नई दिल्ली। पेपर लीक के मुद्दे को लेकर प्रधानमंत्री आवास के पास कांग्रेस नेताओं के प्रदर्शन के बाद अब इस मामले पर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी (AAP) ने कांग्रेस के इस धरने पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि यह कदम CJP (छात्र न्याय प्रक्रिया/छात्र आंदोलन) के चल रहे विरोध प्रदर्शन को कमजोर करने की कोशिश है। AAP नेताओं ने दावा किया कि केंद्र सरकार ने राहुल गांधी के प्रदर्शन को तुरंत महत्व दिया, जबकि लंबे समय से चल रहे अन्य आंदोलनों पर ध्यान नहीं दिया गया।
आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कांग्रेस के प्रदर्शन को लेकर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि CJP के धरने को कमजोर करने के लिए राहुल गांधी को प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरना देने की स्थिति बनाई गई। संजय सिंह ने अपने पोस्ट में लिखा, "CJP के धरने को कमजोर करने के लिए मोदी जी ने राहुल गांधी को अपने आवास पर धरने पर बिठा दिया।"
संजय सिंह के इस बयान के बाद सियासी माहौल गर्म हो गया है। AAP ने कांग्रेस और केंद्र सरकार के बीच कथित तालमेल का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार ने राहुल गांधी के प्रदर्शन पर तुरंत प्रतिक्रिया दी, जबकि जंतर-मंतर पर चल रहे CJP आंदोलन को लेकर लंबे समय तक कोई बातचीत नहीं की गई।
AAP विधायक आतिशी ने भी इस मुद्दे पर केंद्र सरकार और कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि CJP और सोनम वांगचुक लंबे समय से जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन सरकार ने उनकी मांगों पर बातचीत नहीं की। वहीं, राहुल गांधी के पीएम आवास के बाहर प्रदर्शन के बाद कथित तौर पर एक घंटे के अंदर ही सरकार की ओर से बातचीत शुरू हो गई।
आतिशी ने अपने पोस्ट में लिखा कि यह स्थिति सवाल खड़े करती है कि एक आंदोलन को नजरअंदाज किया जाता है, जबकि दूसरे प्रदर्शन पर तुरंत प्रतिक्रिया दी जाती है। उन्होंने इसे "जुगलबंदी" बताते हुए कांग्रेस और भाजपा के बीच कथित समझौते का आरोप लगाया।
गौरतलब है कि पेपर लीक और छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर कांग्रेस ने प्रधानमंत्री आवास के पास प्रदर्शन किया था। इस प्रदर्शन में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा समेत कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए थे। कांग्रेस नेताओं ने छात्रों के हितों और परीक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार से जवाब मांगा।
कांग्रेस का आरोप है कि केंद्र सरकार छात्रों की समस्याओं पर गंभीरता नहीं दिखा रही है और पेपर लीक जैसी घटनाओं पर जवाबदेही तय नहीं कर रही है। वहीं, कांग्रेस नेताओं ने शिक्षा मंत्री और सरकार से इस मामले पर स्पष्ट जवाब देने की मांग की है।
दूसरी ओर, AAP ने कांग्रेस के प्रदर्शन को लेकर अलग रुख अपनाया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि छात्रों के मुद्दों को लेकर चल रहे आंदोलन को राजनीतिक प्रतिस्पर्धा का हिस्सा नहीं बनाया जाना चाहिए। AAP ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के प्रदर्शन से CJP आंदोलन की चर्चा कम हो सकती है और इसका फायदा केंद्र सरकार को मिल सकता है।
इस पूरे मामले में अभी कांग्रेस की ओर से AAP के आरोपों पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, विपक्षी दलों के बीच इस मुद्दे को लेकर आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है।
पेपर लीक का मुद्दा पिछले कुछ समय से देशभर में राजनीतिक बहस का केंद्र बना हुआ है। छात्र संगठनों और विपक्षी दलों का कहना है कि परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता जरूरी है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं, सरकार की ओर से भी परीक्षा प्रणाली को मजबूत करने और अनियमितताओं पर रोक लगाने के लिए कदम उठाने की बात कही जाती रही है।
अब देखना होगा कि CJP आंदोलन, कांग्रेस के प्रदर्शन और AAP के आरोपों के बीच यह राजनीतिक विवाद आगे किस दिशा में जाता है।