New Delhi. नई दिल्ली। लोकसभा में एंटी पेपर लीक बिल को लेकर मंगलवार को विस्तृत चर्चा शुरू हुई। बिल पर चर्चा की शुरुआत से पहले लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि यह दिन सभी सदस्यों के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों इस विधेयक पर चर्चा के लिए सहमत हुए हैं। उन्होंने कहा कि इस बिल का उद्देश्य देश में होने वाली लोक परीक्षाओं को अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष और शुचितापूर्ण बनाना है।
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक पर कहा, "... मैंने सभी पार्टियों के नेताओं, कांग्रेस के चीफ व्हिप, समाजवादी पार्टी के चीफ व्हिप, DMK और NCP से बात की और सभी इस बात पर सहमत हुए कि 6 घंटे की चर्चा को 2 घंटे और बढ़ाकर 8 घंटे कर दिया जाए। हम सब इस बात पर सहमत हुए... मैं सदन में यह बात कह रहा हूं कि वेणुगोपाल जी, अगर आपको अतिरिक्त 2 घंटे चाहिए, तो सरकार को कोई आपत्ति नहीं है। हम मिलकर इस पर फैसला कर सकते हैं। स्पीकर ने अभी कहा है कि इसे एक घंटा और बढ़ाने में हमें कोई आपत्ति नहीं है...अगर 8 घंटे से भी ज़्यादा समय की ज़रूरत पड़ी, तो हम 10 घंटे की चर्चा के लिए भी तैयार हैं..."
स्पीकर ओम बिरला ने कहा कि परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता और पारदर्शिता राष्ट्रहित से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है। उन्होंने सभी सांसदों से अपील की कि वे इस बिल पर सार्थक और रचनात्मक विचार रखें, ताकि ऐसा कानून बनाया जा सके जो देश की परीक्षा व्यवस्था को और मजबूत बना सके। उन्होंने कहा कि कानून जितना प्रभावी होगा, उतनी ही बेहतर तरीके से परीक्षाओं में शुचिता और निष्पक्षता सुनिश्चित की जा सकेगी। लोकसभा में एंटी पेपर लीक बिल पर चर्चा के लिए शुरुआत में छह घंटे का समय निर्धारित किया गया था। हालांकि, विपक्षी सांसदों ने चर्चा के लिए अधिक समय देने की मांग की। विपक्ष की ओर से कम से कम दो घंटे अतिरिक्त समय की मांग रखी गई। इसके बाद संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि सरकार इस महत्वपूर्ण विषय पर अधिक समय चर्चा के लिए देने को तैयार है।
किरेन रिजिजू ने सदन में कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो सरकार 10 घंटे तक भी इस बिल पर चर्चा कराने के लिए तैयार है। इसके बाद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन की राय ली और सभी सदस्यों की सहमति के बाद एंटी पेपर लीक बिल पर 10 घंटे चर्चा कराने की घोषणा कर दी। गौरतलब है कि लोकसभा में एक दिन पहले प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्यमंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने एंटी पेपर लीक बिल पेश किया था। हालांकि, उस दिन बिल पर चर्चा शुरू नहीं हो सकी थी। विपक्षी सदस्य गृह मंत्री अमित शाह के बयान की मांग को लेकर चर्चा शुरू करने से पहले अड़े हुए थे। इसके चलते सदन की कार्यवाही में इस बिल पर विस्तार से चर्चा नहीं हो पाई थी।
अब मंगलवार को लोकसभा में इस विधेयक पर चर्चा हो रही है। सरकार का कहना है कि यह बिल देश में होने वाली सरकारी और सार्वजनिक परीक्षाओं को सुरक्षित बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। पेपर लीक जैसी घटनाओं पर रोक लगाने और परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने के उद्देश्य से इस कानून को लाया गया है। चर्चा के दौरान डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि देश के अलग-अलग राज्यों और विभिन्न परीक्षाओं में समय-समय पर पेपर लीक की घटनाएं सामने आती रही हैं। उन्होंने कहा कि पहले भी ऐसी घटनाओं पर चर्चा हुई, लेकिन जिस स्तर की कार्रवाई की जरूरत थी, वह नहीं हो सकी। उन्होंने कहा कि अब सरकार एक मजबूत और फुलप्रूफ व्यवस्था तैयार करने की दिशा में काम कर रही है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने अपने संबोधन में पुराने पेपर लीक मामलों का भी जिक्र किया। उन्होंने 2009 में रेलवे भर्ती परीक्षा पेपर लीक से लेकर 2012 में एम्स प्रवेश परीक्षा पेपर लीक तक कई घटनाओं का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं के कारण एक मजबूत कानूनी ढांचे की आवश्यकता महसूस हुई। उन्होंने कहा कि भारत में चार प्रमुख परीक्षा एजेंसियां हैं, जो अलग-अलग स्तर की परीक्षाओं का आयोजन करती हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष 1992 में एक समिति ने केंद्रीय परीक्षा प्रणाली को लेकर सुझाव दिया था। इसके बाद वर्ष 2010 में भी ऐसी ही व्यवस्था बनाने का सुझाव दिया गया था। लेकिन पहली बार वर्ष 2024 में इस दिशा में विधेयक लाया गया।
सरकार के अनुसार, इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य परीक्षाओं में पारदर्शिता और शुचिता सुनिश्चित करना है। इसके तहत पेपर लीक, नकल माफिया और परीक्षा प्रक्रिया को प्रभावित करने वाले लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का प्रावधान किया गया है। सरकार का कहना है कि इससे छात्रों के हितों की रक्षा होगी और मेहनत करने वाले अभ्यर्थियों को न्याय मिलेगा। देशभर में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले लाखों छात्र लंबे समय से पेपर लीक की समस्या को लेकर चिंता जताते रहे हैं। उनका कहना है कि पेपर लीक होने से मेहनत करने वाले उम्मीदवारों के भविष्य पर सीधा असर पड़ता है। ऐसे में एक मजबूत कानून की जरूरत महसूस की जा रही थी।
वहीं विपक्ष की ओर से भी इस बिल पर कई सवाल उठाए जाने की संभावना है। विपक्ष परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता के साथ-साथ सरकार की जवाबदेही और राज्यों में होने वाली घटनाओं पर प्रभावी कार्रवाई की मांग कर सकता है।लोकसभा में होने वाली 10 घंटे की चर्चा के दौरान पक्ष और विपक्ष के सांसद इस विधेयक के अलग-अलग पहलुओं पर अपनी राय रखेंगे। इसके बाद बिल को आगे की प्रक्रिया के लिए भेजा जाएगा। सरकार उम्मीद कर रही है कि यह कानून देश की परीक्षा व्यवस्था में सुधार लाने और पेपर लीक जैसी घटनाओं पर रोक लगाने में प्रभावी साबित होगा।