BREAKING: श्मशान घाट में जलती चिता के सामने युवती का डांस, सोशल मीडिया पर मचा बवाल
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New Delhi. नई दिल्ली। सोशल मीडिया का रील ट्रेंड लोगों को किस हद तक ले जाएगा, इसका अंदाज़ा हाल ही में वायरल हुए एक वीडियो से लगाया जा सकता है। पहले तक लोग शादी-ब्याह, जन्मदिन, मॉल, पार्क या सड़क किनारे रील बनाकर वायरल होने की कोशिश करते थे, लेकिन अब यह सनक इतनी बढ़ चुकी है कि लोग कैमरा लेकर सीधे श्मशान घाट पहुंचने लगे हैं। यह मामला सिर्फ अजीब या चौंकाने वाला ही नहीं, बल्कि नैतिकता और संवेदनाओं के लिहाज से बेहद आपत्तिजनक है। ताज़ा घटना में एक युवती का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें वह जलती हुई चिता के सामने साड़ी पहनकर डांस करती दिखाई दे रही है। इस हरकत ने इंटरनेट पर तीखी बहस और गुस्से की लहर पैदा कर दी है। वीडियो में स्पष्ट रूप से दिखता है कि कैमरे के ठीक पीछे चिता जल रही है, राख उड़ रही है और उसके बावजूद युवती बार-बार पोज देकर डांस मूव्स कर रही है।
जलती चिता के बीच ‘कंटेंट क्रिएशन’
इस वायरल वीडियो में युवती पारंपरिक साड़ी पहनकर पूरी तरह से मेकअप और सजधज के साथ खड़ी है। पृष्ठभूमि में जलती लकड़ियां, उठता हुआ धुआं और गम्भीर माहौल साफ नज़र आता है, लेकिन युवती का चेहरा और व्यवहार इस माहौल से बिलकुल विपरीत है। वह कैमरे के सामने मुस्कुराती है, ठुमके लगाती है और बार-बार अपनी पोज़ बदलती है, मानो वह किसी विवाह समारोह या फिल्मी सेट पर शूट कर रही हो। बताया जा रहा है कि यह वीडियो किसी स्थानीय श्मशान घाट में खासतौर पर रील बनाने के उद्देश्य से शूट किया गया। इस दौरान वहां मौजूद लोगों ने इसे देख भी लिया, लेकिन माना जा रहा है कि युवती और उसके साथ आए लोग तेज़ी से शूट कर वहां से निकल गए।
सोशल मीडिया पर गुस्से की लहर
वीडियो को एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर @ShoneeKapoor नामक यूज़र ने शेयर किया है, जो कुछ ही घंटों में लाखों बार देखा जा चुका है। इस पर हजारों लोगों ने तीखी प्रतिक्रियाएं दी हैं।
एक यूज़र ने लिखा — “इस लड़की को वहीं रोककर समझाना चाहिए था कि ये जगह रील बनाने की नहीं है।”
दूसरे ने लिखा — “वायरल होने की होड़ में इंसानियत, शर्म और संस्कार सब खत्म हो गए हैं।”
तीसरे ने टिप्पणी की — “पुलिस को ऐसे लोगों पर कार्रवाई करनी चाहिए, क्योंकि यह न सिर्फ असंवेदनशील है बल्कि मृतक और उनके परिजनों का अपमान है।”
कुछ यूज़र्स ने इसे ‘घोर असंवेदनशीलता’ और ‘मानवता का पतन’ बताया है। कई लोगों का कहना है कि सोशल मीडिया पर फॉलोअर्स और व्यूज़ पाने की अंधी दौड़ अब खतरनाक मोड़ ले चुकी है, जहां लोग अपनी संस्कृति, परंपरा और बुनियादी मानवीय मूल्यों को भी ताक पर रख रहे हैं।
पहले भी हुए विवाद
यह पहली बार नहीं है जब सोशल मीडिया कंटेंट बनाने के चक्कर में लोग विवादों में फंसे हों। इससे पहले भी कई मामले सामने आ चुके हैं, जहां लोगों ने धार्मिक स्थलों, अस्पतालों, पुलिस थानों, यहां तक कि दुर्घटना स्थलों पर भी रील बनाकर पोस्ट की है। पिछले साल वाराणसी में गंगा आरती के दौरान एक युवती के रील बनाने का मामला वायरल हुआ था, जिसे लोगों ने धार्मिक भावनाओं का अपमान करार दिया था। विशेषज्ञों का मानना है कि ‘कंटेंट क्रिएशन’ की इस होड़ में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स ने प्रतिस्पर्धा का माहौल बना दिया है, जहां क्रिएटर्स ध्यान खींचने के लिए हर हद पार करने को तैयार हैं। लेकिन जब ये कोशिशें किसी की निजी त्रासदी या संवेदनशील माहौल में की जाती हैं, तो यह न सिर्फ नैतिक रूप से गलत है बल्कि कई मामलों में कानूनी रूप से भी अपराध हो सकता है।
कानूनी पहलू
कानून विशेषज्ञों के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति सार्वजनिक स्थान पर किसी की मौत या अंतिम संस्कार जैसे अवसर पर अशोभनीय व्यवहार करता है और इससे मृतक के परिवार की भावनाओं को ठेस पहुंचती है, तो यह भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 504 (जानबूझकर अपमान करना), धारा 505 (लोक शांति भंग करने वाला कथन) और आईटी एक्ट के प्रावधानों के तहत दंडनीय हो सकता है। हालांकि, इस तरह के मामलों में पुलिस तभी कार्रवाई कर सकती है जब पीड़ित पक्ष शिकायत दर्ज कराए या संबंधित वीडियो किसी कानून का स्पष्ट उल्लंघन करे।
परिवार और मृतक का अपमान
श्मशान घाट वह स्थान है जहां लोग अपने प्रियजनों को अंतिम विदाई देने आते हैं। यहां का माहौल स्वाभाविक रूप से गम्भीर और भावुक होता है। ऐसे में जलती चिता के सामने किसी का डांस करना और उसे मनोरंजन के तौर पर सोशल मीडिया पर डालना, मृतक और उनके परिजनों के लिए अपमानजनक है। इस घटना ने यह सवाल भी खड़ा कर दिया है कि क्या सोशल मीडिया की ‘वायरल कल्चर’ ने हमें इतना असंवेदनशील बना दिया है कि हम किसी के शोक और दुख में भी अपना मनोरंजन ढूंढने लगे हैं।
नतीजा और अपील
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि वीडियो किस शहर या किस श्मशान घाट का है और युवती कौन है। हालांकि, घटना के बाद से लोग लगातार मांग कर रहे हैं कि ऐसे मामलों में पुलिस को सख्ती दिखानी चाहिए और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को भी ऐसे कंटेंट को तुरंत हटाना चाहिए। यह मामला एक चेतावनी है कि रील या वीडियो बनाने की होड़ में हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि हर स्थान और अवसर की अपनी गरिमा होती है। खासकर श्मशान घाट जैसे स्थान, जहां लोग गहरे दुख और पीड़ा में होते हैं, वहां किसी भी तरह का मनोरंजनात्मक शूटिंग करना न केवल असंवेदनशील है बल्कि समाज के मूल्यों के खिलाफ भी है।