Moradabad मुरादाबाद: उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (All India Muslim Personal Law Board) के सदस्य मौलाना सज्जाद नोमानी के हालिया बयान को लेकर सियासी और सामाजिक हलकों में विवाद तेज हो गया है। इस बयान पर भारतीय सूफी फाउंडेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सूफी काशिश वारसी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। मीडिया से बातचीत में सूफी काशिश वारसी ने आरोप लगाया कि मौलाना सज्जाद नोमानी ने यह बयान खुद को चर्चा में बनाए रखने के लिए दिया है। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में नोमानी पर महाराष्ट्र से जुड़े एक बड़े राजनीतिक विवाद को लेकर सवाल उठ रहे हैं, जिसमें यह आरोप है कि उन्होंने कुछ नेताओं के पक्ष में वोट देने की अपील की थी, और बाद में वही नेता भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के साथ चले गए।
वारसी ने कहा कि इसी विवाद से ध्यान भटकाने के लिए नोमानी ने नया बयान दिया है। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि जनता यह जानना चाहती है कि क्या वास्तव में उन्होंने उन नेताओं के लिए वोट मांगे थे और यदि हां, तो इसका उद्देश्य क्या था। इस पूरे मामले में सूफी काशिश वारसी ने यह भी कहा कि मौलाना का यह बयान राजनीतिक बहस को दिशा बदलने की कोशिश प्रतीत होता है। उनके अनुसार, ऐसे बयान समाज में भ्रम पैदा करते हैं और वास्तविक मुद्दों से ध्यान हटाते हैं। Bharatiya Sufi Foundation के अध्यक्ष ने मांग की है कि इस पूरे विवाद की पारदर्शी तरीके से जांच होनी चाहिए और जनता के सामने तथ्यों को स्पष्ट किया जाना चाहिए। इस बयानबाजी ने धार्मिक और राजनीतिक हलकों में नई बहस को जन्म दे दिया है, जहां एक पक्ष इसे राजनीतिक जवाबदेही से जुड़ा मुद्दा बता रहा है, वहीं दूसरा पक्ष इसे बेबुनियाद आरोप और ध्यान भटकाने की रणनीति करार दे रहा है।