नई दिल्ली: 17 सितंबर 1950 गुजरात के मेहसाणा जिले का वडनगर। यहीं नरेंद्र दामोदरदास मोदी का जन्म हुआ। आज नरेंद्र मोदी 76 साल के हो गए हैं। उनका जीवन उन कहानियों में से एक है, जिसमें एक छोटे शहर से निकला व्यक्ति धीरे-धीरे संगठन की सीढ़ियां चढ़ते हुए देश की सबसे बड़ी राजनीतिक जिम्मेदारी तक पहुंचा।
मोदी की कहानी को सिर्फ प्रधानमंत्री बनने से समझना मुश्किल है। इसके पीछे वडनगर का बचपन, परिवार की चाय की दुकान, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के साथ जुड़ाव, भारतीय जनता पार्टी में संगठनात्मक जिम्मेदारियां और गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में करीब 13 साल का लंबा दौर है। इन पड़ावों ने मिलकर उस राजनीतिक सफर की नींव रखी, जिसका अगला पड़ाव 2014 में प्रधानमंत्री पद बना।
नरेंद्र मोदी का जन्म एक साधारण परिवार में हुआ। प्रधानमंत्री कार्यालय की आधिकारिक जीवनी के मुताबिक, उनका शुरुआती जीवन वडनगर में बीता। पढ़ाई के साथ उन्होंने परिवार की चाय की दुकान पर भी काम किया। यह वही दौर था, जब वडनगर एक छोटे कस्बे के रूप में उनकी जिंदगी का केंद्र था।
बचपन का यह अनुभव बाद में मोदी की सार्वजनिक छवि का भी अहम हिस्सा बना। हालांकि उनकी कहानी सिर्फ चाय की दुकान तक सीमित नहीं रही। किशोरावस्था और युवावस्था में उनका झुकाव सामाजिक और संगठनात्मक गतिविधियों की ओर बढ़ा।
मोदी के राजनीतिक जीवन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का दौर एक बड़ा मोड़ माना जाता है। उन्होंने अहमदाबाद में RSS की गतिविधियों में हिस्सा लिया और 1972 में प्रचारक बने। संगठन के साथ काम करते हुए उन्होंने लंबे समय तक गुजरात में जमीनी स्तर पर काम किया। यही संगठनात्मक अनुभव आगे उनकी राजनीतिक यात्रा में काम आया। बीजेपी के साथ उनकी सक्रिय राजनीतिक भूमिका बढ़ती गई और गुजरात की राजनीति में उनका कद मजबूत होता गया।
नरेंद्र मोदी के जीवन का सबसे बड़ा राजनीतिक मोड़ 7 अक्टूबर 2001 को आया। इसी दिन उन्होंने गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। उस समय गुजरात 2001 के विनाशकारी भूकंप समेत कई चुनौतियों से गुजर रहा था।
मोदी मई 2014 तक गुजरात के मुख्यमंत्री रहे। प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, अक्टूबर 2001 से मई 2014 तक का उनका कार्यकाल गुजरात के किसी मुख्यमंत्री के रूप में सबसे लंबा रहा। मुख्यमंत्री के तौर पर इसी दौर में उनकी पहचान राष्ट्रीय राजनीति में तेजी से बनी। गुजरात की राजनीति से राष्ट्रीय राजनीति की ओर बढ़ना उनके लिए अगला बड़ा कदम था।
2014 का लोकसभा चुनाव नरेंद्र मोदी के राजनीतिक जीवन का निर्णायक अध्याय बना। बीजेपी ने उन्हें प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाया और चुनाव में पार्टी को पूर्ण बहुमत मिला। 26 मई 2014 को नरेंद्र मोदी ने पहली बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। वह आजाद भारत में जन्म लेने वाले पहले प्रधानमंत्री भी बने। इसके साथ ही वडनगर से शुरू हुई कहानी राष्ट्रीय सत्ता के केंद्र दिल्ली तक पहुंच गई।
2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने एक बार फिर पूर्ण बहुमत हासिल किया और नरेंद्र मोदी ने दूसरी बार प्रधानमंत्री पद की जिम्मेदारी संभाली। प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, 2014 और 2019 दोनों चुनावों में बीजेपी ने उनके नेतृत्व में पूर्ण बहुमत हासिल किया था।
इसके बाद 2024 का लोकसभा चुनाव आया। चुनाव के बाद 9 जून 2024 को नरेंद्र मोदी ने लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। इसके साथ ही उनका राष्ट्रीय राजनीतिक सफर एक और महत्वपूर्ण पड़ाव पर पहुंचा।
17 सितंबर 2026 को नरेंद्र मोदी 76 साल के हो गए हैं। लेकिन उनके लिए यह जन्मदिन सिर्फ उम्र का एक आंकड़ा नहीं है। अक्टूबर 2001 में गुजरात के मुख्यमंत्री बनने से लेकर अब तक सरकार के मुखिया के रूप में उनके सार्वजनिक जीवन को 25 साल पूरे होने का दौर भी चल रहा है। बीजेपी इस मौके पर 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक ‘सेवा संकल्प अभियान’ आयोजित कर रही है।
वडनगर की गलियों से शुरू हुई कहानी आज 7 लोक कल्याण मार्ग तक पहुंच चुकी है। बीच में चाय की दुकान थी, फिर संगठन का लंबा दौर आया, गुजरात की सत्ता मिली और उसके बाद दिल्ली की सबसे बड़ी राजनीतिक कुर्सी।
नरेंद्र मोदी की राजनीतिक यात्रा को समझने के लिए शायद यही सबसे अहम बात है- यह एक दिन में बनी कहानी नहीं है। 1950 में वडनगर से शुरू हुआ सफर 2001 में गुजरात और 2014 में दिल्ली पहुंचा। 2019 और 2024 ने इसे लगातार आगे बढ़ाया। 76वें जन्मदिन पर इस सफर को पीछे मुड़कर देखने पर साफ दिखता है कि उनके जीवन में हर पड़ाव अगले बड़े पड़ाव की जमीन तैयार करता गया।
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