Lucknow लखनऊ: जगद्गुरु रामभद्राचार्य के हालिया बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा सांसद डॉ. दिनेश शर्मा ने कहा है कि “रामभद्राचार्य एक संत पुरुष हैं, और संत के मुख से निकले वचन व्यापक दृष्टिकोण वाले होते हैं।” उन्होंने कहा कि हिंदुत्व का अर्थ किसी धर्म या व्यक्ति को विभाजित करना नहीं, बल्कि सभी जीवों के कल्याण की भावना से जुड़ा है। दिनेश शर्मा ने लखनऊ में मीडिया से बातचीत के दौरान कहा, “मैं कभी हिंदू और मुस्लिम के बीच विभाजन की बात नहीं करता। अगर कोई ‘हिंदू’ शब्द की व्याख्या करे, तो उसका अर्थ है — वह व्यक्ति जो सबके कल्याण की कामना करता है, सभी प्राणियों में सद्भावना रखता है।”
उन्होंने कहा कि आज समाज में कई लोग “हिंदू” शब्द को केवल धार्मिक पहचान के रूप में देखते हैं, जबकि उसका गहरा दार्शनिक और मानवीय अर्थ है। “हिंदू होने का मतलब किसी के खिलाफ खड़ा होना नहीं, बल्कि सभी के साथ खड़ा होना है,” शर्मा ने कहा। बीजेपी सांसद ने कहा कि संत समाज के वचनों में आध्यात्मिक दृष्टि और सामाजिक समरसता का संदेश छिपा होता है। “रामभद्राचार्य जी के विचार समाज को जोड़ने वाले हैं, तोड़ने वाले नहीं। हमें यह समझना होगा कि भारत की शक्ति उसकी विविधता में एकता में निहित है,” उन्होंने आगे कहा।
शर्मा ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास” के मंत्र पर चल रहा है। “यह वही भावना है जो सनातन संस्कृति के मूल में है — किसी के प्रति द्वेष नहीं, सबके प्रति प्रेम और सेवा भाव। उन्होंने समाज में धार्मिक सौहार्द बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि राजनीति से ऊपर उठकर हमें मानवता के मूल सिद्धांतों को अपनाना चाहिए। “हमारा देश उसी समय मजबूत होगा, जब हर व्यक्ति अपने धर्म के मूल संदेश को समझे और दूसरों के धर्म का सम्मान करे,” उन्होंने कहा।
जगद्गुरु रामभद्राचार्य के हालिया बयान ने बीते कुछ दिनों में राजनीतिक हलचल पैदा कर दी थी। इस संदर्भ में दिनेश शर्मा का बयान बीजेपी की ओर से एक संतुलित और सौहार्दपूर्ण प्रतिक्रिया के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि “हिंदुत्व को लेकर जो भ्रम फैलाने की कोशिश की जाती है, वह गलत है। हिंदुत्व का मतलब है ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः।’ यही भारत की आत्मा है, और यही हमारी संस्कृति की पहचान है।”
कार्यक्रम के अंत में दिनेश शर्मा ने कहा कि भारत को जोड़ने में संत समाज, शिक्षाविद और युवाओं की भूमिका महत्वपूर्ण है। “अगर हम सब मिलकर इस भावना को समझें और अमल में लाएं, तो देश न केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि नैतिक रूप से भी और मजबूत बनेगा। उनके इस वक्तव्य को सोशल मीडिया पर खूब सराहना मिल रही है। कई लोगों ने इसे धर्म और राजनीति में समरसता का संदेश बताते हुए साझा किया है। शर्मा के अनुसार, “संतों के शब्द दिशा दिखाते हैं, और राजनीति को मार्गदर्शन देते हैं, विभाजन नहीं।