाना चाहिए।

फिलहाल राज्य की तैयारी में मौसम की निगरानी, संवेदनशील क्षेत्रों पर विशेष ध्यान और बचाव दलों की उपलब्धता प्रमुख हैं। आगे की स्थिति स्थानीय बारिश तथा जलस्तर में बदलाव से तय होगी। पिछले 24 घंटों के आंकड़े बताते हैं कि कुछ ब्लॉकों में काफी अधिक वर्षा हुई है। वहीं मानसून की कुल बारिश भी सामान्य से ऊपर बनी हुई है। इन परिस्थितियों में लगातार निगरानी महत्वपूर्ण है। प्रभावित इलाकों के बारे में नई आधिकारिक जानकारी मिलने पर ही स्थानीय खतरे और आवश्यक कदमों का सही आकलन किया जा सकेगा।

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