पंचायत-शहरी निकाय चुनावों के अध्यक्ष-उपाध्यक्ष को मिलती हैं कई सुविधाएं
Market. मंडी। पंचायत और शहरी निकाय चुनावों में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के लिए छिड़ी जंग का सबसे बड़ा सच तो यही है कि सिर पर ताज सजते ही सियासी रुतबा बढ़ जाता है। अध्यक्ष और उपाध्यक्ष बनते ही सरकारी सुविधाओं की सौगात तो मिलती ही है, साथ में मानदेय में भी एकाएक बढ़ोतरी हो जाती है। इनके लिए बैठकों में आना अनिवार्य होता है और ऑफिस टाइमिंग फिक्स नहीं होती है। सरकार नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायत के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष तथा पार्षदों को मानदेय प्रदान करती है। यह मानदेय प्रतिमाह अदा किया जाता है। इस नीति के तहत नगर निगम के मेयर को 25000, डिप्टी मेयर को 19000 और पार्षद को 9400 रुपए प्रतिमाह मानदेय दिया जाता है। नगर परिषद अध्यक्ष को 10,800, उपाध्यक्ष को 8,900 और पार्षद को 4,500 रुपए मानदेय दिया जाता है।
नगर पंचायत अध्यक्ष को 9000, उपाध्यक्ष को 7000 और सदस्य को 4500 रुपए दिए जाते हैं। पंचायतीराज संस्थाओं में सबसे अधिक मानदेय जिला परिषद अध्यक्ष को दिया जाएगा। जिला परिषद अध्यक्ष को हर महीने 25 हजार रुपए मिलेंगे, जबकि जिला परिषद उपाध्यक्ष को 19 हजार रुपए प्रतिमाह मानदेय दिया जाएगा। इसके अलावा जिला परिषद सदस्य को भी हर महीने 8,300 रुपए मिलेंगे। पंचायत समिति अध्यक्ष को हर महीने 12 हजार, उपाध्यक्ष को 9000 और पंचायत समिति सदस्य को हर महीने 7,500 रुपए मानदेय मिलेगा। ग्राम पंचायत प्रधान को 7,500 रुपए प्रतिमाह दिए जाएंगे। उपप्रधान को हर महीने 5100 रुपए मिलेंगे। इसके अलावा पंचायत बैठकों में शामिल होने वाले पंचायत सदस्यों को भी प्रति बैठक 1050 रुपए दिए जाएंगे। नेरचौक नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी हितेश कुमार ने बताया कि नगर परिषद भवन में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के लिए अलग से सुसज्जित कार्यालय ऑफिस रूम की व्यवस्था होती है। उनके आधिकारिक कार्यों में सहायता के लिए क्लर्क या स्टाफ उपलब्ध कराया जाता है।