मुंबई: क्या 15 साल से चल रहा जमीन का विवाद आखिरकार अब खत्म होने की ओर है? महाराष्ट्र के ठाणे स्थित मीरा रोड में रहने वाले 81 वर्षीय असगरअली वोहरा को जमीन विवाद में बड़ी राहत मिली है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के महज आठ दिन बाद भाजपा विधायक नरेंद्र मेहता ने विवादित जमीन से कब्जा छोड़ने और निर्माण से जुड़ी अनुमति वापस करने की बात कही है।
15 साल से सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे थे असगर
असगरअली वोहरा का कहना है कि वह करीब डेढ़ दशक से अपनी जमीन से जुड़े विवाद को लेकर अलग-अलग सरकारी विभागों के चक्कर लगा रहे थे। उनका आरोप है कि उनकी जानकारी के बिना जमीन से संबंधित फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए और इसके बाद जमीन को दो कंपनियों के बीच बांट दिया गया।
वोहरा ने इन कंपनियों के नाम स्वयम बिल्डर्स और सेवन इलेवन कंस्ट्रक्शंस बताए थे। उनका दावा था कि दोनों कंपनियों का संबंध नरेंद्र मेहता से है। इस विवाद को लेकर साल 2015 में पुलिस में एफआईआर भी दर्ज की गई थी।
वोहरा का यह भी दावा है कि उन्होंने गुजरात के वडनगर स्थित बीएन स्कूल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ पढ़ाई की थी। 8 सितंबर को उन्होंने प्रधानमंत्री से मुलाकात कर जमीन विवाद में हस्तक्षेप करने और मामले की CBI जांच कराने की मांग की थी। दोनों की मुलाकात की तस्वीरें भी सामने आई थीं।
प्रधानमंत्री से मुलाकात के बाद तेज हुई कार्रवाई
वोहरा के मुताबिक, पीएम मोदी से मिलने के बाद मामले में गतिविधियां तेजी से शुरू हुईं। मीरा-भायंदर नगर निगम ने दोनों कंपनियों के प्रबंधन को 16 सितंबर को अपना पक्ष रखने और पूरे मामले पर स्पष्टीकरण देने के लिए बुलाया था।
इससे पहले मंगलवार को मुख्यमंत्री के प्रिंसिपल सेक्रेटरी श्रीकर परदेशी ने मंत्रालय में एक बैठक आयोजित की। इसमें असगरअली वोहरा के अलावा नरेंद्र मेहता, मीरा-भायंदर नगर निगम आयुक्त राधा बिनोद शर्मा और टाउन प्लानर पुरुषोत्तम शिंदे भी शामिल हुए। बैठक के बाद जमीन विवाद में एक अहम बदलाव सामने आया। सेवन इलेवन कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड ने मामले से पीछे हटने का फैसला लिया।
कंपनी ने कंस्ट्रक्शन परमिट सरेंडर किया
आधिकारिक दस्तावेजों के मुताबिक, सेवन इलेवन कंस्ट्रक्शन ने मीरा-भायंदर नगर निगम के असिस्टेंट डायरेक्टर ऑफ टाउन प्लानिंग को पत्र भेजकर प्लॉट से जुड़ा कमेंसमेंट सर्टिफिकेट सरेंडर कर दिया।
कंपनी ने दस्तावेज में बताया कि उसने 13 जून 2019 को रजिस्टर्ड डीड के जरिए यह प्लॉट खरीदा था। इसके बाद 17 अप्रैल 2026 को उसे निर्माण की अनुमति मिली थी। लेकिन जमीन के मालिकाना हक को लेकर विवाद सामने आने के बाद कंपनी ने निर्माण परमिट वापस करने का निर्णय लिया। कंपनी ने नगर निगम से कंस्ट्रक्शन परमिट रद्द करने के साथ प्रोजेक्ट के लिए जमा की गई फीस लौटाने की मांग भी की है।
नरेंद्र मेहता ने पुरानी शिकायत वापस लेने की बात कही
इसी बीच नरेंद्र मेहता की ओर से पुलिस कमिश्नर को भी एक पत्र भेजा गया। इसमें उन्होंने असगरअली वोहरा और उनके सहयोगी अजय ढोका के खिलाफ पहले दर्ज कराई गई शिकायत वापस लेने की बात कही।
मेहता के अनुसार, दोनों पक्षों के बीच समझौता हो चुका है। साल 2015 में दर्ज शिकायत में वोहरा और ढोका पर अतिक्रमण और धमकी जैसे आरोप लगाए गए थे। शिकायत वापस लेने से संबंधित पत्र संबंधित अधिकारियों को सौंप दिए गए हैं।
इस घटनाक्रम के बाद असगरअली वोहरा के लंबे समय से चले आ रहे जमीन विवाद में नया मोड़ आया है। एक तरफ कंपनी ने निर्माण अनुमति वापस करने की प्रक्रिया शुरू की है, वहीं नरेंद्र मेहता ने भी पुरानी पुलिस शिकायत वापस लेने की बात कही है। अब देखना यह होगा कि इन कदमों के बाद जमीन के मालिकाना हक से जुड़ा विवाद किस तरह और कितनी जल्दी पूरी तरह सुलझता है।
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