Patna पटना। जाति आधारित आरक्षण खत्म करने की मांग को लेकर हो रहे विरोध-प्रदर्शनों के बीच केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि आरक्षण किसी के कहने मात्र से समाप्त होने वाली व्यवस्था नहीं है। यह किसी व्यक्ति या वर्ग को दी गई खैरात नहीं, बल्कि संविधान द्वारा दिया गया अधिकार है। पटना में मीडिया से बातचीत के दौरान केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने कहा कि आरक्षण को लेकर समाज के अलग-अलग वर्गों में मतभेद हो सकते हैं, लेकिन इस विषय पर संवाद के जरिए समाधान निकाला जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जो लोग आरक्षण समाप्त करने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं, उनसे बातचीत की जाएगी तो उन्हें भी संवैधानिक व्यवस्था और इसके उद्देश्य को समझने का अवसर मिलेगा।
चिराग पासवान ने कहा कि आरक्षण का प्रावधान सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से किया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह व्यवस्था किसी की कृपा या दया पर आधारित नहीं है, बल्कि संविधान में दिए गए अधिकारों के तहत लागू है। उन्होंने कहा कि देश में हर मुद्दे पर लोकतांत्रिक तरीके से चर्चा होनी चाहिए। विरोध प्रदर्शन करना लोगों का अधिकार है, लेकिन किसी भी विषय पर अंतिम समाधान बातचीत और आपसी समझ से ही निकल सकता है।
बता दें कि देश के कई हिस्सों में जाति आधारित आरक्षण को लेकर समय-समय पर बहस होती रही है। कुछ संगठन आरक्षण व्यवस्था में बदलाव या इसे खत्म करने की मांग करते रहे हैं, जबकि कई सामाजिक संगठन इसे वंचित वर्गों के उत्थान के लिए जरूरी बताते हैं। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि आरक्षण को लेकर किसी भी तरह का फैसला संविधान के दायरे में ही लिया जा सकता है। उन्होंने कहा कि सरकार सभी वर्गों के हितों को ध्यान में रखते हुए काम कर रही है और समाज में संतुलन बनाए रखना जरूरी है।
चिराग पासवान का यह बयान ऐसे समय आया है जब बिहार समेत देश के कई हिस्सों में आरक्षण व्यवस्था को लेकर राजनीतिक और सामाजिक चर्चा तेज है। उन्होंने सभी पक्षों से अपील की कि वे संवेदनशील मुद्दों पर संयम बनाए रखें और संवाद का रास्ता अपनाएं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में हर व्यक्ति को अपनी बात रखने का अधिकार है, लेकिन किसी भी अधिकार को लेकर भ्रम फैलाने के बजाय तथ्यों को समझना जरूरी है। आरक्षण संविधान की व्यवस्था है और इसे लेकर कोई भी कदम संवैधानिक प्रक्रिया के तहत ही उठाया जा सकता है।
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