Coimbatore कोयंबटूर। राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) को लेकर तमिलनाडु में राजनीतिक बहस एक बार फिर तेज हो गई है। कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने कहा है कि राज्य सरकारों को यह अधिकार होना चाहिए कि वे तकनीकी परीक्षाओं के आयोजन और प्रवेश प्रक्रिया को लेकर अपने फैसले ले सकें। कोयंबटूर में मीडिया से बातचीत के दौरान कांग्रेस सांसद ने कहा कि उनकी पार्टी का मानना है कि राज्यों को शिक्षा व्यवस्था से जुड़े महत्वपूर्ण फैसले लेने की स्वतंत्रता मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु लंबे समय से NEET से छूट की मांग करता रहा है और कांग्रेस इस मुद्दे पर राज्य के रुख का समर्थन करती है।
मणिकम टैगोर ने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने वर्ष 2019 के चुनावी घोषणा पत्र में NEET मुक्त तमिलनाडु का वादा किया था। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने यह भरोसा दिलाया था कि यदि कांग्रेस केंद्र में सरकार बनाती है तो तमिलनाडु में NEET परीक्षा को समाप्त करने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे। कांग्रेस सांसद ने कहा कि राहुल गांधी के प्रधानमंत्री बनने का इंतजार करने की जरूरत नहीं है, बल्कि तमिलनाडु को जल्द से जल्द NEET से छूट मिलनी चाहिए। उन्होंने मांग की कि मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के लिए 12वीं कक्षा के अंकों को ही आधार बनाया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि राज्य के छात्र-छात्राओं के हितों को ध्यान में रखते हुए प्रवेश प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए, जिससे सभी वर्गों के विद्यार्थियों को समान अवसर मिल सके। कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि NEET जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा से ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। तमिलनाडु में NEET को लेकर लंबे समय से राजनीतिक विवाद जारी है। राज्य सरकार और कई क्षेत्रीय दल इस परीक्षा से छूट की मांग करते रहे हैं। उनका तर्क है कि राज्य बोर्ड से पढ़ने वाले छात्रों के लिए राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा में प्रतिस्पर्धा करना कठिन हो सकता है।
वहीं, NEET समर्थक पक्ष का कहना है कि यह परीक्षा देशभर में मेडिकल प्रवेश प्रक्रिया में एकरूपता और पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से लागू की गई है। मणिकम टैगोर के बयान के बाद NEET को लेकर राजनीतिक बहस फिर से चर्चा में आ गई है। कांग्रेस ने एक बार फिर राज्यों के अधिकार और छात्रों के हितों को मुद्दा बनाते हुए तमिलनाडु की मांग का समर्थन किया है। फिलहाल NEET को लेकर केंद्र और राज्य सरकारों के बीच मतभेद जारी हैं। आने वाले समय में यह मुद्दा तमिलनाडु की राजनीति में अहम भूमिका निभा सकता है।
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