गरबा में मुसलमानों की एंट्री पर विवाद, संजय राउत ने PM मोदी का जिक्र कर उठाया सवाल
नवरात्रि का त्योहार नजदीक आते ही देश के कई हिस्सों में गरबा आयोजनों की तैयारियां शुरू हो गई हैं.
नई दिल्ली: नवरात्रि का त्योहार नजदीक आते ही देश के कई हिस्सों में गरबा आयोजनों की तैयारियां शुरू हो गई हैं। इसी के साथ कुछ जगहों पर गरबा कार्यक्रमों में मुसलमानों की एंट्री को लेकर बहस भी तेज हो गई है। महाराष्ट्र में इस मुद्दे ने अब राजनीतिक रंग ले लिया है। बीजेपी नेता और मंत्री नितेश राणे के बयान के बाद इस मामले पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की पत्नी अमृता फडणवीस ने भी इस मुद्दे पर अपनी अलग राय रखी है। अब उद्धव ठाकरे गुट के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उदाहरण देते हुए सवाल उठाया है।
संजय राउत ने PM मोदी का जिक्र क्यों किया?
संजय राउत ने गरबा आयोजनों में मुसलमानों की भागीदारी को लेकर चल रही बहस पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विदेश दौरों का जिक्र किया। उन्होंने सवाल किया कि जब प्रधानमंत्री विदेशों में मुस्लिम देशों के नेताओं से मुलाकात करते हैं और उन्हें अपना भाई कहते हैं, तो भारत में रहने वाले मुसलमानों को अलग नजर से क्यों देखा जाना चाहिए?
राउत ने सवालिया अंदाज में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब सऊदी अरब समेत मुस्लिम देशों का दौरा करते हैं और वहां के नेताओं के साथ भाईचारे की बात करते हैं, तो भारत के मुसलमानों को भी देश के सामाजिक और सांस्कृतिक आयोजनों में शामिल होने से क्यों रोका जाना चाहिए।
उन्होंने तर्क दिया कि अगर विदेशों में मुस्लिम समुदाय के लोगों को भाई माना जाता है, तो भारत में रहने वाले मुसलमानों को दुश्मन की तरह देखने की सोच उचित नहीं हो सकती। राउत ने इसी आधार पर गरबा आयोजनों में मुसलमानों की एंट्री पर रोक की मांग को लेकर सवाल खड़े किए।
नितेश राणे ने क्या कहा था?
दरअसल, महाराष्ट्र में गरबा कार्यक्रमों को लेकर यह विवाद बीजेपी नेता और मंत्री नितेश राणे के बयान के बाद चर्चा में आया। राणे ने कहा था कि मुसलमानों को गरबा आयोजनों में प्रवेश नहीं दिया जाना चाहिए।
इससे पहले विश्व हिंदू परिषद की ओर से भी गरबा जैसे हिंदू आयोजनों में मुसलमानों को प्रवेश नहीं देने की मांग सामने आई थी। नितेश राणे ने इस मांग का समर्थन किया था। इसके बाद यह मुद्दा राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गया।
अमृता फडणवीस की राय अलग
इस विवाद के बीच महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की पत्नी अमृता फडणवीस का बयान भी सामने आया। उन्होंने नितेश राणे की राय से असहमति जताते हुए कहा कि अगर मुसलमान गरबा उत्सव में शामिल होते हैं तो इसमें कुछ गलत नहीं है।
अमृता फडणवीस के मुताबिक, हिंदू त्योहारों की भावना लोगों को साथ लेकर चलने की रही है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि सार्वजनिक आयोजनों में सभी लोगों को नियमों और दूसरों की भावनाओं का ध्यान रखना चाहिए।
उन्होंने जोर दिया कि किसी भी उत्सव के दौरान व्यवस्था बनाए रखना जरूरी है और यह भी देखा जाना चाहिए कि आयोजन की वजह से दूसरे लोगों को परेशानी न हो। उनके अनुसार, श्रद्धा और नियमों का पालन करते हुए त्योहार मनाया जाना चाहिए।
महाराष्ट्र में गरबा को लेकर बढ़ी राजनीतिक बहस
नवरात्रि के दौरान महाराष्ट्र समेत देश के कई हिस्सों में बड़े स्तर पर गरबा कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। ऐसे में इस बार आयोजनों में किसे प्रवेश दिया जाए और किसे नहीं, इस सवाल ने राजनीतिक बहस को जन्म दिया है।
एक तरफ नितेश राणे और विश्व हिंदू परिषद की ओर से हिंदू आयोजनों में मुसलमानों की एंट्री को लेकर आपत्ति जताई गई है। दूसरी तरफ अमृता फडणवीस और अब संजय राउत ने अलग रुख सामने रखा है।
संजय राउत ने प्रधानमंत्री मोदी के विदेशों में मुस्लिम नेताओं के साथ संबंधों का उदाहरण देते हुए इसी विरोधाभास पर सवाल उठाया है। फिलहाल गरबा आयोजनों से जुड़ा यह विवाद महाराष्ट्र की राजनीति में चर्चा का विषय बना हुआ है और नवरात्रि के दौरान इस मुद्दे पर बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।