Shimla. शिमला। प्रधानमंत्री ग्राम सडक़ योजना और नाबार्ड की तर्ज पर लोक निर्माण विभाग में अब राज्य कार्यों के टेंडर की शर्तें होगी। विभाग ने प्रदेश सरकार की मंजूरी के बाद राज्य योजनाओं के तहत होने वाले कार्यों की टेंडर शर्तों में बड़ा बदलाव किया है। इसके तहत राज्य कार्यों के टेंडर भी जीएसटी को छोडक़र किए जाएंगे। इसके लिए विभाग ने जनरल कंडीशंस ऑफ कॉन्ट्रैक्ट (जीसीसी) में संशोधन कर दिए हैं और सभी मुख्य अभियंताओं तथा अधीक्षण अभियंताओं को नए प्रावधानों का सख्ती से पालन करने के निर्देश जारी किए हैं। विभाग की ओर से जारी निर्देशों के अनुसार अब ठेकेदार निविदा में केवल कार्य की मूल दरें भरेंगे। इन दरों में जीएसटी शामिल नहीं होगा, जबकि लेबर सेस समेत भवन एवं अन्य रॉयल्टी, स्थानीय निकायों के कर और अन्य सभी शुल्कों को ध्यान में रखकर ही दरें देनी होंगी। कार्य पूरा होने और बिल प्रस्तुत करने के समय प्रचलित दर के अनुसार जीएसटी अलग से भुगतान किया जाएगा। वर्तमान में यह दर 18 प्रतिशत है। संशोधित प्रावधानों के अनुसार निर्माण सामग्री की खरीद पर लगने वाला जीएसटी ठेकेदार पहले स्वयं जमा करेगा। इसके बाद विभाग कार्य की स्वीकृत मात्रा के आधार पर बिल भुगतान के समय लागू जीएसटी का भुगतान करेगा।
जीएसटी की स्रोत पर कटौती (टीडीएस) जीएसटी अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार की जाएगी। विभाग ने स्पष्ट किया है कि निविदा में दी जाने वाली दरों में जीएसटी शामिल नहीं माना जाएगा, लेकिन अन्य सभी कर, उपकर, रॉयल्टी, टोल टैक्स तथा स्थानीय निकायों के शुल्क शामिल रहेंगे। इनका भुगतान ठेकेदार को स्वयं करना होगा। विभाग केवल कानून के अनुसार आवश्यक कटौतियां करेगा। सरकार ने जीसीसी की कंडीशन- 34 में भी संशोधन किया है। इसके तहत यदि निविदा की अंतिम तिथि के बाद भवन एवं अन्य कंस्ट्रक्शन वर्कर्स वेलफेयर सेस अथवा किसी अन्य कर या उपकर में वृद्धि या कमी होती है तो, उसका समायोजन किया जाएगा। हालांकि यह व्यवस्था जीएसटी पर लागू नहीं होगी। यदि ठेकेदार अनुबंध अवधि बढऩे के लिए स्वयं जिम्मेदार होगा, तो बढ़ी हुई अवधि के दौरान करों में हुई वृद्धि का लाभ उसे नहीं मिलेगा। संशोधित नियमों में कहा गया है कि ठेकेदार को करों अथवा उपकर में किसी भी बदलाव की जानकारी 30 दिन के भीतर लिखित रूप में अभियंता को देनी होगी।